कभी गहरे दोस्त थे पीएम मोदी और प्रवीण तोगड़िया, 2002 में आई संबंधों में खटास

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अहमदाबाद
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के सोमवार को अचानक लापता होने से राजनीतिक गलियारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके पिछले 15 वर्षों से तनावपूर्ण संबंधों पर चर्चा शुरू हो गई। सूत्रों ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी था जब पीएम मोदी और तोगड़िया गहरे दोस्त हुआ करते थे और दोनों एक ही स्कूटर से आरएसएस कार्यकर्ताओं से मिलने जाया करते थे। हालांकि वर्ष 2002 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनते ही दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ गई।
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वीएचपी के नेताओं कुछ नेताओं का मानना है कि तोगड़िया के खिलाफ पिछले एक महीने से घटनाक्रम तेजी से बदल रहा था जो राजनीति से प्रेरित और उन्हें ‘नीचा दिखाने की’ साजिश थी। सूत्रों ने बताया कि आरएसएस और बीजेपी दोनों ही चाहते थे कि वीएचपी तोगड़िया को मुक्त करे ताकि वे संघ के बैनर तले नए कार्यक्रम शुरू कर सकें। तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया था जिसके फलस्वरूप उनके खिलाफ पुराने मामलों में कार्रवाई तेज कर दी गई।
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गुजरात के एक वरिष्ठ वीएचपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘हाल ही में भुवनेश्वर में वीएचपी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक हुई थी। तोगड़िया का अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को खत्म हो रहा था और उनके साथ ही अध्यक्ष राघव रेड्डी का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा था। आरएसएस रेड्डी की जगह वी. कोकजे को अध्यक्ष बनाना चाहता था लेकिन तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया और रेड्डी को पद पर बनाए रखने पर जोर दिया।’
गोरक्षा पर तोगड़िया ने की थी कांग्रेस की प्रशंसा
उन्होंने बताया, ‘बाद में तोगड़िया ने एक विशाल सभा को संबोधित किया और कहा कि कुछ नेता उन्हें हटाना चाहते हैं। तोगड़िया ने राम मंदिर और गोरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। यही नहीं उन्होंने गोसेवा के लिए कांग्रेस की प्रशंसा भी की।’ वीएचपी नेता ने कहा, ‘ पिछले 15 दिन में तोगड़िया का नाम दो मामलों में उभरकर सामने आया है। इसमें एक गुजरात और दूसरा राजस्थान से है। गुजरात के 22 साल पुराने मामले में तोगड़िया अपने समर्थकों के साथ कोर्ट गए थे। हालांकि उन्हें तलाश करने पहुंची राजस्थान पुलिस खाली हाथ लौट गई थी। जिस तरह से चीजें तोगड़िया के खिलाफ जा रही हैं, उससे लगता है कि बीजेपी तोगड़िया को छोड़ने वाली नहीं है।’
मोदी ने कामकाज में हस्तक्षेप पर लगा दी थी रोक
बता दें, वर्ष 2002 में गुजरात के तत्कालीन सीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि तोगड़िया सरकार के कामकाज विशेषकर गृह विभाग के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। माना जाता है कि यहीं से दोनों के बीच संबंधों में दरार शुरू हुई। मोदी द्वारा साइडलाइन किए जाने से तोगड़िया ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब मोदी सरकार ने गांधीनगर में 200 मंदिरों को ढहा दिया और मोहम्मद अली जिन्ना पर लाल कृष्ण आडवाणी के बयान के बाद प्रदर्शन कर रहे वीएचपी कार्यकर्ताओं की पुलिस ने पिटाई कर दी। तोगड़िया ने मोदी के वर्ष 2011 में मुसलमानों के लिए ‘सद्भावना’ संदेश का मजाक उड़ाया और कहा कि उन्होंने छवि बदलने के लिए हिंदुत्व के अजेंडे का त्याग कर दिया है।

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