लालू के बिना राज्यसभा चुनाव में राजद का पहला इम्तिहान

0
173

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे राजद सुप्रीमो लालू के बिना ही इस बार पार्टी राज्यसभा चुनाव में उतरेगी। बिहार में राज्यसभा की सात सीटों पर फरवरी में चुनाव संभावित है।
पटना । चारा घोटाले में लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद राजद का पहला इम्तिहान राज्यसभा चुनाव में होगा। बिहार में राज्यसभा की सात सीटों पर फरवरी में चुनाव संभावित है। लालू की गैर-मौजूदगी में प्रतिपक्ष के विधायकों पर सत्तारूढ़ दल की नजर रहेगी, क्योंकि खाली होने वाली सारी सीटें जदयू-भाजपा गठबंधन की हैं।
सत्तारूढ़ दलों की कोशिश राजद-कांग्र्रेस के असंतुष्ट विधायकों पर डोरे डालकर ज्यादा से ज्यादा सीटें हथियाने की होगी, जबकि विपक्ष की ऊर्जा अपने खेमे को अटूट रखकर धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराने में लगेगी। जाहिर है, एक-एक वोट के लिए मारामारी तय है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी की जोड़ी की कोशिश होगी कि रिक्त हो रही सीटों पर उनके अधिकतर नेताओं की वापसी हो जाए। ऐसे में लालू की जमानत के लिए प्रयासरत तेजस्वी यादव की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है। लालू को बेल मिलने में अगर विलंब हुआ तो राजद के विधायक अंतरात्मा की आवाज और सत्ता पक्ष के वाणी-व्यवहार के आगे अनियंत्रित हो सकते हैं।
राज्यसभा चुनाव में विधायकों पर उनकी पार्टी का व्हिप लागू नहीं होता। मतदान भी गुप्त होता है। ऐसे में कम उम्र तेजस्वी और तेज प्रताप की कोशिशें नाकाम हो सकती हैं। खासकर उस स्थिति में जब मुंद्रिका यादव के निधन के बाद राजद विधायकों की संख्या कम हो गई है। राजद के अभी 79 और कांग्र्रेस के 27 विधायक हैं।
तीन सीटों पर जीत के लिए विपक्ष को कम से कम 105 वोट चाहिए। अभी हैं सिर्फ 106 वोट। जरूरत से एक ज्यादा। ऐसे में सत्ता पक्ष की नीयत डोल सकती है। अदालती झंझटों में फंसे राजद के दो विधायकों ने भी अगर पाला बदल लिया या वोट के समय अनुपस्थित हो गए तो महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
खाली हो रही सभी सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन की
दो अप्रैल को खाली होने वाली बिहार से राज्यसभा की सात सीटों में से राजद-कांग्र्रेस गठबंधन के पास एक भी नहीं है। सभी सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन की हैं। पांच सीटों पर जदयू एवं दो पर भाजपा का कब्जा है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 35 वोट की जरूरत पड़ेगी। संख्या बल के हिसाब से सत्ता पक्ष एवं विपक्ष को तीन-तीन सीटें आसानी से मिल जाएंगी।
शरद यादव की सदस्यता जाने से खाली हो रही एक सीट के लिए अलग बैलेट पेपर होने के कारण उसे सत्ता पक्ष की झोली में जाना तय है। ऐसे में मुख्य मुकाबला नियमित चुनाव वाली खाली हो रही छह सीटों के लिए होगा।
भाजपा-जदयू को चार सीटें तय
शरद यादव की सीट पर अलग चुनाव प्रक्रिया के चलते इसे सत्तारूढ़ दल की झोली में आना तय है। नियमित चुनाव वाली छह में से दो सीटें निकालने में जदयू को किसी की मदद की दरकार नहीं होगी। भाजपा को दूसरी सीट के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
आनंद भूषण पांडेय के निधन के बाद भाजपा विधायकों की संख्या 52 रह गई है। इस हिसाब से राजग के पास कुल वोट 128 हैं।
तीन सीटों पर जीत के समीकरण से 23 ज्यादा। निर्दलीय एवं राजद-कांग्र्रेस के असंतुष्ट विधायकों के सहारे राजग अपने विरोधियों का हिसाब गड़बड़ करने की कोशिश कर सकता है। ऐसा हुआ तो राजग के हिस्से में चौथी सीट भी पक्की हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here