नए साल में संतानों के लिए सियासी मुकाम तलाश रहे ये पॉलिटिकल पिता, जानिए

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चुनाव अभी दूर है, लकिन इसकी राजनीतिक तैयारियां आरंभ हैं। नए साल में बड़े नेता अपनी संतानों के लिए सियासी मुकाम भी तलाश रहे हैं। उनकी कोशिशों पर डालते हैं नजर।

पटना । आगामी चुनाव से पहले बिहार की राजनीति को तैयारियों का समय माना जा रहा है। इसके लिए तमाम बड़े नेता अपने बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों की लांचिंग में जुट गए हैं। लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान के पुत्रों की सफलता उन्हें प्रेरित कर रही है। जीतनराम मांझी, सांसद अरुण कुमार, विधायक सदानंद सिंह, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे एवं सीपी ठाकुर समेत कई नेता अपनी हैसियत को पुत्रों में ट्रांसफर करने की जुगत में हैं।
आम धारणा है कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर और प्रोफेसर का बेटा प्रोफेसर बनेगा। राजनीति में भी इसे सेट करने का प्रयास हो रहा है। बिहार में तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। अररिया के राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद उनके तीन पुत्रों में विरासत हथियाने की होड़ लगी है। राजद विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई जहानाबाद विधानसभा सीट के लिए उनके ही पुत्रों में प्रतिस्पद्र्धा है। जहानाबाद के सांसद एवं रालोसपा के बागी गुट के नेता अरुण कुमार अपने पुत्र को आगे बढ़ाना चाह रहे हैं। उनकी कोशिश है कि भाजपा से समझौते में यह सीट उनके पुत्र के लिए छोड़ दी जाए।
कांग्रेस नेता सदानंद सिंह अपनी परंपरागत सीट से अपने पुत्र को आगे करने की कोशिश में हैं। भाजपा नेता सीपी ठाकुर को किसी भी तरह अपने पुत्र को आगे बढ़ाना है। पिछली बार सीपी ने विवेक को ब्रह्मपुर से चुनाव लड़ाया था, पर सफल नहीं हो सके। केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अपने पुत्र के लिए नए सिरे से कोशिश में हैं। उनके पुत्र अर्जित शाश्वत भागलपुर से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन पिता की इच्छा कमजोर नहीं हुई है।
मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव की मंशा पर भी चुनाव हारकर उनके पुत्र ने पानी फेर दिया है। अब नए तरीके से फील्ड सजाया जा रहा है। हम प्रमुख जीतनराम मांझी भी अपने पराजित पुत्र संतोष कुमार के लिए कोई कसर बाकी नहीं रहने देना चाह रहे।
इन्हें मिली कामयाबी
लालू प्रसाद के दोनों पुत्रों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव की कामयाबी के बाद समाजवादी नेता रामानंद तिवारी की तीसरी पीढ़ी राजनीति की सीढिय़ां चढ़ रही है। शिवानंद तिवारी खुद राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनके पुत्र राहुल तिवारी राजद के विधायक। जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष बनकर पिता का नाम आगे बढ़ाया है। अनुग्रह नारायण सिंह के पुत्र सत्येंद्र नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री बनकर पिता के सपने को साकार किया। अब उनके पुत्र निखिल कुमार राजनीति के प्रमुख चेहरा हैं। ठाकुर प्रसाद के पुत्र रविशंकर प्रसाद अभी केंद्र में मंत्री और भाजपा के प्रमुख चेहरा हैं।
इनकी हो चुकी है इंट्री
पिछले विधानसभा चुनाव तक बिहार के कई राजनेताओं के पुत्र-पुत्रियों को सफल इंट्री मिल चुकी है। कुछ को इंतजार है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पुत्र चिराग को जब बॉलीवुड रास नहीं आया तो पिता ने सियासत में सफल लांचिंग कर दी है। जमुई से सांसद बनवाया और पार्टी के संसदीय दल का अध्यक्ष भी बना दिया। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्रा और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के पुत्र सम्राट चौधरी भी मंत्री रह चुके हैं। पूर्व मंत्री महावीर चौधरी के पुत्र अशोक चौधरी का महागठबंधन सरकार में महत्वपूर्ण स्थान था।

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