EXCLUSIVE: जदयू नेता ने कहा- हम अपने एजेंडे पर चलते हैं, दूसरों से नहीं होते प्रभावित

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वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने कहा कि जदयू का आरंभ से ही खुद को दूसरे दलों से अलग साबित करने का प्रयास रहा है। महागठबंधन से अलग होने के बाद तो यह कोशिश और तेज हुई है।
पटना । ”जदयू का आरंभ से ही खुद को दूसरे दलों से अलग साबित करने का प्रयास रहा है। महागठबंधन से अलग होने के बाद तो यह कोशिश और तेज हुई है। कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण का दौर जारी है। केवल राजनीतिक मुद्दों को ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों को भी मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया है। पार्टी का मानना है कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ महात्मा गांधी से लेकर लोहिया एवं जयप्रकाश नारायण तक ने आवाज उठाई थी और जदयू इनके नक्शे कदम पर चलेगा। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस संदर्भ में दैनिक जागरण से विस्तार से बातें कीं।
सवाल : राजद इस समय प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी है। अगले चुनाव में आपका मुख्य रूप से इसी से मुकाबला होना है। क्या रणनीति है?
जवाब : हम किसी दल से मुकाबले या उससे प्रभावित होकर रणनीति नहीं बनाते। हम अपने एजेंडे पर चलते हैं। हम अपने मजबूत संगठन और बेहतर कार्यक्रमों के बल पर वोट मांगेंगे। पिछले चुनावों में हमने अपने कार्यक्रमों और ज्वलंत मुद्दों पर स्पष्ट नीति की बदौलत ही जनता का दिल जीता है। कानून का राज स्थापित किया है। बिहार की एक बेहतर छवि बनाई है। बदहाल प्रदेश की तस्वीर बदली है। जनता को इस बात का एहसास है।
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सवाल : मुख्य विरोधी दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद इस समय जेल में हैं। क्या इसे जदयू आने वाले चुनाव में खुला गोल पोस्ट जैसा मान रहा है?
जवाब : जदयू पर किसी के रहने या न रहने का कोई असर नहीं होगा। हम पहले भी राजद से अलग रहकर चुनाव लड़ चुके हैं। उस समय कौन कहां था, लोगों को पता है। और उन चुनावों के नतीजे भी लोगों को मालूम हैं। हम अपनी सोच और अपनी पहचान के बल पर जनता के बीच जाते हैं। हमारी विशेष पहचान है। लोग हमें विकास का प्रतिनिधि मानते हैं।
सवाल : जाति की राजनीति चुनावी मजबूरी बन जाती है। क्या आपकी इस रणनीति की राह में यह बाधा नहीं बनती?
जवाब : हमारा तौर-तरीका औरों से अलग है। बिहार इसका उदाहरण है। 2005 और उसके बाद के चुनावों में गवर्नेंस हमारा मुद्दा रहा। गवर्नेंस पर हमने चरणबद्ध तरीके से अमल किया। पहले गुड गवर्नेंस, फिर विधि व्यवस्था और उसके बाद आधारभूत संरचना, शिक्षा आदि पर काम किया। नतीजे में लोगों में आशा जगी है और वे हमारी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यह आशा समाज के सभी तबके में समान रूप से है। यह स्थिति जाति की राजनीति को पनपने नहीं देगी।
सवाल : जदयू ने अपने एजेंडे में सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुख स्थान दे रखा है। क्या इस अनूठे प्रयोग के बेहतर नतीजे सामने आएंगे?
जवाब : यह प्रयोग तो महात्मा गांधी ने किया था और उसके अच्छे परिणाम से सभी वाकिफ हैं। वह शराबबंदी के पक्ष में थे। शिक्षा और स्वच्छता पर भी उन्होंने फोकस किया। फिर लोहिया और जेपी ने भी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागृत किया। हमारे नेता नीतीश कुमार इन महापुरुषों के सपनों को साकार करने में लगे हैं। शराबबंदी लागू हुई, फिर अब दहेज एवं बाल विवाह के खिलाफ अभियान शुरू हुआ है।
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सामाजिक सरोकार के ये मुद्दे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ हमारी मुहिम का व्यापक असर दिखेगा। यह अभियान समाज की खुशहाली की जमानत बनेगी। हमारा मिशन समता, सद्भाव और समृद्धि है। वोट की राजनीति से अधिक हम समाज कल्याण को अहम मानते हैं। हमारे लिए सत्ता लोगों और समाज की सेवा का अवसर है।
सवाल : दहेज और बाल विवाह के खिलाफ नीतीश सरकार मानव श्रृंखला बना रही है। इसमें जदयू भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मानव श्रृंखला के माध्यम से क्या संदेश देने की कोशिश है?
जवाब : शराबबंदी के पक्ष में पिछले वर्ष मानव श्रृंखला आयोजित की गई थी और इस साल बाल विवाह और दहेज के खिलाफ इसका आयोजन हो रहा है। मानव श्रृंखला दर्शाती है कि किसी भी मुद्दे पर लोगों की चेतना जगाती है? पिछली मानव श्रृंखला में चार करोड़ लोग शामिल हुए थे और इस बार यह रिकार्ड टूटने वाला है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना अपने आप में इस बात का सबूत होगा कि लोग सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लडऩे को कितने तत्पर हैं। मानव श्रृंखला उनकी चेतना जगाएगी।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ यह लड़ाई लोगों को जातिवाद के घरौंदों से भी बाहर निकालेगी। शराबबंदी ने नौजवानों को शराब की लत से निजात दिलाई। शराब ङ्क्षहसा का कारण भी थी। शराबबंदी के बाद घरों में शांति आई है। समाज में शांति आई है। इसे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला। उसी प्रकार दहेज एवं बाल विवाह पर रोक का भी समाज पर व्यापक असर दिखेगा। लोग जाति का बंधन तोड़ एक बड़े उद्देश्य के लिए एकजुट होकर बाहर निलेंगे। मानव श्रृंखला में उनकी यह ललक खुलकर प्रदर्शित होगी।
सवाल : जदयू का भाजपा से गठबंधन है। हाल में कुछ राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा ने आक्रामक प्रचार अभियान चलाया है। क्या भाजपा की यह रणनीति जदयू को रास आएगी?
जवाब : हम अपने एजेंडे पर चुनाव लड़ते हैं। भाजपा से हमारा तालमेल मुद्दों के आधार पर है। हमारा मुख्य मुद्दा गवर्नेंस है और इस मुद्दे पर दोनों दल एकमत हैं। भाजपा से तालमेल से हमारे कार्यक्रम प्रभावित नहीं होंगे। भाजपा से हमारा पहले भी तालमेल रहा है और जदयू के कार्यक्रमों या चुनावी रणनीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
सवाल : लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाने की बातें उठ रहीं हैं। जदयू का इस मामले में क्या रुख है?
जवाब : सैद्धांतिक रूप से जदयू लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एकसाथ कराए जाने के पक्ष में है। ऐसा होता है तो एक अच्छी मिसाल कायम होती है। परन्तु इसके व्यवहारिक पक्ष को भी देखना होगा। कई राज्यों में अभी चुनाव तीन-तीन साल बाकी हैं। सब राज्यों की सहमति के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय होना चाहिए। वैसे, इस मुद्दे पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पार्टी में सबसे राय-मश्विरा कर अंतिम फैसला लेंगे।

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