आप में ‘विश्वास’ नहीं, राज्यसभा के लिए नेता इंपोर्ट करने पर जोर

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नई दिल्ली,। ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ ऐसे ही कुछ विचारों के साथ कुछ साल पहले एक राजनीतिक दल का गठन हुआ था। देश में मौजूद तमाम राजनीतिक पार्टियों के बीच जब यह पार्टी आयी तो जनता की उम्मीदें भी सातवें आसमान पर थीं। हो भी क्यों नहीं! तमाम राजनीतिक दल जब-जब भी सत्ता में आए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और धीरे-धीरे वे जनता से दूर होते चले गए। लोकतंत्र में लोक पर तंत्र हावी होने लगा तो इन नई पार्टी ने सपना दिखाया कि लोक सर्वोपरि है और तंत्र उसकी मदद करने के लिए। जी हां, आप बिल्कुल सही समझे… यहां हम आम आदमी पार्टी की ही बात कर रहे हैं।

हाल ही में जब आम आदमी पार्टी के गठन के पांच साल पूरे हुए तो पार्टी के राष्ट्रीय संजोयक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘आज हम इस देश की वो उम्मीद बनकर उभरे हैं जिसे हमें और आगे लेकर जाना है।’ जी हां ये बात बिल्कुल सही है कि पार्टी बनने के साथ ही इस पार्टी से लोगों की उम्मीदें आसमान पर पहुंच गई थीं। पार्टी से जुड़ने वाले प्रत्येक कार्यकर्ता को खुले मंच से कहा गया कि आप यहां देश सेवा के लिए आ रहे हैं, इसलिए पद और टिकट का लालच न करें। ऐसा ही कुछ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को अपने ही एक पुराने वीडियो को रिट्वीट करके जताने की कोशिश की।

केजरीवाल ने ऐसा ट्वीट क्यों किया?

आम आदमी पार्टी पिछले तीन साल से दिल्ली की सत्ता में हैं। दिल्ली के कोटे से राज्यसभा की तीन सीटें जल्द ही खाली होने वाली हैं। दिल्ली की आम आदमी पार्टी को तय करना है कि वह किन तीन लोगों को राज्यसभा भेजना चाहती है। पार्टी के संस्थापक सदस्य और राजस्थान प्रभारी कवि कुमार विश्वास राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं। संभव है कि उन्होंने इसके लिए केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से बात भी की होगी। वैसे बता दें कि पिछले करीब एक साल से कुमार विश्वास और केजरीवाल के रिश्तों को लेकर तमाम तरह से कयास लगाए जाते रहे हैं। कुमार विश्वास पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे चुके हैं। अब जब वे राज्यसभा की एक टिकट पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं तो कयास लगाए जा रहे हैं कि हो न हो केजरीवाल ने उन्हीं को निशाना बनाकर यह रीट्वीट किया है। वीडियो में वे कहते हैं- जिन जिन पद और टिकट का लालच है वो आज पार्टी छोड़कर चले जाएं, वो गलत पार्टी में पार्टी में आ गए हैं। वैसे बता दें कि यह वीडियो दिल्ली में उनकी पार्टी द्वारा 49 दिन तक सरकार चलाने के बाद एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू का हिस्सा है।

राज्यसभा के लिए ये नाम चर्चा में

कांग्रेस के तीन नेता जनार्दन द्विवेदी, परवेज हाशमी और करण सिंह राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं। उनकी जगह दिल्ली विधानसभा तीन अन्य नेताओं को राज्यसभा भेज सकती है। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पास इतनी सीटें हैं कि वह तीनों सीटों पर अपने चहेतों को भेज सकती है। आप नेता संजय सिंह, पूर्व पत्रकार आशुतोष, मीरा सान्याल, इमरान प्रताप गढ़ी का नाम भी राज्यसभा सीट को लेकर चर्चा में है। कुमार विश्वास को लेकर तो पार्टी में ऊहापोह की स्थिति है ही। कई लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि मनीष सिसोदिया को दिल्ली की गद्दी सौंपकर केजरीवाल खुद राज्यसभा जा सकते हैं।

केजरीवाल की चाहत- मोदी विरोधी चेहरा

दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए केजरीवाल को मोदी विरोधी चेहरे की तलाश है। इसी के तहत उन्होंने बड़ी कोशिश की कि पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन उनकी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंच जाएं, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद केजरीवाल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बागी नेता अरुण शौरी को राज्यसभा भेजने का ऑफर दिया, लेकिन यहां भी केजरीवाल को सफलता हाथ नहीं लगी। यही नहीं उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर को भी राज्यसभा भेजने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने भी साफ इनकार कर दिया। रघुराम राजन और मौजूदा केंद्र सरकार की टसल किसी से छिपी नहीं है। वहीं अरुण शौरी भी खुले मंच से पीएम मोदी के खिलाफ बोलते सुनाई देते हैं। पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर की छवि भी उनके फैसलों व टिप्पणियों के कारण मोदी विरोधी मानी जाती रही है।

शीला दीक्षित को हराया, मोदी को दी चुनौती

केजरीवाल ने स्वयं पहली बार चुनाव लड़ा तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ ताल ठोंकी। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी शीला दीक्षित को हराने के बाद वे दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। इस दौरान भी उन्होंने सरकारी गाड़ी और बंगला न लेने की बात कही थी। ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ उस समय पार्टी का अघोषित ध्येय वाक्य था। 49 दिन सरकार चलाने के बाद ‘जन-लोकपाल’ को लेकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्होंने वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ा। हालांकि यहां उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद दिल्ली में हुए चुनाव में उन्होंने फिर से विधायक का चुनाव लड़ा और प्रचंड बहुमत मिलने पर फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए। यही नहीं पार्टी ने पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों में हुए चुनावों में भी अपने प्रत्याशी उतारे।

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