लालू पर फैसले को ले राजद की सांसें अटकीं, कांग्रेस गुणा-भाग में जुटी

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चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू यादव की सजा के एलान पर राजद की पूरी नजर है तो वहीं कांग्रेस भी अपना गणित सुलझाने में लगी है। जोड़ घटाव गुणा भाग जारी है।
पटना । चारा घोटाले में लालू प्रसाद की सजा पर फैसले का पूरे देश को इंतजार है। बिहार की धुकधुकी कुछ ज्यादा ही तेज है। सीबीआइ अदालत में सजा के एलान के इंतजार में सबकी बेकरारी बढ़ गई है।
विरोधियों और समर्थकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई खुश है तो कोई खफा। कानून की धाराओं की व्याख्या अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं। राजद नेताओं की सांसें अटक गई हैं तो कांग्र्रेस गुणा-भाग में जुटी है। भाजपा-जदयू को भी परिणाम का इंतजार है।
पिछले तीन दशकों से लालू के इर्द-गिर्द घूम रही बिहार की राजनीति को चारा घोटाले ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। सत्ता पक्ष की राजनीति हो या विपक्ष की, लालू के साये से पूरी तरह उबर नहीं पाई। यही कारण है कि राजद प्रमुख की सजा की अवधि का सभी दलों को इंतजार है, क्योंकि उनकी आगे की रणनीतियां लालू को केंद्र में रखकर ही बनेंगी।
अदालत से राजद को बेहतरी की उम्मीद है। आशंकाएं भी कम नहीं। सकारात्मक-नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम पर पार्टी में काम शुरू कर दिया गया है। लालू को लंबे समय तक जेल की सजा होने पर डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाई जा रही है। कम सजा पर कोई प्लान नहीं। सबकुछ लालू के नेतृत्व में पूर्ववत जारी रहेगा।
तीन साल से कम सजा हुई तो जमानत तुरंत लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लालू की गैरमौजूदगी में पार्टी के वरिष्ठ नेता भावी कार्यक्रमों पर विमर्श करने वाले हैं।
विरोधी दल भी मुस्तैद हैं। मिशन-2019 की तैयारियों में जुटी भाजपा और जदयू के नेता सियासी नफा-नुकसान के आकलन में जुटे हैं। भाजपा की कोर टीम रविवार को बैठक करने वाली है।
जाहिर है लालू को जेल या बेल पर फोकस करके ही पार्टी अपनी रणनीति तय करेगी। अगले पखवाड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का बिहार दौरा होने वाला है। लालू के असर से वह भी अछूता नहीं रह सकते हैं।
अल्फाबेट के फेर में फंसे लालू
सरसों के धुएं से भूत भगाने का दावा करने वाले लालू प्रसाद की किस्मत तीन दिनों से अल्फाबेट के चक्कर में फंसी है। सजा का ऐलान अब सोमवार को ही होने की उम्मीद है। चारा घोटाले में 23 दिसंबर को दोषी करार दिए जाने के बाद तीन जनवरी को उन्हें सजा सुनाई जानी थी, किंतु तीन दिन बाद भी तय नहीं हो सका कि सजा की अवधि क्या होगी।
अल्फाबेट सिस्टम में कोर्ट में उनकी बारी सातवें नंबर पर थी। चारा घोटाले के कुल 16 दोषियों में से दो दिनों में सिर्फ 10 फीसद की फरियाद सुनी जा सकी है। सजा के बिंदु पर सुनवाई की गति और क्रम संख्या बता रही है कि लालू को दो-तीन दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।

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