अमेरिका के गुरुद्वारों में भारतीय अधिकारियों की एंट्री बैन

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नई दिल्ली/वॉशिंगटन
कनाडा के 14 गुरुद्वारों की तरफ से भारतीय अधिकारियों के गुरुद्वारों में दाखिल होने पर लगाई गई पाबंदी के बाद अमेरिका की गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटियों ने बड़ा फैसला लिया है। सिख गुरुद्वारों की सबसे बड़ी संस्थाओं- ‘सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ ईस्ट कोस्ट’ और ‘अमेरिकन गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी’ ने भारतीय अधिकारियों और राजनयिकों के अमरीका के 96 गुरुद्वारों में दाखिल होने, नगर कीर्तन समेत किसी भी सामाजिक या धार्मिक प्रोग्राम का हिस्सा बनने पर रोक लगाने का फैसला किया है। अमेरिका में करीब 116 गुरुद्वारे हैं। इस फैसला का सीधा समर्थन न करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने कहा, ‘आज राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बात पर मंथन करने की जरूरत है कि आखिर बाहर बसे सिखों में केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ इतना गुस्सा क्यों है? सरकारें प्रवासी सिखों को खालिस्तान समर्थक बता कर कब तक उनके जायज हक देने से किनारा करती रहेंगी। प्रवासी सिखों द्वारा रोक लगाने के पीछे दी गई ज्यादातर दलीलों को हम खारिज नहीं कर सकते। जिसमें 1984 सिख कत्लेआम का इंसाफ, पंजाब के पानी का बंटवारा, फर्जी पुलिस मुकदमे, सिखों को आतंकवादी बताकर जेलों में डालना और सजा पूरी होने के बावजूद सिख कैदियों की रिहाई ना करना कई ऐसे मसले हैं। इनके हल के प्रति सरकारों का रवैया सिर्फ टालने वाला लगता है।’ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के जनरल सेक्रेटरी मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि अगर वहां कमिटी ने दखलअंदाजी से मना किया है तो यह सही है। वहीं अगर एंट्री पर पाबंदी लगाई है तो यह गलत है और कमिटी को अपने फैसले पर दोबारा से विचार करना चाहिए।
ऐसा नहीं है कि सिख समुदाय पहली बार नाराज हुआ है, ऐसा पहले भी होता रहा है। लेकिन पहले विदेशों में कार्यरत अधिकारी अपने स्तर पर सिख समुदाय के लोगों से मिलकर उनकी नाराजगी दूर करते थे इसलिए ऑपरेशन ब्लू स्टार और ’84 के दंगों के बाद भी रिश्ते इतने खराब नहीं हुए लेकिन पिछले कुछ समय से विदेशों में कार्यरत अधिकारियों का फोकस पंजाबी एनआरआई नहीं रहे।
वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी ऐसी पाबंदी लगाए जाने की गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटियों ने तैयारी कर ली है। मेलबर्न में तो कुछ दिन पहले गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों के साथ विवाद भी हुआ था। वहीं इंग्लैंड (यूके) के भी कुछ गुरुद्वारे एंट्री पर बैन लगाने वाले हैं। विदेशों में ऐसे हालात पहली बार बने हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए सीधे तौर पर विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है।
सिख संगठन यह भी आरोप लगा रहे हैं कि विदेश स्थित भारतीय दूतावासों के अधिकारी सिखों के साथ सही व्यवहार नहीं करते। कनाडा में तो वाणिज्य दूतावास दफ्तर पर ये आरोप लग रहे हैं कि इस दफ्तर के अधिकारियों का सिखों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं है, वे वीजा देने में आनाकानी करते हैं।

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