फैसला: कानपुर, दिल्ली समेत सभी पुराने आईआईटी में रिसर्च पार्क बनेंगे

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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कानपुर, दिल्ली, खड़गपुर, बांबे, गुवाहाटी, हैदराबाद और गांधीनगर आईआईटी में रिसर्च पार्क का निर्माण किया जाएगा। इनमें बांबे और खड़गपुर में निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। आईआईटी चेन्नई के रिसर्च पार्क में गुरुवार को नई सुविधाओं की शुरुआत करते हुए जावड़ेकर ने यह बात कही। आईआईटी चेन्नई द्वारा निजी कंपनियों की साझीदारी से स्थापित विश्वस्तरीय रिसर्च पार्क अब पूरी क्षमता में कार्य करने लगा है। इस मौके पर जावड़ेकर ने कहा कि सभी पुराने आईआईटी में भी इस तर्ज पर रिसर्च पार्क बनेंगे। केंद्र सरकार इसके लिए करीब सौ करोड़ रुपये की राशि प्रदान करती है।

जावड़ेकर ने कहा कि स्कूल से ही इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अटल टिंकरिंग योजना शुरू की गई है। अब तक 800 स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, थ्री डी प्रिंटिंग, रोबोटिंग आदि पर प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। सरकार प्रति स्कूल 20 लाख दे रही है।
आधुनिक मंदिर हैं
जावड़ेकर ने कहा कि जब भांखड़ा नागल बांध बनकर तैयार हुआ था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसे आधुनिक मंदिर कहा था। ये रिसर्च पार्क भी हमारे आधुनिक मंदिर हैं। विश्वविद्यालयों एवं उद्योग जगत के बीच सीधे संबंध होने चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो हमारे कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से चतुर लिंगम (थ्री ईडियट) निकलेंगे। इनोवेटर नहीं।
विदेश जाने की जरूरत नहीं
जावड़ेकर ने कहा कि देश में रिसर्च पार्क जैसी सुविधाओं की कमी के चलते कंपनियों को तकनीकी समाधान के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के पास जाना पड़ता था। लेकिन आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क के बाद यह चलन रुका है।
डीसी बिजली को बढ़ाएं
जावड़ेकर ने आईआईटी मद्रास द्वारा सौर ऊर्जा के जरिये डीसी तकनीकी से कम खपत करने वाले बिजली उपकरण बनाने के प्रयासों की सराहना की। ऐसे उपकरणों से बिजली की खपत दो तिहाई कम हो जाएगी क्योंकि डीसी करंट में बिजली कम खर्च होती है।
स्वतंत्र कंपनी की तरह रिसर्च पार्क
आईआईटी मद्रास का रिचर्स पार्क अलाभकारी स्वतंत्र कंपनी की तरह कार्य करता है। करीब 12 लाख वर्ग फीट में इसे बहुमंजिला इमारत में स्थापित किया गया है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपये दिए थे। करीब साढ़े तीन सौ रुपये उद्योग जगत से जुटाए गए हैं। आज इस पार्क में 47 रिसर्च कंपनियां हैं।
मच्छरों का यमदूत
रिसर्च पार्क में तैयार एक उपकरण जावड़ेकर को भेंट किया गया जो मच्छरों का यमदूत है। जैसे ही मच्छर इस उपकरण के करीब पहुंचते हैं, अंदर चलने वाला एक पंखे की हवा उन्हें भीतर मौजूद एक मौत के चेंबर में खींच लेती है। एक मशीन एक दिन में करीब 800 मच्छरों को मार डालती है। जल्द यह उपकरण बाजार में बाजार में आएगा।

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