राज कपूर की फ़िल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के 47 साल पूरे, कई वजहों से की जाती है याद

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सर्कस के जोकर की ज़िंदगी को दर्शाती दार्शनिक मिज़ाज वाली इस फ़िल्म को बनाने में राज कपूर को 6 साल लगे थे।
मुंबई। बॉलीवुड के इतिहास में कुछेक फ़िल्में ऐसी भी बनी हैं जो अभिनेता के पहचान के साथ जुड़ गईं। एक ऐसी ही फ़िल्म है- ‘मेरा नाम जोकर’। यह फ़िल्म राज कपूर के पहचान के साथ जुड़ी हुई है। ‘मेरा नाम जोकर’ आज ही के दिन साल 1970 में रिलीज़ हुई थी। रिलीज़ के 47 साल बाद भी यह फ़िल्म खूब देखी और दिखाई जाती है।

आप यह जानकर चौंक जायेंगे कि जब यह फ़िल्म ‘मेरा नाम जोकर’ रिलीज़ हुई थी तब यह फ़िल्म एक बड़ी फ्लॉप साबित हुई थी और इस फ़िल्म के पिट जाने के बाद राज कपूर कर्जे में डूब गए थे। लेकिन, बदलते समय के साथ-साथ यह फ़िल्म लोगों को पसंद आने लगी और आज कहीं न कहीं हिंदी सिनेमा की एक बेहतरीन फ़िल्मों में यह फ़िल्म गिनी जाती है।

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‘मेरा नाम जोकर’ दरअसल एक जोकर की कहानी है जिसमें जोकर का किरदार राज कपूर ने निभाया है। ऋषि कपूर इस फ़िल्म में पहली बार नज़र आए थे। कहानी में दिखाया गया है कि एक जोकर ख़ुद के ग़मों और दुःखों को भुलाकर कैसे सब को हंसाता है!

फ़िल्म का संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार भी मिला था। फ़िल्म के गीतकार थे शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी। “ए भाई ज़रा देख के चलो” गीत के लिए मन्ना डे को सर्वश्रेष्ठ गायक पुरस्कार से नवाज़ा गया था।

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यह फ़िल्म तब सिमी ग्रेवाल के कुछ बोल्ड दृश्यों के लिए भी याद किया जाता है। सर्कस के जोकर की ज़िंदगी को दर्शाती दार्शनिक मिज़ाज वाली इस फ़िल्म को बनाने में राज कपूर को 6 साल लगे थे। लगभग सवा चार घंटे की फ़िल्म का संगीत हिट रहा था। धर्मेंद्र, मनोज कुमार और राजेंद्र कुमार जैसे बड़े स्टार्स को केमियो भी फ़िल्म को बचा नहीं सका। मगर, इसकी सिनेमेटिक वैल्यू की वजह से फ़िल्म कल्ट-क्लासिक मानी जाती है।

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