सजा के फैसले के बाद भी लालू को नहीं मिलेगी राहत, जानिए

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पटना । चारा घोटाला के दो केस में फैसला आ गया है। दोनों मामलों में लालू प्रसाद दोषी करार दिए गए हैं और अब उन्हें सजा सुनाई जाएगी।वैसे जो भी सजा का एलान हो, लेकिन इस मामले में अभी लालू की मुश्किलें कम नहीं होंगी क्योंकि अभी चारा घोटाला मामले में चार मुकदमे और चल रहे। एक पटना में और तीन रांची में।
चारा घोटाले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआइ ने वर्ष 1996 से लेकर 1998 के बीच लालू प्रसाद के खिलाफ एक के बाद एक कर कुल छह मामले में दर्ज किए थे। ये सभी मामले घोटाले और साजिश से जुड़े हैं। वर्ष 2013 में लालू प्रसाद को आरसी-20(ए)/96 में मिली थी।
23 दिसंबर को सीबीआइ की रांची स्थित विशेष अदालत ने आरसी-64(ए)/96 में दोषी करार दिया है। जबकि रांची के सीबीआइ की विशेष अदालत में अभी भी लालू प्रसाद के खिलाफ तीन अन्य मामलों का ट्रायल जारी है।वर्ष 2000 में झारखंड के बिहार से अलग होने के बाद झारखंड के विभिन्न जिला कोषागारों से जुड़े कुल पांच मामले झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत को स्थानांतरित कर दिए गए थे।इनमें एक मामला अभी पटना स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में चल रहा है और उसका ट्रायल भी यहां जारी है। सीबीआइ की रांची स्थित विशेष अदालत ने लालू प्रसाद आरसी-68(ए)/96 में भी चार्जशीटेड हैं।यह मामला चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ रुपये की अवैध निकासी है। इसी तरह रांची की विशेष सीबीआइ अदालत में दुमका कोषागार साढ़े तीन करोड़ की अवैध निकासी का मामला (आरसी-38(ए)/96) का भी ट्रायल चल रहा है।दुमका कोषागार से साढ़े तीन करोड़ की अवैध निकासी मामले में लालू समेत कुल 48 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इसी तरह चारा घोटाले में कोषागार से सबसे अधिक रकम की निकासी के मामला (आरसी-27(ए)/96) का ट्रायल भी रांची में शुरू हो चुका है। यह मामला डोरंडा कोषागार से जुड़ा है। इसमें लालू प्रसाद समेत कुल दो सौ से भी अधिक लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।इससे पहले सीबीआइ द्वारा दर्ज आरसी-20(ए)/ 1996 में वर्ष 2013 में लालू को दोषी करार देते हुए उन्हें पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। शनिवार को अदालत ने लालू प्रसाद को देवघर कोषागार से 84 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले का दोषी करार दिया है।पटना स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में चल रहे चारा घोटाले का एकमात्र मामला आरसी-63(ए)/96 भागलपुर व बांका कोषागार से पशुओं के लिए दवा खरीद के नाम पर 47 लाख की अवैध निकासी का है। इस घोटाले को वर्ष 1994 से 1996 के बीच अंजाम दिया गया था।
इस मामले में भी लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व पशुपालन मंत्री विद्यासागर निषाद, चंद्रदेव प्रसाद वर्मा (अब मृत), जदयू के तत्कालीन सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व विधायक ध्रुव नारायण भगत, पूर्व सांसद डॉ. आरके राणा, पूर्व आइएएस अधिकारी बेक जुलियस, के अरुमुगम समेत कुल 33 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।

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