युवा दिवस: निराशा में दिखी आशा की किरण,बन गए देश के बेस्ट सेलिंग ऑथर

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जिंदगी निराश करती है लेकिन उस निराशा में आशा की एक किरण छुपी होती है। कभी जिंदगी खत्म करने की कोशिश करने वाले अनुज तिवारी इस नई उम्मीद की मिसाल हैं और जो आज देश के बेस्टसेलिंग ऑथर में शुमार है। यही नहीं, अप्रैल में इस युवा लेखक को दुबई के यंग ऑथर अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया है। इसके साथ ही अनुज देश के पहले युवा लेखक बन गए हैं जिसे इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है। लाइव हिन्दुस्तान से अनिरुद्ध की खास बातचीत।
यूपी के बरेली जैसे छोटे शहर के अनुज तिवारी ने युवा लेखक के तौर पर अपनी अलग ही पहचान बनाई है। संस्कृत मीडियम से पढ़ाई करने वाले अनुज ने 4 किताबें अंग्रेजी में लिखी है। अनुज उन युवा लेखकों में शामिल हैं जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में मॉर्डन साहित्य की दुनिया में नाम कमाया है। अनुज को न्यूजपेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएआई) की ओर से बेस्ट अपकमिंग नोवलिस्ट के सम्मान से नवाजा गया है। अनुज ने दुकान या पब्लिशर्स के पास नहीं बल्कि सड़कों पर अपनी किताबों को बेचना शुरू किया और एक महीने में 3000 से ज्यादा कॉपीज बेच डाली। साल 2012 में अनुज ने अपनी पहली किताब जर्नी ऑफ टू हर्ट्स लिखी और वो बेस्टसेलिंग बुक बन गई। अब तक अनुज की चारों किताबों की 2.5 लाख कॉपियां बिक चुकी है और वो बेस्ट सेलर ऑथर हैं।
अनुज की किताबें जीवन की सच्ची कहानियों से प्रेरित है। अनुज एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उन्होंने कभी अंग्रेजी नहीं पढ़ी लेकिन बचपन से ही अंग्रेजी में किताब लिखने का सपना संजोया और आज वे चार किताबें अंग्रेजी में लिख चुके हैं। वे देश के 10 बेस्ट सेलिंग ऑथर की सूची में शुमार हैं।

यंग ऑथर अवॉर्ड्स में जाने वाले पहली भारतीय युवा लेखक

एक वक्त था जब अनुज 6 महीने तक डिप्रेशन में रहे और जिंदगी से इतना निराश हो गए कि जिंदगी खत्म करने की सोच डाली, लेकिन फिर एक रोशनी दिखी और अनुज ने जीवन का रुख ही बदल दिया। आज अनुज यूपी में ही नहीं बल्कि देश के युवा लेखकों में बेस्ट ऑथर हैं। यूपी के कई शहरों में अनुज बच्चों के लिए फ्री वर्कशॉप चलाते हैं, एनजीओ में काम करते हैं।

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