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महागठबंधन टूटने के बाद बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मची है, उससे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही हलचल किसी भी वक्त बढ़ सकती है। बिहार कांग्रेस में अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।

पटना । राहुल गांधी की ताजपोशी और इसके बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद की जेल यात्रा के बाद बिहार की राजनीति में अनिश्चितता का जो दौर शुरू हुआ है, वह अब तक थमा नहीं है। राजद तीन जनवरी की प्रतीक्षा में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। दूसरी तरफ बिहार कांग्रेस के अंदर भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।

एनडीए से नाराज नेता जा सकते कांग्रेस के साथ

कांग्रेस के अंदर से दो तरह की जानकारियां छनकर आ रही हैं। ऐसी चर्चा है कि एनडीए में खुद को असहज स्थिति में देखते हुए लोकसभा चुनाव लडऩे वाले बिहार के कुछ बड़े नेता सीधे-सीधे कांग्रेस के संपर्क में हैं।इन नेताओं में कुछ वैसे हैं, जो फिलहाल निलंबन की मार सह रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो बिहार की शीर्ष सत्ता पर रहे और आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन नेताओं को खरमास समाप्त होने का इंतजार है।

खरमास बाद शुरू होगी संपर्क यात्रा

कांग्रेस ने एलान कर रखा है कि मकर संक्रांति के बाद पार्टी के कुछ बड़े नेता संपर्क यात्रा प्रारंभ करेंगे। इस दौरान पार्टी को छोड़कर गए नेताओं के साथ ही पार्टी में आने के इच्छुक नेताओं से संपर्क किया जाएगा और उन्हें सम्मान के साथ पार्टी में शामिल किया जाएगा। अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि एनडीए से नाराज चल रहे नेता संपर्क यात्रा के दौरान बिहार कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।

चार विधान पार्षद छोड़ सकते हैं कांग्रेस

कांग्रेस के कुछ पुराने और कद्दावर नेता भी पार्टी को अलविदा कहने की तैयारी में हैं। इन नेताओं ने पूर्व में भी पार्टी से अलग होने की तमाम कोशिशें की, परन्तु उनकी मंशा फलीभूत नहीं हो सकी। अब पार्टी की नीतियों से नाराज चल रहे इन नेताओं की बात बनती नजर आ रही है।

कांग्रेस के अंदरखाने के सूत्रों की मानें तो विधान परिषद के जितने सदस्यों की संख्या अलग होने के लिए चाहिए वो पूरी हो चुकी है। छह में चार विधान पार्षद पार्टी से अलग होने को तैयार बैठे हैं।

हालांकि विधायकों के मैजिक आंकड़े में अब भी एक- दो विधायक की कमी बताई जा रही है। विधायकों के जादुई आंकड़े को पाने के लिए कवायद तेजी से चल रही है नतीजे जल्द ही सामने होंगे।

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