मुश्किल में कंपनी, शेयर में जान

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दिवालिया प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों के शेयरों में पिछले तीन महीने के दौरान जबरदस्त तेजी दिखी है। इसके साथ ही कयासों का बाजार भी गर्म हो गया है और सटोरियों को लगता है कि नए प्रबंधन के हाथों में जाने के बाद इन कंपनियों के अच्छे दिन लौट सकते हैं। समाधान योजना के लिए तैयार कंपनियों की दोनों सूचियों में करीब आधी कंपनियों के शेयर 40 से 100 प्रतिशत तक उछले हैं। दीगर बात है कि इन कंपनियों पर कर्ज का भारी बोझ है और ये भुगतान में विफल रही हैं।
लैंको इन्फ्राटेक ऐसी ही कंपनियों में शुमार है। कंपनी पर 443 अरब रुपये कर्ज है, लेकिन नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भेजे जाने के बाद पिछले तीन महीने में इसका शेयर 104.5 प्रतिशत उछल चुका है। रिलायंस सिक्योरिटीज के मुख्य कार्याधिकारी बी गोपीकुमार ने कहा, ‘कर्ज के बोझ से दबी कंपनियों के शेयरों के कारोबार में धनाढ्य निवेशक खासी रुचि दिखा रहे हैं। इन निवेशकों को लगता है कि इनमें ज्यादातर कंपनियों के लिए रास्ता निकल आएगा, जिसके बाद इनकी किस्मत पलटेगी। फिलहाल इनमें कई शेयरों का कारोबार बुक वैल्यू से नीचे हो रहा है।’ गोपीकुमार ने कहा कि लैंको और वीडियोकॉन जैसे समूह कई कारोबार में लगे हैं, जिनमें कुछ का प्रदर्शन अच्छा रहा होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने पर कुछ शेयर दमदार लग सकते हैं।टाटा स्टील, वेदांत, एडलवाइस ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी और रेनेसंस स्टील इंडिया ने इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए समाधान योजनाएं सौंपी हैं। हालांकि विश्लेषक इन शेयरों के प्रति आगाह भी कर रहे हैं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेस के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार कड़वा कहते हैं, ‘बाजार में तेजी का माहौल है। मुश्किलों में चल रही कंपनियां निवेशकों को लुभा रहे हैं, लेकिन यह जोखिम भरा है। इन शेयरों में अनुभवी निवेशकों को ही हाथ लगाना चाहिए वह भी सोच-विचार के बाद।’
कड़वा ने कहा कि हरेक कंपनी की अपनी मुश्किलें होती हैं, इसलिए यह देखना होगा कि समस्या समाधान के बाद अल्पांश शेयरधारकों के लिए कुछ बचता भी है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘जब बैड़े पैमाने पर नुकसान उठाते हैं तो यह कहना मुश्किल होता है कि मौजूदा शेयरधारकों के लिए कुछ बचेगा या नहीं।’ कुछ बोलीदाता तो इन कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों से हटाने के पक्ष में हैं। इन कहना है कि एनसीएलटी में भेजे जाने से निवेशकों के सामने कंपनी की नकारात्मक छवि बन जाती है।ऐसा भी नहीं है कि एनसीएलटी भेजी गईं कंपनियों के शेयर ही चमके हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस के शेयर में पिछले एक महीने के दौरान 216 प्रतिशत तक तेजी आई है। कंपनी ने अपनी दूरसंचार परिसंपत्तियां (दूरसंचार टावर, स्पेक्ट्रम आदि) मुकेश अंबानी नियंत्रित रिलायंस जियो को बेच दी हैं। आरबीआई ने जून में जारी अपनी पहली सूची में 12 कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया के लिए एनसीएलटी भेज दिया।
केंद्रीय बैंक ने पिछले साल अगस्त में दूसरी सूची जारी की, जिसमें इसने 28 कंपनियों के नाम शामिल किए हैं। पहली सूची में 12 कंपनियों में भूषण स्टील, लैंको इन्फ्राटेक, एस्सार स्टील, भूषण पावर ऐंड स्टील, आलोक इंडस्ट्रीज, एमके ऑटो, मोनेट इस्पात, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, इरा इन्फ्रा, जेपी इन्फ्राटेक, एबीजी शिपयार्ड और ज्योति इंडस्ट्रीज शुमार हैं। आरबीआई की दूसरी सूची में शामिल कंपनियों के ऋणों का पुनर्गठन बैंंक 13 दिसंबर 2017 की समय सीमा में नहीं कर पाए। इसे देखते हुए एनसीएलटी जल्द ही दिवालिया प्रक्रिया शुरू करेगी।

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