तख्त श्री हरिमंदिर जी में 351 वां प्रकाश पर्व का आगाज

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पटना सिटी। श्री गुरु गो¨वद ¨सह जी महाराज के 351 वें प्रकाशोत्सव को लेकर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में चार दिवसीय धार्मिक आयोजन शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। सुबह 4:15 बजे तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के हजूरी रागी जत्था भाई विक्रम ¨सह के कीर्तन से पंडाल में धार्मिक आयोजन शुरू हुआ। सुबह 6:15 बजे अरदास तथा हुक्मनामा के पश्चात कड़ाह प्रसाद का वितरण संगतों के बीच किया गया। जगाधरी के भाई स¨तदर ¨सह द्वारा कीर्तन प्रस्तुत किया गया। तख्त श्री हरमंदिर के हजूरी कथावाचक भाई सुखदेव ¨सह ने दशमेश गुरु के जीवनी पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के दरबार हॉल में जत्थेदार ज्ञानी इकबाल ¨सह ने गुरु महाराज के शस्त्र के दर्शन कराया। अरदास, हुक्मनामा के बाद तख्त श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी जत्था के भाई जो¨गदर ¨सह के कीर्तन से संगत निहाल हुई। दोपहर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति अमृतसर धर्म प्रचार कमेटी के कवीशरी जत्था के भाई रणजीत ¨सह साहिब व ढाढी जत्था के भाई जनरैल ¨सह जी खुंडा ने दशमेश गुरु के जीवनी पर आधारित कीर्तन से संगत को निहाल किया।

तख्त साहिब के विशेष पंडाल में शाम का कार्यक्रम

चार बजे दिन में तख्त श्री हरिमंदिर के सजे विशेष पंडाल में चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तख्त श्री हरिमंदिर के हजूरी रागी जत्था के भाई रजनीश ¨सह के सोदर चौकी से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद रहरासि साहिब का पाठ, आरती, हुक्मनामा के बाद जत्थेदार ज्ञानी इकबाल ¨सह ने दशमेश गुरु की जन्म कथा कही।

अमृतसर के सचखंड श्री हरिमंदिर साहेब के हजूरी रागी जत्था भाई कुलदीप ¨सह के शबद कीर्तन से संगत निहाल हुई। रात सवा नौ बजे से जगाधरी वाले भाई स¨तदर ¨सह के कीर्तन से संगत निहाल हुई। रात दस बजे अमृतसर के सचखंड श्री हरिमंदिर साहेब के हजूरी रागी जत्था के भाई जुझार ¨सह व भाई गुरुमीत ¨सह जी शांत हजूरी रागी जत्था द्वारा प्रस्तुत कीर्तन से संगत निहाल हुई। अरदास, हुक्मनामा के बाद समागम की समाप्ति हुई।

शुक्रवार की शाम चार बजे बाईपास टेंट सिटी में दीवान का शुभारंभ तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के पूर्व हजूरी रागी जत्था के भाई सरबजीत ¨सह के सोदर चौकी से हुआ। रहरासि साहिब का पाठ, आरती, अरदास व हुक्मनामा के बाद बाबा वकाला साहिब के प्रचारक भाई जयपाल ¨सह ने दशमेश गुरु की जीवनी पर प्रकाश डाला। अमृतसर के सचखंड हरिमंदिर साहेब के हजूरी रागी जत्था के भाई गुरकीरत ¨सह, भाई हर¨मदर ¨सह, भाई अनंद ¨सह व भाई कमलजीत ¨सह के कीर्तन से संगत निहाल हुई। अरदास, हुकुमनामा के बाद समागम की समाप्ति हुई।

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