लालू पर टिकी बिहार की राजनीति

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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के अहम किरदार हैं। चारा घोटाला मामले में लालू की सजा के बाद पूरे बिहार की राजनीति अब लालू पर ही टिकी है।
पटना। चारा घोटाले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद को सुनाई जाने वाली सजा पर सबकी निगाहें टिकी हैं। लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजद समेत तमाम दलों की अगली रणनीति लालू की मौजूदगी और गैरमौजूदगी के हिसाब से ही बनेगी।
ऐसे में लालू पर सजा के ऐलान की तिथि के एक दिन आगे बढ़ जाने से लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। परिवार और पार्टी को उम्मीद है कि लालू को न्याय मिलेगा, जबकि विपक्ष के नेता मामले की गंभीरता की व्याख्या अपने हिसाब से कर रहे हैं और कोर्ट से अधिकतम सजा की संभावना जता रहे हैं।
चारा घोटाले में लालू को रांची स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने 23 दिसंबर को दोषी करार दिया था। सजा का एलान तीन जनवरी को होना था, लेकिन अब इसे चार जनवरी के लिए टाल दिया गया है।
ऐसे में सबकी बेकरारी अगले कुछ घंटे के लिए बढ़ गई है। कोयला घोटाले में फंसे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को ऊपरी अदालत से राहत मिलने के बाद लालू परिवार की उम्मीदें भी सकारात्मक दिखने लगी हैं।
पार्टी के नेता किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने न्याय प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा है कि भगवान के घर देर हो सकती है, किंतु अंधेर नहीं।
हालांकि पार्टी में आगे की तैयारियां भी पूर्ववत जारी है। आशंकाओं को भी खारिज नहीं किया जा रहा है। यह अहसास करके कि 20 वर्षों के बाद लालू के बिना राजद फिर दोराहे पर खड़ा हो सकता है, कम सजा के लिए सारे जतन किए जा रहे हैं। पार्टी को अटूट-एकजुट रखने की कवायद और आगे के कार्यक्रमों की तैयारी भी पूर्ववत जारी है।
राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि हमलोग जनता के बीच में जाने की तैयारी कर रहे हैं। छह जनवरी को पार्टी की बड़ी बैठक होने वाली है। इसमें आगे के कार्यक्रम तय किए जाएंगे।
अन्य दलों को भी इंतजार
लालू की सजा के स्वरूप पर बिहार के अन्य दलों की राजनीति का प्रभावित होना भी तय है। सबसे ज्यादा असर राजद की सहयोगी कांग्रेस पर पड़ेगा। गुजरात में 22 वर्षों से सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी टक्कर देने के बाद बिहार में भी कांग्र्रेस की इच्छाएं प्रबल हो रही हैं।
यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी अगले सप्ताह से पुराने कांग्र्रेसियों की घर वापसी का अभियान चलाने वाले हैं। कांग्र्रेस की यह पहल अदालती चक्कर में फंसे राजद को असहज कर सकती है। भाजपा एवं जदयू को भी नए तरीके से रणनीति तय करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

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