बिहार में बिछने लगी उपचुनाव की बिसात, दावेदारी को सर्दी में भी पसीना बहा रहे धुरंधर

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बिहार में उपचुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इसके लिए तमाम राजनीतिक पार्टियां कड़ी मशक्कत कर रही हैं।
पटना । लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में सत्तापक्ष के इकबाल की अग्निपरीक्षा तय है। तीनों सीटों में से दो पर राजद का कब्जा है और एक पर भाजपा का।
भभुआ विधानसभा सीट सत्ताधारी दल भाजपा के पास है, जबकि अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा सीट राजद के पास। तीनों सीटों के लिए आयोग ने अभी तिथि का एलान नहीं किया है, किंतु राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
तीनों सीटें राज्य और केंद्र की सत्ताधारी दल भाजपा और जदयू के साथ ही लोजपा, रालोसपा और हम के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई हैं, जबकि विपक्ष इन सीटों को हथिया कर सत्ता पक्ष का भ्रम तोडऩे के मूड में है।
राजद के साथ कांग्रेस भी अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने कवायद में जुट गई है। ऐसे में आने वाले समय में बिहार में जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा। सियासी दल इस चुनाव को मिशन-2019 का सेमीफाइनल भी मान रहे हैं।
लालू की सजा से भी पड़ेगा प्रभाव
चारा घोटाले में रांची के होटवार जेल में सजा के स्वरूप का इंतजार कर रहे लालू को अगर लंबे समय तक जेल में रहने की नौबत आती है, तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की साख भी उपचुनाव में दांव पर लगी होगी। लालू की सजा का निर्धारण तीन जनवरी को होना है। अररिया संसदीय सीट पर अरसे से राजद का कब्जा चला आ रहा है। विधानसभा की दो सीटों में एक-एक पर दोनों गठबंधन का कब्जा है।
2015 में महागठबंधन बनने के बाद जदयू ने राजद को जहानाबाद सीट सौंप दी थी, जहां से मुंद्रिका यादव की जीत हुई थी। भभुआ विधानसभा सीट पिछली तीन बार की भारी मशक्कत के बाद 2015 में भाजपा के कब्जे में आई थी। बसपा से भाजपा में आए आनंद भूषण पांडेय ने त्रिकोणीय मुकाबले में इस सीट पर जीत हासिल की थी।
सीमांचल में माई समीकरण को चुनौती
अब भाजपा-जदयू की संयुक्त ताकत के कारण सीमांचल में लालू प्रसाद के माई समीकरण के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन से खाली हुई अररिया संसदीय सीट पर कब्जे को लेकर दोनों गठबंधनों में आरपार की लड़ाई के आसार हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे राजद के लिए महत्वपूर्ण यह है कि सात बार विधायक और छह बार एमपी रह चुके तस्लीमुद्दीन के गैप को भरना आसान नहीं होगा। खासकर उस स्थिति में जबकि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से चार पर भाजपा गठबंधन का कब्जा हो चुका है।
भाजपा ने सजाई है फील्डिंग
इस बार तो राजद के आधार वाले क्षेत्रों में पकड़ बढ़ाने के लिए भाजपा ने पहले से ही फील्डिंग सजा दी है। नए परिसीमन के पहले भाजपा इस सीट पर तीन-तीन बार जीत दर्ज कर चुकी है।
उप चुनाव में सीटों के बंटावारे को लेकर उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी कहते है कि अभी कुछ तय नहीं है लेकिन इतना तय कि राजग उम्मीदवार चुनाव जरूर लड़ेगा। राजग के जब सीनियर लीडर एक साथ बैठेंगे तो सीटों का बंटवारा तय हो जाएगा।
संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक तस्लीमुद्दीन, मुद्रिका यादव और आनंद भूषण पांडेय की सीट पर छह महीने के भीतर चुनाव कराया जाना है।

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