अगर पास हो गया नेशनल मेडिकल कमीशन बिल तो होंगे ये बड़े बदलाव

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नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध कर रहे डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। सरकारी और प्राइवेट दोनों ही डॉक्टर ने हड़ताल खत्म कर दी है। बिल को संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजे जाने के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ली और कहा कि कमेटी का फैसला आने तक हड़ताल स्थगित रहेगी। अगर ये विधेयक पारित होता है तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगी और उसकी जगह लेगा नेशनल मेडिकल कमीशन। तब देश में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल सेवाओं से संबंधित सभी नीतियां बनाने की कमान इस कमीशन के हाथ होगी।
आखिर क्या है बिल, क्यों डॉक्टर कर रहे हैं इसका विरोध :
इस बिल को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में रखा था। फिलहाल कुछ बदलावों के लिए इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी में भेज दिया गया है। नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के तहत चार स्वायत्त बोर्ड बनाने का प्रावधान है। इनका काम अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा को देखने के अलावा चिकित्सा संस्थानों की मान्यता और डॉक्टरों के पंजीकरण की व्यवस्था को देखना होगा। नेशनल मेडिकल कमीशन में सरकार द्वारा नामित चेयरमैन और सदस्य होंगे जबकि बोर्डों में सदस्य सर्च कमेटी के जरिये तलाश किए जाएंगे। यह कैबिनेट सचिव की निगरानी में बनाई जाएगी। पैनल में 12 पूर्व और पांच चयनित सदस्य होंगे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का कहना है कि उनसे इस बिल के बारे में कोई चर्चा नहीं की गई। डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह बिल पास हुआ तो मेडिकल के इतिहास में काला दिन होगा। इसकी वजह से इलाज महंगा होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इस बिल के लागू होने से निजी मेडिकल कॉलेजों पर सरकार का शिकंजा मज़बूत होगा।
बिल पास हुआ तो क्या होगा असर :
अगर नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पास होता है तो पहले प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसदी सीटों की फीस मैनेजमेंट तय करती थी, लेकिन अब नए बिल के मुताबिक मैनेजमेंट 60 फीसदी सीटों की फीसद तय कर पाएगा। इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रप्रोजल है। इसे करने के बाद वे मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे। इस कानून के आते ही पूरे भारत के मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी। इस परीक्षा का नाम NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) रखा गया है।इसके लिए ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को बस एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रेक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा। इसी परीक्षा के आधार पर पोस्टग्रेजुएशन के लिए दाखिला होगा। आईएमए के पूर्व प्रेसिडेंट केके अग्रवाल के मुताबिक, इस बिल में ऐसे प्रावधान हैं जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की अनुमति मिल जाएगी। जबकि, इसके लिए कम-से-कम एमबीबीएस क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इससे नीम-हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।

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