साल 2017 के आखिरी दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने नए साल के जश्न को थोड़ा फीका कर दिया, लेकिन इस हमले को हमारे साहसी सैनिकों के अदम्य साहस ने ज्यादा कामयाब होने नहीं दिया. हालांकि हमले में 5 सैनिक शहीद हो गए. वहीं दो आतंकियों को मार गिराया गया. हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद ने ली. 31 दिसंबर को जिस चार मंजिला इमारत में फिदायीन हमला किया गया उसे रविवार रात को ही उड़ा दिया गया था. हमले में मारे गए 2 फिदायीनों में एक की शिनाख्त होने पर सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए. फिदायीन हमले में मारा गया एक आतंकी पुलिस कांस्टेबल का बेटा निकला. IG की सुरक्षा से बाहर किया गया इस नए खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है. मारा गया फिदायीन पुलिस कांस्टेबल गुलाम मोहम्मद खांडे का बेटा है. कांस्टेबल खांडे को कुछ महीने पहले तक आईजी कश्मीर मुनीर खान की सुरक्षा में लगाया गया था. मुनीर को हाल ही में तरक्की मिली और एडीजी रैंक के अधिकारी बने थे. हालांकि कुछ समय बाद पुलिस कांस्टेबल खांडे के बेटे के आतंकी संगठन के साथ जुड़ने के सुराग मिलने पर उनको मुनीर की सुरक्षा टीम से हटा दिया गया था. किसी भी तरह विवाद से बचने के लिए खांडे को सुरक्षा से हटाया गया था. मुनीर ने आशंका जताई थी कि ऐसे सैकड़ों युवा आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं. पुलवामा हमले में मारे गए कांस्टेबल के फिदायीन बेटे का नाम फरदीन अहमद खांडे है. जैश का यह आतंकी महज 17 साल का है. तीन महीने पहले ही उसने आतंक की राह चुनी. इन तीन महीनों में ही उसका ब्रेन वॉश इस कदर कर दिया गया कि वह फिदाइन बन गया. फरदीन दसवीं में पढ़ाई करता था. फरदीन हिजबुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी के गांव त्राल का ही रहने वाला था. दूसरे फिदाइन की शिनाख्त मंजूर बाबा के रूप में हुई है. उसकी उम्र 22 थी. मंजूर दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का ही रहने वाला था. तीसरा आतंकी देर शाम तक इमारत में छिपा हुआ था. 14 साल बाद पहला ऐसा मौका कश्मीर में 2003 के बाद यह पहला मौका है जब कोई स्थानीय नागरिक आतंकी फिदायीन बना है. कश्मीर के युवाओं को आतंक के रास्ते से हटाने के लिए सेना ने बीते कई वर्षों से तमाम प्रोत्साहन योजनाएं चलाईं, लेकिन स्थानीय आतंकी के फिदायीन बनने के इस खुलासे ने सबकी नींद उड़ा दी है. जैश के फिदायीन आतंकी कड़ाके की ठंड के बीच रविवार देर रात कैंप में घुसे थे. आतंकियों ने पहले यहां ग्रेनेड से हमला किया और इसके बाद अंधाधुंध फायिरंग शुरू कर दी. सीआरपीएफ जवानों ने जवाबी कार्रवाई की तो आतंकी कैंप में बनी एक इमारत में घुस गए. जहां आतंकी छुपे हुए थे, वो वो चार मंजिला इमारत है. इस बिल्डिंग में सीआरपीएफ सेंटर का एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक है, जहां कंट्रोल रूम भी है. ये भी जानकारी मिली आई कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस कैंप पर फिदायीन हमले की स्पेसिफिक चेतावनी दी थी.

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भाजपा में शामिल होने के बाद इशरत जहां ने कहा कि मैं उनका समर्थन करूंगी, जो मेरा समर्थन करेगा।

नई दिल्ली । तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली इशरत जहां भाजपा में शामिल हो गई। इशरत जहां शनिवार को हावड़ा स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी में शामिल हुईं। भाजपा में शामिल होने के बाद इशरत जहां ने कहा कि मैं उनका समर्थन करूंगी, जो मेरा समर्थन करेगा।

सूत्रों ने बताया कि इशरत को भाजपा की हावड़ा इकाई ने शनिवार को सम्मानित किया और फिर पार्टी में उन्हें शामिल किया। इशरत तीन तलाक मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक हैं।

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के महासचिव सायंतन बसु ने बताया कि उन्हें सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होना बाकी है। बता दें कि तीन तलाक मामले में इशरत जहां पांच याचिकाकर्ताओं में से एक थीं।

जानिए- इशरत जहां के बारे में

पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 30 साल की इशरत ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पति ने दुबई से ही फोन पर तलाक दे दिया। अपनी याचिका में इशरत ने कोर्ट में कहा कि उसका निकाह 2001 में हुआ था और उसके चार बच्चे भी हैं जो उसके पति ने जबरन अपने पास रख लिए हैं।

याचिका में इशरत ने बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की थी। इशरत ने कहा था कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। याचिका में कहा गया था कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2017 को पांच जजों की संवैधानिक पीठ में से तीन जजों ने तलाक-ए बिद्दत यानी तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 लोकसभा में पेश किया और इसे बिना संशोधन के पास भी करवा लिया गया।

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