पुलिस-प्रशासन का शर्मनाक चेहरा, किशोर से चटवाये जूते, भेजा रिमांड होम, जानिए

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पटना में एक नाबालिग लड़के को जमानती धारा में रिमांड होम भेजने के आरोप में इंस्‍पेक्‍टर को निलंबित कर दिया गया। वहीं इस मामले में किशोर से जूते भी चटवाये गए थे।

पटना । अपने मातहत के कारनामे की वजह से पुलिस महकमा फिर चर्चा में है। प्रशासनिक अधिकारी के दबाव में आकर मामूली सी बात पर जमानती धारा में नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजने मामले में ट्रैफिक थाने के इंस्पेक्टर शशि शेखर चौहान को बुधवार को निलंबित कर दिया गया। एसएसपी मनु महाराज की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार ने कार्रवाई की। प्रशासनिक अधिकारी ने एक मामूली सी बात पर न सिर्फ किशोर की पिटाई की थी, बल्कि शर्मनाक काम करते हुए किशोर से जूते चटवाये थे।

दरअसल, मंगलवार को कदमकुआं इलाके में एडीएम (स्पेशल) बिरेंद्र कुमार पासवान के पैर में 13 साल के किशोर ने स्कूटी से टक्कर मार दी थी। उसके साथ एक अन्य युवक भी था। एडीएम ने दोनों लड़कों को पकड़ लिया और उन्हें बुरी तरह पीटाकर कदमकुआं थाना पुलिस को सौंप दिया।

मामला यातायात से जुड़ा था, इसलिए वहां की पुलिस ने मामले को गांधी मैदान ट्रैफिक थाने को स्थानांतरित कर दिया। किशोर पटना में अपनी मां के साथ रहता है। घटना की सूचना पर वह थाने पहुंची और बेटे को छोडऩे की गुहार लगाई। महिला ने एडीएम से भी माफी मांगी, लेकिन वह केस करने की जिद नहीं छोड़ा। एडीएम के दबाव आगे ट्रैफिक थाने की पुलिस ने भी घुटने टेक दिए और किशोर के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर रिमांड होम भेज दिया।

जुर्माना भरने को तैयार थे घर वाले

नाबालिग के घरवाले मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना भरने के लिए तैयार थे। बावजूद इसके किशोर को न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश कर रिमांड होम भेज दिया।

आइओ का पकड़ा गया झूठ

कांड के अनुसंधानकर्ता विनय कुमार सिंह ने न्यायिक दंडाधिकारी को दिए आवेदन में लिखा कि नाबालिग के घरवाले थाने में नहीं आए, जो कि एसएसपी की जांच में गलत पाया गया। वहीं इंस्पेक्टर ने भी पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं दिया और पूरे घटना से वरीय पदाधिकारियों को अवगत नहीं कराया।

इंस्पेक्टर ने बताई सच्चाई, तब रिहा हुआ किशोर

एसएसपी के आदेश के बाद कांड का अनुसंधानकर्ता विनय कुमार सिंह देर शाम न्यायिक पदाधिकारी के समक्ष गया और सच्चाई से अवगत कराया। इसके बाद उसे रिमांड होम से रिहा कर दिया गया। किशोर के स्कूल में परीक्षा चल रही है। पुलिसिया पचड़े में फंसने के कारण वह दो परीक्षाओं में अनुपस्थित रहा।

ट्रैफिक थाने में मांगी गई थी रिश्वत

कंकड़बाग से आकर किशोर की मां और बहन ने एसएसपी से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया कि गांधी मैदान ट्रैफिक थाने में किशोर को पूरी रात नजरबंद करके रखा गया। जब घरवालों ने मिलने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो थाना पुलिस ने उनसे दस हजार रुपये रिश्वत की मांग की। किशोर की मां आपबीती सुनाते-सुनाते एसएसपी के कार्यालय कक्ष में ही बेहोश हो गई थी। एसएसपी ने उनसे लिखित शिकायत देने को कहा है। उसके आधार पर घूस मांगने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बुरी तरह फंसे एडीएम स्पेशल

एडीएम स्पेशल विरेंद्र कुमार पासवान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने सरेराह किशोर की पिटाई की थी। उससे जूते चटवाए थे। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने इसकी गवाही दी है। वहीं दूसरी तरह ट्रैफिक थाने में किशोर की मां को धक्का दिया था। उनके साथ अभद्र भाषा में बात की थी। बड़ी बात है कि एडीएम ने टक्कर लगने से पैर की हड्डी टूटने की बात कही थी, जबकि प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद उन्होंने एटीएम से रुपये निकाले थे। पूरा मामला संज्ञान में आने के बाद एसएसपी ने खुद कांड की जांच करने का जिम्मा लिया।

अफसर पर दर्ज होगी प्राथमिकी

एसएसपी ने कहा कि एडीएम द्वारा लगाए गए आरोप गलत साबित हुए तो उनके खिलाफ आइपीसी की धारा 182 और 211 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

ड्यूटी से गायब थे एडीएम

मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने एसएसपी से जांच रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, 25 दिसंबर को प्रकाश पर्व को लेकर एडीएम स्पेशल विरेंद्र कुमार पासवान की ड्यूटी बाललीला गुरुद्वारा के पास लगी थी। हालांकि वह ड्यूटी से गायब थे। ड्यूटी की अवधि में वह कदमकुआं में घूम रहे थे। डीएम ने इसकी जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही एसएसपी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की बात कही है।

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