लालू जी को बेटे से ज्याादा प्यारी हैं उनकी बेटियां, तेजस्वी ने शेयर कीं पर्सनल बातें

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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने पिता को ही अपना हीरो बताया और कहा कि उनसे ही मुश्किलों से लड़ना सीखा। पेश है तेजस्वी से खास बातचीत..
पटना । चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आजकल रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा जेल में सजा काट रहे हैं। इधर, पटना में राजद अपने संगठन को मजबूत कर अगली रैली की तैयारी में जुटा है। इसका नेतृत्व कर रहे हैं लालू के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव।
राजनीति के साथ ही तेजस्वी ने अपने पिता और परिवार की बातों के साथ ही अपनी निजी जिंदगी की बातें भी दैनिक जागरण की संवाददाता काजल से शेयर कीं। इस खास बातचीत में तेजस्वी ने बताया कि अभी हम मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं लेकिन मेरे पापा मेरे हीरो हैं और उनसे ही मैंने मुश्किलों से लडऩा सीखा है…..
प्रश्न- इतनी छोटी उम्र और इतनी बड़ी जिम्मेदारियां, क्या घबराहट नहीं होती?
उत्तर-नहीं, मैंने बचपन से राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखा है। अपनी मां को, अपने पिता को संघर्ष करते देखा है। जिन लोगों की गोद में खेला उन्हें मिलते-बिछड़ते, बदलते देखा है। इसीलिए ये सब मेरी जिंदगी का हिस्सा हो गया है। लोग किस तरह धोखा देते हैं और रिश्ते बदल लेते हैं, इसे करीब से देखा है। इसी उम्र में मैंने ये सब देखा और जान लिया है। मुझे तो ये सब विरासत में मिला है।
प्रश्न-आज के हालात के लिए तेजस्वी को ये नहीं लगता कि उन्हें अपने पिता के किए की सजा मिल रही।
उत्तर-नहीं, कतई नहीं। मेरे पिता ने कोई गलती नहीं की। उनपर झूठे आरोप लगाकर उन्हें फंसाया गया। हालिया राज्य सरकार और केंद्र की एनडीए सरकार को एक लालू का ही डर हमेशा सताता रहा है। एक ने तो लालू का हाथ थामा फिर आरोप लगाकर पाला बदल लिया, क्योंकि उन्हें डर था कि तेजस्वी ना आगे बढ़ जाए। लालू विपक्षी एकता को एकजुट करने का प्रयास किए जहां सफलता नहीं मिली वहां साजिश रची गई। लालू को कमजोर करने की तमाम कोशिशें पहले भी की गईं और आज भी जारी है। लेकिन वो कमजोर होने वाले नहीं हैं। एक ही मामले में बार-बार सजा।
शौचालय घोटाला, सृजन घोटाला, कितने घोटाले हैं लेकिन उसमें कुछ नहीं होगा क्योंकि उनके पास सत्ता है और तमाम जांच एजेंसियां वहीं करेंगी जो सत्तापक्ष चाहेगा। चुनाव से पहले लालू को जेल भेजना मंशा थी, बस और कुछ नहीं ठीक है न्यायालय का आदेश है और मेरे पिता ने काफी कुछ झेला है और मैं भी तैयार हूं।
प्रश्न-महागठबंधन बनने और टूटने की कई बातें सामने आईं, सच्चाई क्या थी?
उत्तर-महागठबंधन की जो परिकल्पना थी वो भाजपा को बिहार से दूर करने की थी। लोकसभा चुनाव में जनता ने बीजेपी को जदयू को अपना फैसला सुना दिया था, जिससे इन लोगों के पैरों तले की मिट्टी खिसकी हुई थी। उससे सबक सीखकर नीतीश कुमार जी मेरे पिता जी से मिले थे और महागठबंधन बनाने की बात कही थी और उसी वक्त तय हो गया था कि साथ मिलकर जनता के फैसले का स्वागत करेंगे।
विधानसभा चुनाव में जनता ने फैसला सुनाया और बीजेपी को नकार दिया। महागठबंधन की सरकार बनी और उसी वक्त तय हो गया था कि मजबूती से सरकार चलाएंगे। लेकिन, लालू जी के विश्वास को तोड़कर नीतीश कुमार जी ने बीजेपी का हाथ थाम लिया और धोखे से बिहार की जनता का भरोसा तोड़कर बिहार में एनडीए की सरकार बनी ये सभी जानते हैं कि किस तरह बनी।
जनता ने जिसे अपना बहुमत दिया वो पार्टी बाहर और जिसे नकारा वो सत्ता में। ये कैसी राजनीति है? पलटी मारने वालों पर मेरे पिता ने भरोसा किया, छोटा भाई बनाया लेकिन मेरे पिता को ठगा गया बिहार की जनता को ठगा गया।
प्रश्न-महागठबंधन को बचाने के लिए तेजस्वी ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
उत्तर-महागठबंधन को बचाना मकसद रहता तो मैं इस्तीफा दे देता, लेकिन जिस कारण से महागठबंधन बचाने की शर्त रखी गई वो गलत थी। जब मैंने गुनाह नहीं किया तो सजा क्यों? जिस वक्त की बात कह मुझपर आरोप लगाकर इस्तीफा मांगा जा रहा था। उस वक्त मेरी उम्र तेरह-चौदह साल थी और मैं क्रिकेट खेलता था कोई बच्चा घोटाले में शामिल था। ये बात कैसे सच हो सकती है?
उसका आरोप लगाकर मुझसे इस्तीफा देने को कहा गया। मैं इस दाग को कैसे अपने ऊपर लगने देता जो मैंने किया ही नहीं। ये सब बस बहाना था। भाजपा से हाथ मिलाने के लिए मुझे बदनाम करने की कोशिश थी।
प्रश्न-लालू जी जेल में हैं, तेजस्वी पार्टी और परिवार की जिम्मेदारियों को कैसे संभालेंगे?
उत्तर-लालू जी जेल में भले ही हैं लेकिन उनकी पार्टी उतनी ही मजबूत है। एक-एक नेता-कार्यकर्ता जानता है कि आगे क्या करना है? लालू जी पहली बार जेल नहीं गए हैं और जब-जब जेल गए हैं पार्टी और मजबूत हुई है। इस बार भी विरोधी देखेंगे कि किस इंसान को जेल भेजा है? इसका क्या परिणाम होता है?
बिहार की जनता का प्यार और पार्टी की मजबूती और बढ़ी है। बिहार में लालू की मजबूती को कम करने का जो लोग सपना देख रहे हैं उन्हें सुनहरे ख्वाब देखना बंद कर देना चाहिए। लालू का जनाधार कोई भी कम नहीं कर सकता। लालू जी गरीबों-दलितों के नेता हैं। वही लालू की ताकत हैं। लालू जनता के हैं और जनता लालू की है, इसी से सभी डरे रहते हैं।
इसीलिए अचानक एक-एक कर झूठे केस और झूठे आरोप लगाए गए हैं। लालू परिवार को राजद को तोड़ो-यही एक ध्येय है। कर लें जितना केस करना हो। आने वाले चुनाव में हम इसका जवाब देंगे। लोगों ने जो लकीर खींची है उससे बड़ी लकीर खींच देंगे कि उनका मुंह बंद हो जाए।
प्रश्न-बिहार में लालू राज को जंगलराज कहा जाता था। लोगों को डर था कि फिर जंगलराज आ जाएगा?
उत्तर-क्या अभी जंगलराज नहीं। क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है, अफसरशाही, भ्रष्टाचार चरम पर है। अभी तो राजद सत्ता में नहीं, अभी क्यों महाजंगलराज जारी है? इसपर कोई कुछ नहीं कहता। जो लोग सफेद कपड़े पहनकर पाप करें वो उनका पाप नहीं और जो अपने अंदर का आक्रोश दिखाए उसे बदनाम कर उसपर आरोप लगा देना चाहिए।
अभी राज्य की सरकार, केंद्र की सरकार केवल झूठे वादों पर चल रही। जमीनी हकीकत यही है कि विकास पुरुष कोई विकास नहीं अपना विकास करने में लगे हुए हैं और जनता, त्राहिमाम किसान परेशान है और अपराध में लिपटा विकास जारी है। ये कैसा विकास है? युवा परेशान हैं, नौकरी नहीं है। बैंकों की तैयारी नहीं, कैशलेस कर दिया। जीएसटी की मार और तो और बिहार में देख लीजिए कितना विकास हो रहा है?
शराबबंदी की गई लेकिन शराब खुलेआम बिक रही है। दहेज के लिए पहले से कानून है उसे लागू करने को लेकर अपनी छवि चमकाने की कोशिश-बस यही विकास हो रहा है।
प्रश्न-लालू यादव बेटों से ज्यादा प्यार करते हैं या बेटियों से…
उत्तर-ऐसा नहीं मेरे पिता सभी बच्चों से प्यार करते हैं, लेकिन आपको बता दूं कि वो बेटों से ज्यादा अपनी बेटियों से प्यार करते हैं। बेटियों में उनकी जान बसती है। बचपन से ही देखा है, पापा को लोगों से मिलने का, लोगों से बात करने का शौक रहा। उनकी परेशानियों को सुनते थे और तुरत हल निकालते थे। लेकिन उन्होंने परिवार को भी उतना ही महत्व दिया। खासकर, बेटियों की हर बात को मानते हैें।
प्रश्न-मां राबड़ी देवी के लिए क्या कहेंगे?
उत्तर-मेरी मां ने बहुत संघर्ष झेला है, बहुत कुछ सहा है, लेकिन वो मेरे पिता की ताकत हैं, पार्टी की बड़ी ताकत हैं। हम नौ भाई-बहनों का लालन-पालन करना, पिता की व्यस्तता और अचानक से घर-परिवार को संभालने के साथ ही बिहार की सत्ता संभालने की भी जिम्मेवारी, जिसे उन्होंने अच्छी तरह निभाया।
मेरी मां मेरे लिए भगवान हैं। मैंने मां को कभी परेशान नहीं देखा, हर हालत में सबकी हिम्मत बढ़ाती रहीं। वो मेरी मां के साथ ही राजद के एक-एक कार्यकर्ता के लिए भी मां की तरह हैं। उनके आशीर्वाद से ही राजद मजबूत है।
प्रश्न-तेजस्वी की शादी कब होगी? कैसी लड़की चाहिए?
उत्तर-शादी के लिए अभी तो सोचा नहीं है, लेकिन जब भी होगी मां-पापा की ही पसंद होगी। मुझे ऐसी लड़की चाहिए जो मेरी मां की तरह हो। घर-परिवार को समझे। मां की तरह हालात में हिम्मत रखकर परिवार का साथ दे।
प्रश्न-लालू पर परिवारवाद का आरोप लगता रहा है। कितना सही है?
उत्तर- राजद एक परिवार है और परिवार में सबका महत्व है। तेजस्वी में हमारे वरिष्ठ नेताओं ने शायद कुछ देखा होगा, तभी मुझे जिम्मेवारी सौंपी गई। मैंने तो नहीं कहा कि मुझे उपमुख्यमंत्री बना दीजिए, या नेता विपक्ष बना दीजिए। पार्टी ने तय किया। हमारे बुजुर्ग हमारा मार्गदर्शन करते हैं वो हमारी नींव हैं।
उनकी बदौलत ही राजद की मजबूत इमारत है जिसे तोडऩे की कोशिश की गई लेकिन लोगों को सफलता ना मिली, ना मिलेगी। अभी तो नए सिरे से एक बार फिर जंग-ए-ऐलान का बिगुल बजने वाला है। लालू जी जनता के सेवक रहे हैं। वो लोगों के बिना नहीं रह सकते। मुख्यमंत्री रहते हुए भी कोई भी कभी भी उनसे मिल सकता था। वो हर किसी की फरियाद सुनते थे।
उनकी अच्छाईयों को तो किसी ने याद नहीं किया। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में जितने काम हुए, उनके रेल मंत्री रहते हुए रेलवे को जो मुनाफा हुआ, गरीब रथ चलाया, ये सब तो किसी ने नहीं बताया। मैं पूछता हूं कि अचानक से इतना डर क्यों कि जितने आरोप लगाए जा सकते थे लालू परिवार पर ही लगाए गए।
प्रश्न-तेजस्वी को लड़कियों के इतने प्रोपोजल आए, जितने शायद किसी युवा नेता को नहीं मिले, कैसा लगता था?
उत्तर-अब ये तो किसी की अपनी भावनाएं हैं, मैं उन भावनाओं का सम्मान करता हूं। दरअसल, वो व्हाट्सएप नंबर पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी किया गया था। उसपर लोग अपनी समस्याएं बताते थे, मैं खुद उन समस्याओं को सुनता था और जवाब देता था। ये बिल्कुल नया प्रयोग था, जिससे काम करने में गांव के लोगों की समस्या और सड़कों की हालत जानने में मदद मिलती थी। लेकिन इसके साथ ये प्रोपोजल्स भी आते थे।
प्रश्न-सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं। युवाओं को क्या संदेश देंगे?
उत्तर-अब समय बदल गया है। युवा अब ज्यादा समझदार है। मैं खुद लोगों से मिलता हूं, लोगों के बारे में जानने की कोशिश करता हूं। सोशल मीडिया साइट्स पर भी एक्टिव रहता हूं। आपको विश्वास नहीं होगा कि लालू जी के ट्विटर एकाउंट के जितने फॉलोअर हैं उतने बिहार के किसी नेता के नहीं।
उनकी ट्वीट्स पर इतने कॉमेंट्स, रिट्वीट आते हैं, ये लोगों का प्यार ही है। पापा ने मुझसे कहा कि लोगों के बीच जाना जरूरी होता है। सोशल मीडिया जरूरी नहीं। मैंने समझाया कि ये भी लोगों से जुड़े रहने का माध्यम है। लेकिन, उनका कहना सही है कि सोशल मीडिया से जरूरी उन लोगों के पास जाकर उनकी बातें सुनना, उनसे मिलना ज्यादा जरूरी है।
लालू जी ने कहा कि लाठी अपनी रक्षा के लिए रखकर राजनीति करो, मैंने ये भी जोड़ दिया कि लाठी के साथ लैपटॉप भी जरूरी है। आज शहरी युवा तो बदला है लेकिन गांव के युवाओं के पास कई तरह की परेशानियां हैं।
प्रश्न-तेजस्वी ने क्रिकेट छोड़कर राजनीति को अपना भविष्य बना लिया। क्यों?
उत्तर-मुझे बचपन से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था, इसी वजह से मेरा ध्यान पढ़ाई में कम लगता था। लेकिन क्रिकेट के बाद मुझे लगा कि नहीं पार्टी और मेरे पिता की इच्छा है कि मैं राजनीति में आऊं तो मैंने पहले सीखना शुरू किया। अभी भी मैं सीख रहा हूं।
अभी मुझे बहुत लंबा सफर तय करना है। लोग कहते हैं कि नौवीं फेल है, ये क्या करेगा? मैं किसी के कहने-सुनने की परवाह नहीं करता। बिहार की जनता ने जो विश्वास मेरे पिता पर जताया है, मुझपर जताया है उसपर मुझे खड़ा उतरना है और मैं खुशनसीब हूं कि मुझे अपने वरिष्ठों का प्यार मिला ह,ै उनका मार्गदर्शन मिला है मैं काम करना चाहता हूं। अपने पिता की तरह हिम्मती बनना चाहता हूं।
अंतिम सवाल…तेजस्वी को अपने भाई बहनों में कौन सबसे प्यारा है?
हंसते हुए-मुझे बड़ी दीदियों का बहुत प्यार मिला। किसी भी अवसर पर हम सभी भाई-बहन इकïïट्ठे होते हैं। मां हम सबको देखकर बहुत खुश होती हैं। बड़े भाई तेजप्रताप हैं जो मुझे बहुत प्यार करते हैं। अपने परिवार और पार्टी की मजबूती ही मेरे लिए सबकुछ है।

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