लंबी है हाईप्रोफाइल मामलों में सीबीआइ की विफलता की दास्तां

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कई हाईप्रोफाइल मामले में सीबीआइ आरोपों को साबित करने में विफल रही है

नीलू रंजन, नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अदालत के सामने आरोपों को साबित करने में सीबीआइ की विफलता कोई नई बात नहीं है। इसके पहले भी कई हाईप्रोफाइल मामले में सीबीआइ आरोपों को साबित करने में विफल रही है। निचली अदालत से लेकर देश की शीर्ष अदालत तक में सीबीआई के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।

बोफोर्स घोटाला

आरोपियों को सजा दिलाने में सीबीआइ की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण बोफोर्स घोटाला है। 64 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में 250 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सीबीआइ एक भी आरोपी सजा नहीं दिला पाई। निचली अदालत और हाईकोर्ट से एक-एक कर आरोपी बरी होते रहे और सीबीआइ इनके फैसलों के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील तक नहीं कर पाई। हद तो तब हो गई, जब 2008 में खुद सीबीआइ ने लंदन की अदालत में मुख्य आरोपी क्वात्रोची का बैंक एकाउंट डीफ्रीज करने की दलील दी। जबकि 10 सालों तक सीबीआइ यह कहती रही थी कि इस एकाउंट में बोफोर्स दलाली की रकम है और यह जांच का अहम सबूत है।

जैन हवाला केस

नब्बे के दशक में जैन भाइयों की डायरी में बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के हजारों करोड़ रुपये के रिश्वत देने के खुलासे ने राजनीति में भूचाल ला दिया था। सत्ता और विपक्ष के लगभग सभी बड़े नेताओ के इस डायरी में नाम थे। बड़े नेताओं के खिलाफ सीबीआइ की जांच पर पूर्णविराम तो सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया। लेकिन दूसरे नौकरशाहों के खिलाफ सीबीआइ की चार्जशीट भी अदालत में मुंह की खाती रही। इसी साल एक सितंबर को निचली अदालत में जैन हवाला मामले के अंतिम केस में भी आरोपियों को बरी कर दिया। सीबीआइ ने अभी तक इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील नहीं की है।

सांसद घूस कांड

पीवी नरसिम्हा राव की सरकार को अविश्वास मत से बचाने के लिए झारखंड मुक्तिमोर्चा के सांसदों की खरीद के मामले में सीबीआइ ने पूरी मुस्तैदी के साथ जांच शुरू की और रिश्वत की रकम समेत कई अहम सबूत भी जुटा लिये थे। लेकिन अंतत यह पूरा केस आगे नहीं बढ़ पाया और सीबीआइ की चार्जशीट आज भी उसके मालखाने की शोभा बढ़ा रही है।

शशिनाथ झा हत्याकांड

सासंद खरीद कांड के चश्मदीद गवाह और झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन के निजी सचिव शशिनाथ झा हत्याकांड में भी सीबीआइ सजा दिलाने में अभी तक विफल रही है। तीसहजारी कोर्ट ने इस मामले में शिबू सोरेन को सजा जरूर सुनाई थी। लेकिन बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआइ के सबूतों को सिरे से खारिज करते हुए शिबू सोरेन को बरी कर दिया। हद तो यह हो गई कि सीबीआइ ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील तक नहीं की। बाद में शशिनाथ झा की पत्नी और बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की।

लालू यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस

चारा घोटाले की जांच के दौरान सीबीआइ ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव उनकी पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति बनाने का भी केस दर्ज किया था। लेकिन पटना की विशेष सीबीआइ अदालत ने दोनों को आरोपों से बरी कर दिया। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सीबीआइ ने पटना हाईकोर्ट में अपील तक नहीं की और केस वहीं खत्म हो गया।

मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस

ताज कॉरिडोर घोटाले की जांच के दौरान सीबीआइ ने उत्तरप्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। सीबीआइ लगभग एक दशक तक मायावती के खिलाफ सबूतों को लेकर घूमती रही। लेकिन आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि उसने कभी मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज करने की अनुमति ही नहीं दी थी। इस तरह से एफआइआर ही रद्द हो गई और सारे सबूत सीबीआइ में धूल खा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का विधायक खरीद कांड

छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने नवनिर्वाचित विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी। इस मामले में टेलीफोन पर अजीत जोगी की बातचीत के टेप और उनकी समर्थन की चिट्ठी भी मौजूद था। यहां तक तक रिश्वत ने दिये गए पैसे भी बरामद हुए थे। लेकिन सारे सबूतों के बावजूद सीबीआइ ने कानूनी पेंच का हवाला देते हुए केस बंद कर दिया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।

आरुषि हत्याकांड

आरुषि हत्याकांड की जब सीबीआइ जांच शुरू हुई थी, तब लोगों को सच्चाई के खुलासे की उम्मीद थी। लेकिन सीबीआइ कातिल को खोजने में विफल रही और मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। वह अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को चार्जशीट तब्दील करते हुए तलवार दंपत्ति को सजा सुना दी, जिन्हें कुछ महीने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया।

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