सुशील मोदी का दावा: 2018 में लालटेन मुक्त होगा बिहार, भ्रष्टाचारियों को मिलेगी सबक

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बिहार के डिप्‍टी सीएम सुशील मोदी कहते हैं कि नया साल भ्रष्टाचारियों के लिए सबक होगा। 2018 में बिहार ‘लालटेन मुक्‍त’ हो जाएगा।

पटना । पारदर्शिता, विकास और सुशासन के सूत्र वाक्य के जरिए बिहार की सत्ता में बतौर उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी तीसरी बार भाजपा का नेतृत्व कर रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद राजनीतिक पंडितों ने सुशील मोदी और बिहार भाजपा के भविष्य को लेकर तमाम कयास लगाए, लेकिन शानदार रणनीति से सत्ता हासिल करके मोदी अपने शुभचिंतकों के साथ विरोधियों की नजर में भी फिर छा गए। पेश है सुशील मोदी से दैनिक जागरण की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश…

सवाल : सरकार के खजाने के आप मालिक हैं, बतौर वित्त मंत्री नए वर्ष में आपकी क्या प्राथमिकता होगी?
जवाब : बिहार के खजाने का मैं मालिक नहीं, बल्कि जनता के खजाने का चौकीदार हूं। या यूं कहें कि कस्टोडियन हूं। सरकार का नया वर्ष तो अप्रैल से शुरू होता है लेकिन आप पहली जनवरी से शुरू हो रहे नए वर्ष की बात कर रहे हैं। नए वर्ष में आम आदमी और किसान राजग सरकार की पहली प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश है कि किसानों की आमदनी दोगुनी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार की जनता को विकास के साथ पारदर्शी और सुशासन की सरकार देने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। सरकार ने सभी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए डीबीटी की सेवा सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया है। पारदर्शी शासन व्यवस्था के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में कालाबाजारी रोकने के लिए पॉश मशीन के जरिए खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसी तरह किसानों को अनुदानित दर पर खाद (उर्वरक) वितरण व्यवस्था में अब पॉश मशीन लगाने और आधार नंबर से जोडऩे का लक्ष्य तय किया गया है।

उम्मीद है कि जिस तरह नीम कोटेड यूरिया मार्केट में आने के बाद कालाबाजारी पर अंकुश लगा उसी तरह फर्जी अनुदान लेने वालों पर सरकार पॉश मशीन और आधार से जोड़कर नकेल सकेगी। यही नहीं, स्कूलों में पोशाक और साइकिल वितरण एवं विभिन्न तरह की पेंशन योजनाओं में भी आधार नंबर अनिवार्य किया जाएगा।

सवाल : सरकार ने 2018 के लिए कौन-कौन सी प्राथमिकताएं तय की हैं?
जवाब : सरकार की पहली प्राथमिकता विकास के दम पर 2018 में लालटेन मुक्त बिहार बनाना है। आम आदमी को जहां रात की रोशनी के लिए लालटेन पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा, वहीं किसानों को अब डीजल आधारित सिंचाई से मुक्ति मिलेगी। खेतों तक स्पेशल फीडर से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार ने इस मुहिम के लिए 6000 करोड़ रुपये दिए हैं। इस पहल से किसानों की सिंचाई लागत वर्तमान में जहां प्रति बीघा 1800 से 2000 रुपये है वह घटकर 150 से 200 रुपये पर आ जाएगी।

उम्मीद है कि इस पहल से किसानों की आमदनी दोगुनी करने का प्रधानमंत्री का सपना साकार होगा। बिहार के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। अब नए वर्ष में हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। पटना शहर में किरासन तेल की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसके पीछे पर्याप्त बिजली और एलपीजी की आपूर्ति है। केंद्र सरकार किरासन तेल के एवज में राज्य सरकार को नकद क्षतिपूर्ति राशि देगी।

सवाल : लाखों सरकारी कर्मियों खासकर शिक्षकों को प्रतिमाह वेतन भुगतान की सुविधा सरकार क्यों नहीं सुनिश्चित कर पा रही है।
जवाब : शिक्षकों और कुछ संविदा कर्मियों के वेतन भुगतान में यह समस्या है। सरकार ने तय किया है कि अब प्रतिमाह कॉलेज से लेकर स्कूली शिक्षकों के वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सवाल : राजनीतिक रूप से बिहार के लिए नया वर्ष कैसा रहेगा?
जवाब : नया वर्ष मैं समझता हूं कि राजनीति में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए नया वर्ष सबक होगा। चारा घोटाले से लेकर रेलवे ठेके के जरिए बेनामी संपत्ति बनाने वालों के लिए 2018 फैसले का महत्वपूर्ण वर्ष होगा। मैं उम्मीद करता हूं कि चारा घोटाले में चल रहे चार मामले में तीन में सुनवाई पूरी हो चुकी है। फैसला आने वाला है। ऐसे में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए ऐतिहासिक वर्ष के रूप में नया वर्ष जाना जाएगा।

सवाल : राजद का आरोप है कि लालू प्रसाद को भाजपा साजिश के तहत फंसा रही है?
जवाब : देखिए राजद, लालू प्रसाद और उनके परिवार का आरोप बेबुनियाद है। लालू पर जिस समय सीबीआइ ने मुकदमा दर्ज किया उस समय न तो केंद्र में और न राज्य में भाजपा की सरकार थी। यूपीए सरकार में लालू पर मुकदमा दर्ज हुआ। अदालत का एक फैसला भी यूपीए सरकार के दौरान आया। फिर भाजपा इसमें कहां से आ गई। चारा घोटाले में चार अन्य मामलों में फैसले आने वाले हैं। इसी तरह बेनामी संपत्ति से संबंधित मामले में जांच एजेंसियां कार्रवाई पूरी होने के साथ निर्णायक साबित होंगी। ऐसे में समझता हूं कि भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण वर्ष होगा।

लालू अब कोर्ट की सजा से डरकर भ्रष्टाचार को जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मैं समझता हूं कि बिहार की जनता ने लालू को भ्रष्टाचार के कारण ही 167 से 22 सीटों पर लाकर पटक दिया था।

सवाल : लेकिन वर्तमान में तो 80 सीट लालू प्रसाद की पार्टी राजद के पास है?
जवाब : राजद के पास 80 सीटें लालू की वजह से नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर मिली थी। बिहार की जनता को सुशासन चाहिए। लालू के भ्रष्टाचार को जनता बखूबी समझती है। हकीकत में लालू 22 सीट के हकदार भी नहीं हैं। वह जमाना चला गया जब लालू अपनी राजनीति के पराकाष्ठा पर थे तब जातीय कार्ड खेलकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की, लेकिन जनता ने उन्हें सबक दिया।

सवाल : उपचुनाव में भाजपा की क्या रणनीति होगी?
जवाब : अभी उपचुनाव घोषित नहीं हुआ है, लेकिन इतना तय कि राजग साथ मिलकर उपचुनाव लड़ेगा। समय आने पर सब साथ मिलकर निर्णय करेंगे।

सवाल : बिहार से पलायन रोकने और रोजगार सृजन को लेकर सरकार की क्या योजना है।
जवाब : सरकार को कई कंपनियों ने निवेश के लिए प्रस्ताव दिया है। तीन सीमेंट कंपनियां शीघ्र आने वाली हैं। आइटी क्षेत्र में बिहटा और राजगीर में काफी संभावनाएं हैं। 1.54 लाख करोड़ रुपये के कृषि रोडमैप से बिहार में रोजगार सृजन के क्षेत्र में काफी उम्मीद है।

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