बिहार के अजब-गजब थाने: इनकी सच्चाई जानकर आप हो जाएंगे हैरान

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बिहार के भागलपुर और किशनगंज जिले में कुछ थाने एेसे हैं, जहां एक थाने में तो एफआइआर ही दर्ज नहीं होती तो एक थाना टूटी-फूटी झोपड़ी में चलता है, वहां कैदियों के लिए लॉकअप भी नहीं है।

भागलपुर । बिहार में कुछ अजब-गजब थाने भी हैं, जिनके बारे में जानकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। जी हां, हम भागलपुर और किशनगंज में चल रहे एेसे थाने की बात कर रहे हैं जहां एक थाने में एफअाइआर दर्ज नहीं होती तो वहीं किशनगंज का एक थाना टूटी-फूटी झोपड़ी में चल रहा है और इस थाने में लॉकअप रूम भी नहीं है।

सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लग सकता है कि भागलपुर में एक ऐसा थाना भी है जहां प्राथमिकी दर्ज नहीं होती है मगर इस सच्चाई से रू-ब-रू करा रहा है कोतवाली थाना परिसर में सात वर्ष पूर्व खुला ट्रैफिक थाना।2011 से लेकर अब तक जिले में चार एसएसपी संजय सिंह, केएस अनुपम, राजेश कुमार और विवेक कुमार बदल गए। मगर ट्रैफिक थाने की व्यवस्था नहीं बदली।इसी वर्ष मुख्यालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए ट्रैफिक थाने को कुछ संसाधन तो उपलब्ध करा दिए गए मगर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कोई दिशा निर्देश वरीय अधिकारियों द्वारा नहीं दिया गया। नतीजतन जिस थाना क्षेत्र में ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद कार्रवाई का मामला होता है, संबंधित थाने में ही प्राथमिकी दर्ज की जाती है।

बदल गए चार थानेदार

2011 से अब तक ट्रैफिक थाने के चार थानेदार बदल गए। बावजूद शक्ति नहीं रहने के कारण एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। फिलवक्त यहां संजय कुमार झा इंस्पेक्टर और अमर कुमार थानेदार के पद पर पदस्थापित हैं।

जर्जर भवन में है थाना

ट्रैफिक थाना कोतवाली परिसर के ही एक जर्जर भवन में किसी तरह जैसे- तैसे चल रहा है। यहां अफसरों को बैठने के लिए जगह तक नहीं है। ट्रैफिक जवानों से ही लॉ एंड ऑर्डर का काम लिया जाता है। यहां ट्रेंड जवानों की भी कमी है। थाने में एफआइआर दर्ज करने में कोई तकनीकी पेंच नहीं है।

पदाधिकारियों की कमी के कारण नियमित अनुसंधानकर्ताओं की कमी है। नतीजतन एफआइआर दर्ज नहीं हो पा रहा है। नए साल से थाने में एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।

एसएसपी मनोज कुमार

किशनगंज का एेसा थाना, जहां नहीं है लॉकअप रूम

किशनगंज जिले का एक थाना जहां आकर कैदी भी परेशान हो जाता है कि उसे रखा कहां जाएगा? क्योंकि इस थाने में लॉकअप रूम ही नहीं। बांस और खपरेल से बना यह टूटी-फूटी झोपड़ी की शक्ल लिए यह थाना अपनी स्थापना के समय से ही यह पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहा है।

कैदियों को रखने की नही है व्यवस्था

इस थाने की स्थिति यह है कि इस थाने के पदाधिकारी दूसरी झोपड़ी में रह रहे हैं। जब कभी किसी आरोपी को पकड़कर लाया जाता है तो कोर्ट में पेश होने तक उसे मचान के खूंटे से बांधकर रखा जाता है। वहीं सुरक्षा के लिए मचान पर एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी भी लगाई जाती है।

बिहार का इकलौता थाना, जहां कैदी भी होता है परेशान

संभवत: यह बिहार का इकलौता थाना है जहां कोई लॉकअप रूम नहीं है, जिससे गिरफ्तार कर लाए गए किसी बड़े अपराधी के पकड़े जाने पर उसे किसी अन्य थाने में रखे जाने की मजबूरी है। हालांकि कुछ ही दूरी पर थाने का भवन बनाने की शुरूआत हुई लेकिन बाद में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।

इतना ही नहीं, भागलपुर शहरी क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण ओपी जीरोमाइल ओपी, जोगसर ओपी, महिला थाना में गिरफ्तार अपराधियों या आरोपितों को पकड़ कर हाजत में रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इन थानों और ओपी में हाजत नहीं है और जैसे-तैसे बगैर हाजत के ही ये थाने यूं ही चल रहे हैं।

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