कुलभूषण जाधव से पाकिस्‍तान में मिला परिवार, 30 मिनट मुलाकात की थी मिली इजाजत, 10 बातें

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नई दिल्ली: जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी उनसे मुलाकात की. पाकिस्‍तान ने इस मुलाकात के लिए जाधव के परिवार को 30 मिनट का समय दिया था. इस यात्रा से पहले भारत ने पाकिस्तान के सामने तीन शर्तों रखी थी जिसे पाकिस्‍तान के स्‍वीकार किया था और उसके बाद ही भारत ने इस यात्रा को हरी झंडी दी. वहीं पाकिस्‍तान के अधिकारी डॉ.मोहम्‍मद फैजल ने कहा, पाक ने जाधव की मां और पत्‍नी को मिलने की इजाजत मानवीय आधार पर दी है, क्‍योंकि आज मोहम्‍मद जिन्‍ना का जन्‍मदिन हैं.
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भारत पहले ही पाकिस्तान से सोवेरन गारंटी हासिल कर चुका था जिसके तहत भारत ने मुख्य तौर पर यह शर्त रखी थी की जब कुलभूषण का परिवार पाकिस्तान में होगा तो ना तो मां और ना ही पत्नी से किसी तरह की पूछताछ की कोशिश की जाएगी.
दूसरी शर्त जब तक वे पाकिस्तान की जमीन पर रहेंगे उनकी पूरी सुरक्षा की गारंटी पाकिस्तान की होगी.
तीसरी शर्त यह कि भारतीय उच्चायोग का एक अधिकारी हमेशा परिवार के साथ रहेगा. यहां तक कि जब परिवार कुलभूषण जाधव से मिल रहा होगा तब भी. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस्लामाबाद में भारतीय उप उच्चायुक्त जेपी सिंह कुलभूषण के परिवार के साथ मौजूद रहेंगे.
पाकिस्तान ने भारत से यह अनुरोध किया था कि परिवार की बातचीत मीडिया से कराई जाए. लेकिन भारत ने इसकी इजाजत नहीं दी. कारण परिवार की सुरक्षा और उनकी परेशान मानसिक स्थिति सकती है.
परिवार को पाकिस्तान ने 3 दिनों का वीजा दिया था लेकिन परिवार सिर्फ 1 दिन के लिए ही पाकिस्तान की जमीन पर होगा. पहले यह जानकारी आई थी कि 24 तारीख को परिवार वाघा बॉर्डर क्रॉस करेगा, 25 को इस्लामाबाद में मुलाकात होगी और फिर 26 को परिवार वापस लौटेगा.
भारत की तरफ से पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को जो सूचना दी गई उसके मुताबिक परिवार 25 दिसंबर को ही कमर्शियल फ्लाइट से पाकिस्तान उतरेगा और कुलभूषण से मुलाकात के बाद उसी दिन वापस निकल लेगा.
पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव पर जासूसी, आतंकवाद फैलाने और देश के खिलाफ साजिश में शामिल होने का आरोप लगाकर मुकदमा चलाया. एकतरफा सुनवाई और जबरिया इकबालिया बयान के आधार पर उसे दोषी करार दिया और फिर फांसी की सजा सुना दी. इस बीच भारत ने बीस बार कुलभूषण से मिलने की इजाजत मांगी लेकिन पाकिस्तान ने काउंसलर एक्सेस की भारत की मांग को हर बार ठुकरा दिया.
भारत ने साफ़ कर दिया कि कुलभूषण उसका नागरिक है लेकिन नेवी में सर्विंग नहीं बल्कि रिटायरमेंट ले चुका है. ईरान में व्यवसाय के सिलसिले में था जहां से अगवा कर उसे पाकिस्तान ले जाया गया और फिर उसे झूठे मामले में फंसा दिया गया.
कुलभूषण को पाकिस्तान आनन-फानन में फांसी देता इससे पहले ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामले को उठा दिया. अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फांसी पर फौरी रोक लगा दी. मामला वहां अभी विचाराधीन है, सुनवाई आगे होगी लेकिन फ़ैसले को पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा गया.
भारत लगातार यह भी मांग करता रहा था कि कुलभूषण की मां को वीजा दिया जाए ताकि वह वहां जाकर कुलभूषण से मिल सकें. उनका हाल जान सकें और कुलभूषण के बिना पर अदालती लड़ाई को आगे बढ़ा सकें. लेकिन पाकिस्तान ने पहले हां नहीं किया. अंतरराष्ट्रीय अदालत के फ़ैसले के बाद दुनिया में अपना चेहरा बचाने के लिए पाकिस्तान ने मानवीय आधार पर कुलभूषण की पत्नी को वीजा देने का प्रस्ताव रखा. लेकिन भारत ने कहा की पत्नी के साथ-साथ मां को भी वीजा चाहिए. फिर पाकिस्तान ने दोनों को वीजा देने का फैसला किया.

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