साल 2018 में चुनावी मोड में दिखेगा बिहार, ये होंगे नए साल के सियासी एजेंडे

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साल 2018 में बिहार सरकार चुनावी मोड में दिखेगी। सियासत के मोर्चे पर अब आगे एक साल तक जो भी होगा, वह सब चुनाव के आईने में ही होगा। नजर डालते हैं नए साल के सियासी एजेंडों पर।

पटना बस एक साल। उसके बाद चुनाव है। चुनावी वर्ष में विकास की ताल पर वादों-इरादों का इजहार होगा। सत्ता पक्ष की ओर से सुविधाओं-सहूलियतों की घोषणाएं होंगी तो विपक्ष की ओर से सियासी सवालों और कानूनी अड़चनों की व्याख्या। मतदाताओं में पैठ के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष भी तय है। आइए डालते हैं नए साल में बिहार के सियासी एजेंडों और आश्वासनों की परिणति पर।

बिहार में पिछले एक साल से भ्रष्टाचार बनाम विकास का घमासान होता रहा। सियासत के मोर्चे पर अब आगे एक वर्ष तक जो भी होगा, वह सब चुनाव के आईने में होगा। 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए अगले वर्ष के एजेंडे तैयार किए जाएंगे। सरकार की अलग और विपक्ष की अलग तैयारियां होंगी। सत्ता पक्ष की ओर से बिजली-पानी, शिक्षा-स्वास्थ्य एवं सड़क के क्षेत्र में कामयाबी की कहानियों की शिल्प-शैली का सृजन होगा। दूसरी तरफ से जाति-धर्म, घोटाले एवं पिछड़ेपन की कुंडलियां निकाली जाएंगी। अगड़े-पिछड़े, आरक्षण और घपले-घोटाले के बुलबुले उड़ाकर प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पडऩे की कोशिश होगी।
नया साल बहुत कुछ नया होगा
बिहार की राजनीति हर साल नई करवट लेने के लिए जानी जाती है। अगले साल भी सियासी दलों एवं नेताओं की किस्मत पर कई ग्र्रह-नक्षत्रों का गहरा असर होगा। शुरुआत राजद प्रमुख लालू प्रसाद के राजनीतिक भविष्य से होगी, जो फिलहाल सीबीआई की विशेष अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद अपनी सजा के स्वरूप का रांची के होटवार जेल में इंतजार कर रहे हैं। चारा घोटाले में लालू को तीन जनवरी को सजा सुनाई जानी है। इसके बाद बिहार की राजनीति की दो धाराओं में भीषण घमासान तय है।

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में जीत से उत्साहित सत्ता पक्ष के नेता जन-जन में विकास की गाथा लेकर पहुंचेंगे तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव न्याय रथ पर गली-गली घूमकर अपने समर्थकों को एकजुट करते नजर आएंगे। कांग्र्रेस की कोशिश भी अपने 27 विधायकों की हैसियत से उछाल मारकर पुराने गौरव की ओर बढऩे की होगी।

विकास की राह पर और तेज चलेंगे नीतीश
इन सबके बीच नीतीश कुमार अपनी छवि के मुताबिक अपनी राह पर बढ़ते नजर आएंगे। पिछले 13 वर्षों से उनका एजेंडा सरल-सहज है। सरकार का साथी चाहे कोई भी हो, आधारभूत संरचना, शिक्षा एवं कौशल विकास की गति रुकने वाली नहीं है।

नए वर्ष में भी राज्य सरकार का मुख्य फोकस बिजली, सड़क और पानी पर होगा। युवाओं को रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहेंगे। मेट्रो परियोजना एक कदम और आगे बढ़ चुकी होगी। स्मार्ट सिटी की सीढिय़ों पर बिहारशरीफ चढ़ रहा होगा।

सबके लिए बिजली
राज्य सरकार के एजेंडे में बिजली सबसे ऊपर है। उत्पादन, संचरण एवं वितरण का बड़ा नेटवर्क तैयार हो रहा है। बिजली आपूर्ति में पिछले 13 वर्षों में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रकाश के मुख्य स्रोत के रूप में बिहार में केवल 6.10 फीसद परिवारों तक ही बिजली की पहुंच थी। अब इसे बढ़ाकर सौ फीसद करना है।

राज्य सरकार निर्धारित समय सीमा से चार दिन पहले 27 दिसंबर तक बिहार के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने में कामयाब हो गई। अब सभी टोले एवं बसावटों तक अगले चार महीने में बिजली नेटवर्क तैयार कर लेना है। इसी तरह एक वर्ष के भीतर सभी घरों को रोशन कर देना है। एजेंडे के मुताबिक एक साल के भीतर हर घर में बिजली होगी।

सुधार की राह पर समाज
विकास के बाद बिहार की राजनीति का दूसरा बड़ा स्तंभ होगा समाज सुधार। शराबबंदी की सफलता के बाद से राज्य सरकार का जोर अन्य तरह की सामाजिक कुरीतियों को दूर करके महिला सशक्तिकरण पर है। इसकी पहल हो चुकी है। इसी साल गांधी जयंती के मौके पर दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ अभियान की राज्यव्यापी शुरुआत कर दी गई है।

नए साल में 21 जनवरी को मानव शृंखला के जरिए सामाजिक चेतना लाने का प्रयास होगा। शराबबंदी के बाद बिहार में अपराध का ग्र्राफ काफी तेजी से नीचे गिरा है। गरीबों एवं छोटे कारोबारियों के पैसे बच रहे हैं। उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। महिलाओं को सुकून मिल रहा है। राज्य सरकार के राजस्व में हजारों करोड़ की कमी जरूर हुई, किंतु शराबमुक्त समाज ने अपने बच्चों के भविष्य की हिफाजत की है।

पेयजल एवं स्वच्छता
दो साल पहले तक बिहार में केवल 10 फीसद घरों में पीने के पानी का स्रोत उपलब्ध था। केवल 0.7 फीसद लोगों के पास नलके के पानी की सुविधा थी। राज्य सरकार अगले तीन वर्षों में 179 लाख ग्रामीण परिवारों एवं 16 लाख शहरी परिवारों को पेयजल की पाइपलाइनों के साथ जोडऩे की योजना है।

स्वच्छता अभियान के तहत हर घर में शौचालय की सुविधा भी नीतीश के एजेंडे में प्रमुख है। तीन वर्षों के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों में 164 लाख शौचालय एवं शहरी इलाकों के लिए 7.5 लाख शौचालय यानि कुल 172 लाख शौचालय का निर्माण करने की दिशा में काम किया जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में लगभग 85 फीसद घरों में शौचालय नहीं था।

रफ्तार में सड़क
राज्य सरकार को सड़क की राजनीति रास आती रही है। नीतीश ने सबसे पहले सड़कों के जरिए ही अपनी छवि विकास पुरुष की बनाई। बिहार की भी पहचान बदली। पहले की सरकारों में सड़कों का बुरा हाल था। सरकार ने अपने एजेंडे में योजनागत व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों के लिए रखा है। नीतीश का हर गांव और टोलों को सड़कों से जोडऩे का इरादा है।

सभी स्टेट हाइवे को अगले तीन वर्षों के अंदर टू-लेन (इंटरलॉकिंग के साथ) में तब्दील कर दिया जाएगा। अभी राज्य में कुल 4,005 किलोमीटर लंबे स्टेट हाइवे है। इनमें से 2685 किमी सड़क को पहले ही चौड़ा किया जा चुका है। शेष 1,320 किमी को तीन वर्षों के भीतर टू-लेन बनाना है। इसपर कुल 65 सौ करोड़ रुपये की लागत आएगी।

चमकेगी शहरों की सूरत
शहरों की सूरत बदल गई तो सरकार का काम अपने आप दिखने लगेगा। इस लिहाज से सरकार की सक्रियता शहरी विकास की तमाम कसौटियों पर एक साथ दिखेगी। स्टेट हाइवे पर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। किनारे पर पेयजल एवं शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। शहरी क्षेत्रों की सड़कों पर सुरक्षा के लिहाज से स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जा रही है।

गंगा किनारे के 32 शहरों के घाटों का कायाकल्प का काम जारी है। घाटों का पक्कीकरण, संपर्क पथ, कम्युनिटी टॉयलेट, चेंजिंग रूम और पार्क समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नए घाटों का निर्माण, पुराने का जीर्णोद्धार, दो घाटों के बीच पाथवे, लाइट, हरियाली व वॉकिंग फुटपाथ की व्यवस्था की जाएगी।

रोडमैप में कृषि
किसानों पर भी राज्य सरकार की मेहरबानी नजर आएगी। तीसरे कृषि रोडमैप में किसानों की आमदनी को दुगुना करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए बिहार जैविक खेती और कृषि यांत्रिकरण की ओर बढ़ रहा है। खेती में नए तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रारंभ में सूबे के पांच जिलों का चयन जैविक खेती के लिए किया गया है।

सब्जियों की खेती के लिए 20 हजार किसानों को छह-छह हजार रुपये का इनपुट अनुदान दिया जा रहा है। यह सौ फीसद सहायता है। किसानों को लौटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खेती में इस्तेमाल आने वाले 69 तरह के यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था की गई है। बाढ़-सुखाड़ से निपटने की पूरी तैयारी है। खरीफ एवं रबी दोनों तरह की फसलों की सिंचाई के लिए डीजल अनुदान दिया जा रहा है, जो आगे भी जारी रहेगा।

स्पीड में मेट्रो प्रोजेक्ट
पटना में मेट्रो की महत्वाकांक्षी परियोजना गति पकड़ सकती है। नगर विकास एवं आवास विभाग पूरी गति में है। बिहार सरकार के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल सकती है। केंद्र ने नई पॉलिसी बना ली। अब बिहार को उसके हिसाब से औपचारिकता पूरी करनी है। राज्य सरकार पैसे के वैकल्पिक प्रबंध में लगी है।

अलग कंपनी बनाने की कवायद जारी है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की तर्ज पर पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (पीएमआरसी) नाम से कंपनी बनाई जानी है। इस पर केंद्र और राज्य सरकार का साझा स्वामित्व होगा। उम्मीद है कि नए साल में करीब 17 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की बुनियाद रख दी जाएगी।

ट्रैफिक जाम पर काम
सुव्यवस्थित शहर का मतलब जाम से मुक्ति भी होता है। राजधानी समेत सूबे के सभी बड़े शहरों को ट्रैफिक समस्या से निजात दिलाने की कवायद जारी रहेगी। इसके लिए सिटी मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) बनाकर काम किया जाएगा। पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, बिहारशरीफ, पूर्णिया, आरा, कटिहार, बेगूसराय एवं मुंगेर की ट्रैफिक सिस्टम को अगले तीन दशकों तक ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा।

आसपास के कस्बों से आने वाली संभावित भीड़ के हिसाब से ट्रैफिक प्लान किया जाएगा। सड़कें चौड़ी होंगी। बस स्टैंड, एयरपोर्ट एवं स्टेशनों तक आने-जाने को व्यवस्थित किया जाएगा। सार्वजनिक यातायात सुविधा विकसित किए जाएंगे।

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