जातीय हिंसा: पूरे महाराष्ट्र में तनाव, मुंबई में ट्रेनों पर असर

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भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर सोमवार को पुणे में हिंसा भड़क गई थी. इस घटना के बाद महाराष्ट्र के कई जिलों में तनाव फैलने की खबर है. एहतियात के तौर पर स्टेट रिज़र्व पुलिस (SRP) की चार टुकडियां तैनात की गई है.मुंबई के चेंबूर, मुलुंड, घाटकोपर, कुर्ला, गोवंडी इलाके में 400 से ज्यादा पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. कई इलाकों में ऑफिस, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. लोकल सेवा भी प्रभावित हुई है.बता दें कि भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर कल हिंसा भड़क गई थी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई. गुस्साई भीड़ ने कई गाड़ियों और बसों को आग के हवाले कर दिया था.इस मामले में सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे. हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी. कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई. इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा.”वहीं इस हिंसा के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. पवार ने कहा कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी. हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है. लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया.कुछ बाहरी लोगों ने वधु गांव के लोगों भड़काया और यहां हिंसा फैल गई. आज तक भीमा-कोरेगांव के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ. प्रशासन ने भी पर्याप्त तैयारियां नहीं की थी. उन्हें यह मालूम था कि 200वीं सालगिरह होने पर यहां हजारों लोग आयेंगे, लेकिन कोई तैयारी नहीं की गई. पवार ने शांति और सद्भाव रखने की अपील लोगों से की है.वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भीमा-कोरेगांव में हिंसा साजिश के तहत फैलाई गई. मुंबई कांग्रेस के डॉ. राजू वाघमारे ने कहा कि पहले से दलितों पर हमले करने की प्लानिंग थी. आरएसएस के कुछ लोग यहां हिंसा भड़काने के लिए लंबे समय से तैयार कर रहे थे.बता दें कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में हुई थी. यह लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था.महार सैनिकों को उनकी वीरता और साहस के लिए सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में भीमा कोरेगांव में स्मारक भी बनवाया, जिन पर महारों के नाम लिखे गए. इसके बाद से पिछले कई दशकों से भीमा कोरेगांव की इस लड़ाई का महाराष्ट्र के दलित जश्न मनाते आ रहे हैं

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