सत्ता मिली पर हार की टीस बरकरार, उपचुनाव के पहले पार्टी की नब्ज टटोलेंगे अमित शाह

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उपचुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बिहार में भाजपा के कमजोर पक्ष को मजबूत करने के लिए अगले पखवारे आ रहे हैं। संगठन में इस बाबत तैयारियां तेज हैं।

पटना [रमण शुक्ला]। बिहार में भाजपा को करारी हार के बाद भी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के कारण सत्ता तो मिल गई, लेकिन संगठन में हार की टीस बरकरार है। यही वजह है कि उपचुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बिहार में भाजपा के कमजोर पक्ष को मजबूत करने के लिए अगले पखवाड़े आ रहे हैं। संगठन में इस बावत तैयारियां तेज हैं।

पार्टी ने मंडल और शक्ति केंद्रों के प्रभारियों को 15 जनवरी से सभी बूथ कमेटियों का गठन सुनिश्चित करने और भाजयुमो को बूथों पर कमल क्लब बनाने का टास्क दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जनवरी के दूसरे पखवाड़े में पटना में आएंगे। ऐसे में पार्टी ने प्रदेश पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायक और विधान पार्षदों को सतर्क कर दिया है।

बूथ कमेटियों का गठन शीघ्र पूरा करें

दरअसल, 27 वर्षों बाद केंद्र से लेकर बिहार तक राजग की सरकार बनने के बाद भाजपा नेताओं की बेचैनी और बढ़ गई है। यही वजह है कि प्रदेश संगठन ने केंद्रीय योजनाओं को 2019 की तैयारी के लिहाज से भुनाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी 62 हजार बूथों पर संगठन की सीधी पकड़ बनाने के लिए 12400 शक्ति केंद्रों को साध्य बनाने का लक्ष्य तय किया है।

इसी उद्देश्य से पार्टी के संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ ने प्रदेश से लेकर जिलों के पदाधिकारियों, विधानसभा प्रभारियों, जिलाध्यक्षों से लेकर मंडल और पंचायत अध्यक्षों को टास्क थमा दिया है। शीर्ष नेतृत्व को अहसास है कि बिहार में भले ही गठबंधन में भाजपा की सरकार बन गई है, लेकिन इससे चुनौतियां खत्म नहीं हो गई हैं।

ऐसे में पार्टी के रणनीतिकारोंको अतिसक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में नागेंद्र नाथ ने दो टूक सरकार में शामिल पार्टी के मंत्रियों, पदाधिकारियों और नेताओं को सरकार की खुमारी एक तरफ रखते हुए भविष्य की चुनौतियों से अवगत करा दिया है।

उन्होंने कहा है कि पार्टी की चिंता उप चुनाव में उम्दा प्रदर्शन की है। इसी तरह लोकसभा चुनाव 2019 में 2014 की तुलना में और बेहतर प्रदर्शन के साथ जनता से संवाद व संपर्क को फोकस करने की है। इनमें केंद्र सरकार की उपलब्धियों के साथ लोकसभा चुनाव में जीत और आगे की चुनौतियों पर भी चर्चा हो। साथ ही कार्यकर्ताओं को समझाया जाएगा कि प्रदेश व केंद्र दोनों जगह सरकार होने का लाभ उठाते हुए किस तरह भविष्य के समीकरणों को दुरुस्त किया जा सकता है।

हारी सीटों पर जीत की तैयारी

रणनीतिकारों ने लोकसभा चुनाव में हारी सीटों पर अभी से ध्यान देने की रणनीति बनाई है। इन सीटों पर पार्टी के मंत्रियों को भेजा जाएगा और वहां की पूरी स्थिति समझकर 2019 का चुनाव जीतने की रणनीति बनाई जाएगी।

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