Tweet पॉलिटिक्स पर भड़के नीतीश, JDU ने तेजस्वी को कहा- होटवार जाकर पूछ लीजिए

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पटना : बिहार में ट्वीटर पॉलिटिक्स पर एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के ट्वीट पर तंज कसते हुए नीतीश कुमार ने इशारों-इशारो में तेजस्वी पर निशाना साधा और कहा कि ट्वीट करने वालों को शब्दों का अर्थ पता है है या नहीं, लेकिन तरह-तरह की बातें करते हैं. नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान तेजस्वी का बिना नाम लिये हुए कहा कि सोशल मीडिया में अन सोशल बात चलती है. यह फैशन हो गया है. उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल लोगों को रख कर जिस प्रकार ट्वीट किया जाता है और उसमें जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग होता है, पता नहीं उन शब्दों के अर्थ की उन्हें जानकारी है या नहीं. मुख्यमंत्री ने मजाक में ही नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सब देख कर अचरज होता है. बुनियादी चीज की जानकारी नहीं है, राजनीति का क, ख, ग पता नहीं है, लेकिन तरह-तरह की बातें करते हैं. राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन क्या है, विकास क्या है, यह तो जानते नहीं है, लेकिन भाषण बड़ी-बड़ी देते रहते हैं.

वहीं दूसरी ओर तेजस्वी के ट्वीट का हवाला देते हुए जदयू नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि लंबी चौड़ी बहस नहीं, अन्य संवर्ग को तो छोड़िए, 1.5 लाख प्राथमिक शिक्षक, उसमें कितनों लोगों को आपके माता-पिता के कार्यकाल में अवसर मिला. नीरज ने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा है कि यह बात रांची जाकर होटवार में पूछ लीजिए. नीरज ने आगे कहा कि माननीय नीतीश कुमार के कार्यकाल में अब तक 6.4 लाख प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में शिक्षक जिनमें 78 प्रतिशत शिक्षक अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, भूमिहीन किसान एवं सीमांत किसान के सामाजिक समूह से हैं. हिम्मत है तो बताइए. आपके माता-पिता के कार्यकाल के 1.5 लाख शिक्षक किस सामाजिक संवर्ग से आते हैं.

मुख्यमंत्री बुधवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में जदयू के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे. समारोह में नीतीश कुमार ने कहा कि हम एक सीमा तक ही किसी चीज पर समझौता कर सकते हैं. सत्ता किसी को मिलती है तो सेवा करनी चाहिए, लेकिन कुछ लोगों को सत्ता मिली तो वे माल कमाने लगते हैं और धनोपार्जन के सिद्धांत पर चलते हैं. महागठबंधन गड़बड़ झाला और घच-पच के लिए नहीं बना था. यह हमें मंजूर नहीं है. इसलिए राजनीतिक रूप से महागठबंधन से हटने का फैसला लिया. इस फैसले से जनता से किये वादों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उन्हें पूरा करने में सरकार दिन-रात लगी हुई है. उन्होंने पार्टी के प्रवक्ताओं को नसीहत भी दी कि वे सुबह-सुबह दूसरों के एजेंडों पर बयान दें. वे अपना एजेंडा तय करें

इससे पूर्व, बुधवार को तेजस्वी ने ट्वीट कर केंद्र सरकार के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला था. तेजस्वी ने लिखा था कि मोहन भागवत बिहार आकर जांच-पड़ताल कर रहे है कि नीतीश के साथ चुनाव लड़ा जाये या नहीं और कब चुनाव कराया जाये? कुछ दिन पहले भाजपा के बिहार प्रभारी बिहार प्रवास पर थे. बिहार में दिसंबर 2018 तक लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव एकदम तय है.तेजस्वी यादव ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव को समय से पहले कराने की संभावना पर ट्वीट करने के बाद नीतीश कुमार के आरक्षण के पक्षधर होने के मामले पर सवाल उठाया था और कहा था कि अगर नीतीश कुमार आरक्षण के पक्षधर है तो बिहार में उनके 13 साल के कार्यकाल में हुए लाखों रिक्तियों के बैकलॉग को तुरंत भरें. जुबानी पकौड़े न उतारे. साहब, काम करिए काम. उसके बाद तेजस्वी ने बिहार सरकार पर हमला बोला था और कर्पूरी जयंती भाजपा द्वारा मनाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में डबल इंजन वाले ढोंगीयों की सरकार है. कर्पूरी ठाकुर को गाली देने वाले आज उनकी जयंती मनाने का अभिनय कर रहे है. अगर ये अति पिछड़ों के सच्चे हितैषी है तो कर्पूरी जी को भारत रत्न देने की हमारी पुरानी मांग को पूरा करें अन्यथा उनके नाम पर घड़ियाली आंसू बहाना बंद करो. धन्यवाद!

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