बिहार का सबसे भ्रष्‍ट और घूसखोर महकमा है पुलिस विभाग, आंकड़े दे रहे गवाही

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पुलिस विभाग बिहार का सबसे भ्रष्‍ट और घूसखोर महकमा है। पुलिस विभाग के निरीक्षक से लेकर सिपाही स्तर के कर्मी भ्रष्‍ट हैं। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं।

पटना । इस साल निगरानी के सर्वाधिक निशाने पर बिहार पुलिस के थानास्तर के अधिकारी रहे। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने वर्ष 2017 में ट्रैपिंग के कुल 83 मामले दर्ज किए। जिसमें 90 भ्रष्ट लोकसेवकों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 25 प्रतिशत पुलिस महकमे के थे। गिरफ्तार 90 लोकसेवकों में 22 अकेले पुलिस विभाग के निरीक्षक से लेकर सिपाही स्तर के कर्मी हैं।

पकड़े गए सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज शिकायत लगभग एक ही तरह की है। सभी किसी न किसी मुकदमे में जांच अधिकारी की भूमिका में थे और केस डायरी को अद्यतन करने और मुकदमे में किसी एक पक्ष को मदद करने के नाम पर रिश्वत की वसूली करते निगरानी के हत्थे चढ़ गए।

वर्ष 2017 में घूसखोरी करते रंगे हाथों पकड़े जाने वालों में सबसे अधिक पुलिस अवर निरीक्षक (दरोगा) स्तर के पदाधिकारी रहे। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कुल 14 दरोगा को घूसखोरी करते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जबकि तीन थानाध्यक्ष (एसएचओ) भी रिश्वत लेते निगरानी के हत्थे चढ़े।

घूसखोरी करते पकड़े जाने वालों में पांच सहायक अवर पुलिस निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। जबकि निगरानी ब्यूरो ने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के एक कनीय अभियंता को भी ठेकेदार के बिल भुगतान के लिए रिश्वत लेते धर-दबोचा।

बता दें कि वर्ष 2016 में भी घूसखोरी में पकड़े गए लोकसेवकों में सबसे अधिक संख्या पुलिसकर्मियों की थी। वर्ष 2016 में रिश्वतखोरी करते पकड़े गए 127 लोकसेवकों में 33 पुलिसकर्मी शामिल थे।

बता दें कि पिछले साल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने ट्रैपिंग के कुल 83 मामले दर्ज किए थे। जिसमें कुल 90 लोकसेवकों को रिश्वतखोरी करते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इनमें पुलिस विभाग के 22, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 10, ग्रामीण कार्य विभाग के 11, ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य व स्वास्थ्य विभाग के क्रमश: पांच-पांच, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के चार, शिक्षा विभाग के छह, सामान्य प्रशासन, कृषि, भवन निर्माण, वन एवं पर्यावरण, सहकारिता, विधि, योजना एवं विकास के एक-एक लोकसेवक पिछले साल रिश्वतखोरी करते निगरानी द्वारा दबोचे गए हैं।

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