आज हो सकती है लालू को सजा, सवाल- राजद का उत्तराधिकारी कौन हो?

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चारा घोटाला मामले में लालू यादव को गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी। उसके बाद राजद की कमान किसके हाथ में हाेगी? यह एक यक्ष प्रश्न है- क्या यह उत्तराधिकारी राजद को संभाल सकेगा?
पटना । चारा घोटाला मामले में अब राजद सुप्रीमो लालू यादव की सजा की अवधि का फैसला गुरुवार को तय होना है। पहले यह फैसला बुधवार, तीन जनवरी को होने वाला था। एेसे में अगर सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट चारा घोटाला मामले में लालू यादव के लिए किसी बड़ी सजा का एलान करती है तो सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि राजद को लालू की तरह कौन संभालेगा?
जब-जब जेल गए लालू, मजबूत होकर लौटे हैं
लालू के व्यक्तित्व के बारे में जानने वाले लोग मानते हैं कि लालू काफी जीवट इंसान हैं और वे जब-जब भी जेल गये, तब उधर से मजबूत होकर लौटे हैं। लेकिन क्या इस बार भी लालू जेल से बाहर मजबूत होकर लौटेंगे? अगर इसके विपरीत लालू को सजा हो गई तो क्या राजद में फूट पड़ जाएगी या लालू की तरह राबड़ी, तेजस्वी या मीसा या कोई वरिष्ठ नेता पार्टी का संचालन करेंगे?
राजद की एकता ही है पार्टी की मजबूती
लालू यादव की पार्टी की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, उसमें सेंध लग गई तो फिर पार्टी बिखर जाएगी और अभी राजद कमान एक मजबूत हाथों में जानी चाहिए। संभावना एेसी जताई जा रही है कि अगर लालू को सात साल से ज्यादा की सजा हुई तो फिर राजद में विरोध के स्वर ना फूटें, क्योंकि तेजस्वी जैसे युवा नेता के हाथों में कमान और उनकी कार्यशैली वरिष्ठों को शायद ना पसंद आए।
विपक्ष के नेताओं के बयान- राजद विधायक हमारे संपर्क में
एक ओर जदयू और भाजपा नेता बार-बार आगाह कर रहे हैं कि राजद के कई नेता हमारे संपर्क में हैं और लालू को सजा मिलते ही राजद में फूट हो जाएगी। लेकिन राजद के वरिष्ठ नेताओं ने इन आशंकाओं को साफ नकारते हुए कहा है कि एेसे सपने देखने वाले लोगों का सपना कभी पूरा नहीं होगा।
कौन होगा राजद का अभिभावक?
गुरुवार को सीबीआई कोर्ट का फैसला लालू प्रसाद के खिलाफ जाने के बाद सवाल यह हो रहा है कि राजद का अगला अभिभावक कौन होगा? क्या तेजस्वी यादव, पार्टी के सीनियर लीडर्स का भरोसा जीत पाएंगे? सीबीआई कोर्ट के फैसले पर लालू परिवार और राजद के साथ-साथ विरोधी पार्टियां भी नजरे गड़ाए हुए हैं, एेसे में किसी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
लालू प्रसाद जब भी जेल गए हैं तो राबड़ी देवी के नेतृत्व को आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, रघुनाथ झा, जगदानंद सिंह ने स्वीकार किया है, लेकिन अब मामला अलग है। क्या ये वरिष्ठ नेता राबड़ी के बाद अब तेजस्वी को स्वीकार कर पाएंगे? क्या तेजस्वी अपने सीनियर्स के अभिभावक बन पाएंगे और अपने पिता की तरह सबको साथ लेकर चल पाएंगे?क्या सीनियर लीडर्स तेजस्वी का नेतृत्व स्वीकारेंगे?
लालू प्रसाद के बाद अब तेजस्वी यादव राजद को लीड कर रहे हैं तो क्या पहले की तरह ये सीनियर लीडर्स पार्टी के पीछे खड़े रहेंगे, क्योंकि तेजस्वी को अगला सीएम उम्मीदवार बनाए जाने और उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले से राजद के रघुवंश और सिद्दीकी जैसे सरीखे नेताओं की आपत्ति रही है और जदयू अभी से मान कर चल रही है कि लालू की सजा के बाद राजद बिना फेस की पार्टी हो जाएगी।
वहीं, राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का कहना है कि अगर फैसला लालू प्रसाद के खिलाफ भी फैसला आता है तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी। आज तेजस्वी के साथ न हर एक सीनियर लीडर बल्कि लालू प्रसाद का बेस वोट खड़ा है और राजद में कोई दिक्कत नही आएगी। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी खुद को पहले ही साबित कर चुके हैं।
पिछली बार राबड़ी देवी को सौंपी थी सत्ता
पिछली बार लालू जेल गए थे तो उन्होंने रातों रात फैसला कर राबड़ी को सत्ता सौंप दी थी और जेल से सरकार के कामकाज पर नजर रखते थे। उस वक्त सभी नेताओं ने राबड़ी का नेतृत्व मान लिया था और लालू के प्रति अपनी आस्था जताई थी। लेकिन अभी बदले माहौल में राजद के भीतर भी विरोध की सुगबुगाहट सुनने में आ रही है।
ये भी है कि राबड़ी देवी की तबियत भी अब खराब रहती है और वो भी पार्टी के कामकाज में उतनी सक्रिय नहीं रहने वालीं, तेजस्वी यादव अभी युवा हैं हालांकि उन्हें राजनीति की थोड़ी समझ भी आ गई है लेकिन क्या वे अपने पिता की तरह लोगों के बीच अपनी पहचान बना सकेंगे?
लालू एक अलग शख्सियत हैं, कोई उनके जैसा नहीं हो सकता
लालू की तरह होना शायद किसी और के लिए संभव नहीं है। लालू पार्टी के रीढ़ हैं। अपने भाषणों और चुटीले अंदाज के साथ ही वो जनता की नब्ज पहचानते हैं। लालू को बिहार की जनता जितना पसंद करती है उतनी शायद किसी और नेता को नहीं, लालू की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि सोशल मीडिया के भी काफी चर्चित शख्सियत हैं लालू, इतना तो तेजस्वी भी नहीं।
जैसी भीड़ लालू की पहले की रैलियों में होती थी वैसी भीड़ उनके बेटों के लिए नहीं जुटती। हालांकि लालू के बेटों को भी बिहार की जनता चाहती है लेकिन वो लालू की तरह जनता के बीच शायद ही जगह बना सकें। उनके लिए अपने पिता की तरह जमीन से जुड़कर जनता की भाषा को समझना आसान नहीं होगा। क्योंकि लालू अपने आप में एक व्यक्तित्व हैं, एक पहचान हैं।
लालू के किए की सजा बेटे-बेटियों को भी मिलेगी
लालू के किए की सजा सिर्फ उन्हें ही नहीं मिलेगी बल्कि उनके बाद आइडी, ईडी और सीबीआइ की तलवार अभी राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और मीसा शैलेष के साथ अन्य बेटियों पर भी लटक रही है। चारा घोटाला, मिट्टी घोटाला, रेलवे होटल टेंडर घोटाले के साथ ही लालू परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूटने वाला है।
एेसे में राजद को कौन संभालेगा
एेसे में राजद की कमान किसी दूसरे बड़े नेता के हाथ में भी जा सकती है, लेकिन वो कौन होगा…ये देखना अहम होगा। फिलहाल लालू की सजा के एलान पर आज सबकी नजरें टिकी रहेंगी, कि लालू को कितने साल की सजा होगी। लेकिन लालू का उत्तराधिकारी कोई भी हो, उसके सामने लालू की तरह सबको समेटकर रखने की चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं

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