हेगड़े पर राज्यसभा में हंगामा, मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग

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केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के धर्मनिरपेक्षता और संविधान बदलने संबंधी कथित विवादास्पद टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताते हुए विपक्ष ने बुधवार को राज्यसभा में काफी हंगामा किया, जिसके चलते लंच से पहले सदन की कार्यवाही बाधित रही. सरकार ने हालांकि इस मुद्दे से दूरी बनाए रखी. हंगामे के कारण राज्यसभा में शून्यकाल और प्रश्नकाल दोनों नहीं हो पाए.

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि सदस्यों ने जिस मुद्दे पर चिंता जताई है, उस बारे में हम बताना चाहेंगे कि सरकार संविधान के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्री ने बयान दिया है, लेकिन हम उनके विचारों से सहमत नहीं हैं, विपक्षी सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हुए.

भाकपा के डी राजा ने कहा कि उप राष्ट्रपति होने के नाते वेंकैया नायडू संविधान के संरक्षक भी हैं, जो संविधान देश को बीआर अंबेडकर ने दिया है. उन्होंने कहा कि हेगड़े ने अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की है. राजा ने कहा यहां तक कि अंबेडकर ने तो भारत के हिंदू राष्ट्र होने के विचार का भी विरोध किया था. इसी दौरान कुछ सदस्य आसन के समक्ष आ कर हेगड़े को बर्खास्त करने की मांग करते हुए नारे लगाने लगे.

विपक्ष की मांग- मंत्री पद से हटाए जाएं हेगड़े

हंगामे की वजह से सभापति एम वेंकैया नायडू ने बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया. इससे पहले सुबह बैठक शुरू होने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और सपा सहित विपक्षी सदस्यों ने हेगड़े के बयान का मुद्दा उठाया. इन सदस्यों ने कहा कि अगर मंत्री को संविधान में विश्वास नहीं है, तो उन्हें मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए. कुछ विपक्षी सदस्य आसन के समक्ष आ कर अपनी मांग के पक्ष में नारे लगाने लगे.

कांग्रेस ने हेगड़े से मांगा स्पष्टीकरण

सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए, आजाद ने कहा, ‘जो मंत्री भारत के संविधान पर विश्वास नहीं करता, उसे मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.’ तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय और सपा के नरेश अग्रवाल ने भी यह मुद्दा उठाया. राय ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना की भावना का उल्लंघन कतई नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि वह इस बारे में आसन से स्पष्ट व्यवस्था चाहते हैं कि क्या ऐसे व्यक्ति को मंत्री पद पर बने रहने का हक है, जो संविधान का पालन नहीं करता. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का जिक्र संविधान की प्रस्तावना में है. क्या एक मंत्री को संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन करने का हक है.

संविधान लोकतंत्र की रामायण एवं गीता: सपा

सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि संविधान लोकतंत्र की रामायण एवं गीता है. जो भी मंत्री इसका और बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान करता है, उसे तत्काल पद से हटा दिया जाना चाहिए. इसी दौरान सपा के कई सदस्य अग्रवाल की बात का समर्थन करते हुए आसन के समक्ष आ गए. कांग्रेस और तृणमूल सदस्य भी आसन के समक्ष आ गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे.

अंबेडकर ने नहीं शामिल किया ‘धर्मनिरपेक्षता’ शब्द: स्वामी

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने अंबेडकर का स्मारक बना कर उनकी स्मृति का सम्मान करने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि बाबा साहेब का अपमान तो कांग्रेस ने किया है. BJP के सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि अंबेडकर ने संविधान में धर्मनिरपेक्षता शब्द शामिल नहीं किया. नायडू ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर लौट जाने की अपील की. लेकिन सदन में व्यवस्था बनते नहीं देख उन्होंने करीब साढ़े ग्यारह बजे बैठक को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया था.

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