होम कंपनिया खबर एयरसेल-जीटीएल का होगा विलय!

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एयरसेल का रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ प्रस्तावित विलय टलने के बाद कर्जदाता अब जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एयरसेल के विलय की संभावना तलाश रहे हैं। ऐसा होने से विलय के बाद बनने वाली इकाई के पास कर्ज चुकाने के लिए आय का स्थायी स्रोत हो सकता है। कर्जदाता 31 मार्च तक विलय प्रक्रिया शुरू करने की संभावना तलाश रहे हैं। कर्जदाताओं ने एयरसेल के मलेशियाई प्रवर्तक मैक्सिस से भी कहा है कि भारतीय इकाई में कम से कम 4,000 करोड़ रुपये की ताजा इक्विटी लाएं। इससे मिलने वाली रकम को अधिग्रहण एवं कर्ज भुगतान में लगाया जाएगा। एयरसेल द्वारा समय पर कर्ज नहीं चुकाए जाने की वजह से कर्जदाताओं को भारी प्रावधान करना पड़ रहा है, वहीं जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन कार्यक्रम से बाहर निकलने के अंतिम चरण में है।
एक बैंकर के अनुसार प्रस्तावित विलय संकट में फंसी दूरसंचार कंपनी को बचाने का अंतिम प्रयास होगा क्योंकि भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के हाथों वह तेजी से अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा रही है। वर्ष 2016 में कंपनी का घाटा करीब दोगुना होकर 4,319 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो 2015 में 2,215 करोड़ रुपये था। इस दौरान एयरसेल का एबिटा 2016 में घटकर 598 करोड़ रुपये रह गया, जो 2015 में 1,429 करोड़ रुपये था। कर्जदाताओं ने कहा कि 2017 में कंपनी की वित्तीय स्थिति और भी बिगड़ गई और अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो उसके पास टाटा टेलीसर्विसेज और रिलायंस कम्युनिकेशंस की तरह वायरलेस सेवा से निकलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।
दिसंबर 2017 तक भारतीय कर्जदाताओं के पास जीटीएल इन्फ्रा की 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी थी जबकि इसकी प्रवर्तक जीटीएल लिमिटेड के पास केवल 14 फीसदी हिस्सेदारी थी। जीटीएल इन्फ्र्रा की बिक्री प्रक्रिया को ईवाई देख रही थी और उसे 20 प्रस्ताव मिले थे। लेकिन कर्जदाता एयरसेल और जीटीएल के विलय की संभावना तलाश रहे हैं, जो दोनों कंपनियों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। दिसंबर 2017 में जीटीएल इन्फ्रा ने घोषणा की थी कि उसके विदेशी मुद्रा के बॉन्ड को 10 रुपये प्रति शेयर की दर पर इक्विटी में बदला गया है। जीटीएल इन्फ्रा के शेयर का भाव गुरुवार को बाजार बंद होने पर 7 रुपये प्रति शेयर था।
आरकॉम और एयरसेल लिमिटेड ने सितंबर 2016 में आरकॉम के मोबाइल कारोबार को एयरसेल के साथ विलय करने के लिए करार किया था। लेकिन उच्चतम न्यायालय में मैक्सिस द्वारा एयरसेल के अधिग्रहण के 2005 के मामले की सुनवाई लंबित होने की वजह से दूरसंचार विभाग ने विलय को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। सौदा रद्द होने के बाद आरकॉम ने अपने स्पेक्ट्रम और टावर रिलायंस जियो को 24,000 करोड़ रुपये में बेचने का निर्णय किया। आरकॉम रियल एस्टेट संपत्ति भी बेच रही है। इससे मिलने वाली रकम से कंपनी बैंकों का कर्ज चुकाएगी।

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