सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: अमित शाह के बरी होने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई स्थगित

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मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बरी होने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को 13 फरवरी तक स्थगित कर दिया है। निचली अदालत ने इस मामले में शाह को सबूतों के अभाव में बरी किया था। सीबीआई ने इस मामले में लोअर कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देने का फैसला किया था। जिसके बाद मुंबई के वकीलों के एक संगठन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट से अपील थी कि वह अमित शाह को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए सीबीआई को एक पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने का निर्देश दे।

क्या है सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामला

2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी। सीबीआइ ने फरवरी 2010 में इस मामले की जांच शुरू की और उसी साल जुलाई में अमित शाह सहित 23 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। अमित शाह उस समय गुजरात में गृह राज्य मंत्री थे। मामले की सुनवाई के दौरान समय-समय पर ट्रायल कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियों समेत कई अभियुक्तों को मामले से बरी कर दिया।जज लोया की मौत से जुड़ा है मामला

सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले से जुड़े एक केस का संबंध जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत से भी जुड़ा है। साल 2005 में गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गिरफ्तार किया था। गुजरात पुलिस पर इन दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मार डालने का आरोप है।2006 में गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी मार डाला गया। प्रजापति को सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था। इस मामले को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और सोहराबुद्दीन के केस को एक साथ जोड़ दिया। इस केस की सुनवाई शुरुआत में जज जेटी उत्पत कर रहे थे, लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश ना होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया। फिर केस की सुनवाई जज बी एच लोया ने की। लेकिन दिसंबर 2014 में नागपुर में उनकी मौत हो गई।

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