रोगियों की इस ‘माताजी’ ने हार्वर्ड से की पढ़ाई, अविवाहित रहने का लिया संकल्प

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आराम की जिंदगी छोड़कर मानव सेवा को अपना धर्म समझने वाली कविता भट्टराई ने आजीवन अविवाहित रहकर अपना पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों को समर्पित कर दिया है। उन्हें लोग माताजी कहकर बुलाते हैं।
पूर्वी चंपारण । नेपाल के प्रतिष्ठित परिवार की कविता भट्टाराई मानवता की मिसाल हैं। इनकी जिंदगी समाजसेवा को समर्पित है। इसमें परिवार की जिम्मेदारी बाधा नहीं आए, इसलिए आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प ले लिया। नेपाल सीमा से सटे रक्सौल के सुंदरपुर में बुलंद बस्ती की स्थापना की।
यहां शिक्षा और रोजगार के साथ कुष्ठ रोगियों के इलाज का इंतजाम है। उनके त्याग की वजह से सीमावर्ती इलाके के लोग इन्हें आदर से ‘माताजी’ कहते हैं। कुष्ठ रोगियों के लिए वे देवी से कम नहीं।
नेपाल के विराटनगर निवासी टेक दत्त भट्टाराई की 54 वर्षीय बेटी कविता की रुचि बचपन से ही समाजसेवा में थी। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमएससी कविता 1990 में
नेपाल के प्रधानमंत्री कृष्ण प्रसाद भट्टाराई की सचिव केतौर काम कर चुकी हैं।
बाद में आराम की जिंदगी छोड़ समाजसेवा की राह पकड़ ली। कनाडा की स्वयंसेवी संस्था मेजर फाउंडेशन से जुड़ीं और 17 साल तक नेपाल में गरीब महिलाओं को सबला बनाने में लगी रहीं। इसी क्रम में सीमावर्ती इलाके में कुष्ठ रोगियों की पीड़ा देख द्रवित हुईं।
इसके बाद रक्सौल के सुंदरपुर स्थित लिटिल फ्लावर लेप्रोसी वेलफेयर सोसाइटी के तहत संचालित कुष्ठ आश्रम, स्कूल, अस्पताल और गोशाला के साथ ही कुष्ठ रोगियों और उनके बच्चों के पुनर्वास को अपना जीवन समर्पित कर दिया। पश्चिमी व पूर्वी चंपारण के अलावा सीतामढ़ी में भी पनुर्वास केंद्र बनाए गए हैं।
शिक्षा से लेकर रोजगार तक का इंतजाम
सुंदरपुर स्थित कुष्ठ आश्रम में रोगियों के समुचित इलाज के लिए 140 बेड का अस्पताल है। यहां उनके बच्चों को रोग से बचाने, शिक्षित बनाने और रोजगार देने तक का भी इंतजाम है। यहां बेघर रोगियों के बच्चों के पढऩे के लिए सीबीएसई से संबद्ध पहली से आठवीं तक का स्कूल है। आगे की पढ़ाई का खर्च संस्था वहन करती है। बच्चों को बाहर पढऩे के लिए भेजती है।
कविता बताती हैं कि कुष्ठ रोगियों के बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पदों पर जाने का हक है। उस दिशा में काम चल रहा है। कहती हैं, जिंदगी में जो मिला, उसे अपनाया। सेवा करना ही लक्ष्य है।
कहा-सांसद ने
कविता भट्टाराई एक ऐसा नाम हैं जो सेवा के लिए जानी जाती हैं। सुंदरपुर कुष्ठ आश्रम में जाने के साथ सेवा की भावना साफ नजर आती है।
-डॉ. संजय जायसवाल, सांसद, पश्चिमी चंपारण

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