राष्ट्रपति कोविंद के भाषण में है मोदी सरकार के 4 सालों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड

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राष्ट्रपति कोविंद के भाषण में है मोदी सरकार के 4 सालों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड
आज सुबह बजट सत्र शुरू होने से पहले ही पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की थी कि तीन तलाक बिल को पास करवाकर मुस्लिम महिलाओं को नए साल का उपहार दें. वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने भी अपने अभिभाषण में उम्मीद किया कि संसद जल्द ही तीन तलाक बिल को पास कर देगी.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण में मोदी सरकार के कामकाज के पिछले 4 सालों के कामकाज का पूरा ब्यौरा है. उनके भाषण से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मोदी साल के कामकाज का कैसा रिपोर्ट कार्ड है. राष्ट्रपति कोविंद ने अपने भाषण में उन तमाम योजनाओं और उपलब्धियों को जिक्र किया है जिनके बारे में सरकार की ओर से हमेशा बताया जा रहा है. इसके साथ ही राष्ट्रपति के अभिभाषण में लोकसभा चुनाव के एजेंडे की भी झलक मिली है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार ट्रिपल तलाक बिल के मुद्दे को चुनाव में जोर-शोर से भुनाएगी. आज सुबह बजट सत्र शुरू होने से पहले ही पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की थी कि तीन तलाक बिल को पास करवाकर मुस्लिम महिलाओं को नए साल का उपहार दें. वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने भी अपने अभिभाषण में उम्मीद किया कि संसद जल्द ही तीन तलाक बिल को पास कर देगी.

सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की थी. इस योजना के सकारात्मक परिणाम को देखते हुए अब इसका दायरा 161 जिलों से बढ़ाकर 640 जिलों तक कर दिया गया है. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम में बदलाव करके एक बड़ा कदम उठाया है. महिलाओं को 12 सप्ताह के स्थान पर वेतन सहित, 26 सप्ताह की छुट्टी देने का प्रावधान किया गया है. अब कामकाजी महिलाओं को अपने नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए अधिक समय मिला करेगा. उन्‍होंने कहा कि ‘जनधन योजना’ के तहत अब तक लगभग 31 करोड़ गरीबों के बैंक खाते खोले जा चुके हैं. इस योजना के शुरू होने से पहले, देश में महिलाओं के बचत खातों की संख्या लगभग 28 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 40 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है.

सरकार ने गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए, विशेषकर स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए, बिना बैंक गारंटी कर्ज देने पर जोर दिया है. अब लोग अपना उद्यम चलाने के सपने को साकार करने के लिए आसानी से कर्ज ले पा रहे हैं. ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के तहत अब तक लगभग 10 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं और 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज दिया गया है. लगभग 3 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार इस योजना का लाभ उठाया है और स्वरोजगार शुरू करने में सफल हुए हैं.

किसानों की मुश्किलों का समाधान करना और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना, सरकार की उच्च प्राथमिकता है. मेरी सरकार की योजनाएं न केवल किसानों की चिंता कम कर रही हैं बल्कि खेती पर होने वाले उनके खर्च को भी घटा रही हैं. सरकार की नीतियों और किसानों की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि देश में 275 मिलियन टन से ज्यादा खाद्यान्न और लगभग 300 मिलियन टन फलों-सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है.

सरकार किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है. किसानों को उनकी पैदावार की उचित कीमत मिल सके, इसके लिए देश की कृषि मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने का कार्य जारी है, eNAM पर अब तक 36,000 करोड़ रुपए से अधिक की कृषि वस्तुओं का व्यापार किया जा चुका है. दशकों से लंबित 99 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का काम भी प्रगति पर है. दालों के लिए बनाई गई नई नीति की वजह से पिछले वर्ष की तुलना में दाल के उत्पादन में 38 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जो एक रिकॉर्ड है.

किसानों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी सेक्टर में 11,000 करोड़ रुपए की ‘डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि’के द्वारा एक महत्त्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है. सरकार की नीतियों की वजह से जहां एक तरफ यूरिया का उत्पादन बढ़ा है, वहीं 100% नीम कोटिंग के बाद यूरिया की कालाबाजारी भी रुकी है. गोरखपुर, बरौनी, सिंदरी, तालचेर और रामागुंडम में उर्वरक कारखानों को फिर से शुरू कराने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत किसानों को सस्ती और सरल बीमा सेवा उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2017 के दौरान, रबी और खरीफ की फसलों के लिए, 5 करोड़ 71 लाख किसानों को इस योजना के तहत सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है.

सरकार ने गरीबों को एक रुपए प्रति महीना और 90 पैसे प्रतिदिन के प्रीमियम पर, बीमा योजनाएं सुलभ कराई हैं. अब तक 18 करोड़ से ज्यादा गरीब ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ और ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ से जुड़ चुके हैं. बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा के लिए भी मेरी सरकार वचनबद्ध है. ‘अटल पेंशन योजना’ के तहत लगभग 80 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं.

देशभर में लगभग 2 लाख 70 हजार कॉमन सर्विस सेंटर बनाए गए हैं, जो सस्ती दरों पर देश के दूर-दराज वाले इलाकों में भी विभिन्न सेवाओं की डिजिटल डिलिवरी कर रहे हैं. ‘भारत नेट परियोजना’ के तहत, देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है. पहले चरण में एक लाख से अधिक पंचायतों को जोड़ा जा चुका है. गरीबों के जीवन में उजाला फैलाने और उन्हें विकास की राह पर चलने के लिए समर्थ बनाने के लिए, सरकार ‘‘सौभाग्य’’ योजना के तहत 4 करोड़ गरीबों को बिजली कनेक्शन दे रही है.

समाज के हर तबके तक विकास पहुंचाने की सोच के साथ, ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. 2014 में केवल 56 % गांव ही सड़क संपर्क से जुड़े थे. अब 82% से ज्यादा गांव सड़कों से जुड़ चुके हैं जिनमें से अधिकांश दूर-दराज इलाकों में हैं. हर गरीब को भरपेट भोजन मिले, इसके लिए कानून के उद्देश्य को प्रभावी बनाना अनिवार्य है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत देश के सभी राज्यों में सस्ती दरों पर खाद्यान्न देने की व्यवस्था को पारदर्शी और लीकेज प्रूफ बनाया जा रहा है.

समाज के प्रत्येग वर्ग की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील सरकार ने‘राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग’ को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है. हमारे देश में ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांगजन हैं. सरकार ने ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’ लागू किया है. दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है.’

‘सीखो और कमाओ’; ‘उस्ताद’; ‘गरीब नवाज कौशल विकास योजना’; ‘नई रोशनी’ आदि कार्यक्रमों के जरिए मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी एवं जैन समाज के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं . पिछले एक साल में 45 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, फेलोशिप, कौशल विकास और कोचिंग स्कीमों का लाभ दिया गया है.

महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, आजादी के बाद पहली बार पुरुष रिश्तेदारों के बिना, 45 साल से ज्यादा आयु की महिलाओं के हज पर जाने की पाबंदी हटा दी गई है. इस साल 1,300 से ज्यादा महिलायें बिना मेहरम के हज पर जा रही हैं.

सभी के सिर पर छत हो, और उसे पानी-बिजली-शौचालय की सुविधा मिले, इस संवेदनशील सोच के साथ सरकार देश के हर आवासहीन गरीब परिवार को वर्ष 2022 तक घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर काम कर रही है पिछले साढ़े तीन वर्षों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में 93 लाख से अधिक घरों का निर्माण किया गया है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी’ के अंतर्गत गरीबों को घर बनाने के लिए ब्याज दर में 6 प्रतिशत की राहत दी जा रही है.

सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य की बेहतर और सस्ती सुविधा के लिए नई ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति’ बनाई है’ प्रधानमंत्री जन औषधि’ केन्द्रों के माध्यम से गरीबों को 800 तरह की दवाइयां सस्ती दरों पर दी जा रही हैं. इन केन्द्रों की संख्या 3,000 के पार पहुंच चुकी है. ‘दीनदयाल अमृत योजना’ के तहत 111 आउटलेट के माध्यम से 5,200 से अधिक जीवन-रक्षक ब्रांडेड दवाओं तथा सर्जिकल इम्प्लांट्स पर 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक की रियायत दी जा रही है.

डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस की 13 हजार सीटें तथा पोस्ट ग्रैजुएट की 7,000 से अधिक सीटें मंजूर की गई हैं. चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने लोक सभा में ‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक’ भी प्रस्तुत किया है. ‘अटल इनोवेशन मिशन’ के तहत 2,400 से ज्यादा ‘अटल टिन्करिन्ग लैब्स’ को स्वीकृति दी जा चुकी है ताकि बच्चों में छोटी उम्र से ही उद्यमिता और रचनात्मकता की नींव डाली जा सके.

सरकार ने देश में उच्च शिक्षण संस्थाओं की समस्त परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक स्वायत्त परीक्षा संगठन, ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ के गठन को मंजूरी दी है. युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सक्रिय सरकार देश में 20 ‘इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेन्स’ बनाने पर काम कर रही है. इस मिशन के तहत चुने हुए शिक्षण संस्थानों को 10,000 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी.

सरकार स्टार्ट ने अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, मुद्रा योजना जैसे कार्यक्रम चला रही है. जो उद्योग या कंपनियां नौकरियों के नए अवसर सृजित कर रही हैं उन्हें ‘प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना’ के तहत आर्थिक मदद दी जा रही है. 20 लाख से ज्यादा लाभार्थी इस योजना से सहायता प्राप्त कर चुके हैं. सरकार ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है. श्रम कानूनों के पालन के लिए रजिस्टर की संख्या 56 से घटाकर 5 कर दी गयी है. अब श्रम सुविधा पोर्टल पर सभी रिटर्न ऑनलाइन भरे जाते हैं.

‘प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान’ के अंतर्गत सरकार विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चला रही है. इस कार्यक्रम के तहत अभी तक एक करोड़ लोगों को डिजिटल रूप में साक्षर कर दिया गया है. डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने में ‘भीम App’ बड़ी भूमिका निभा रहा है. हाल ही में लॉन्च किए गए ‘उमंग App’ द्वारा 100 से ज़्यादा जनसुविधाओं को मोबाइल पर उपलब्ध कराया गया है.

आधार द्वारा गरीब लाभार्थियों को उन्हें मिलने वाली सुविधाएं, बिना बिचौलियों के, सीधे पहुंच रहीं हैं. वर्तमान सरकार की 400 से अधिक योजनाओं में डिजिटल भुगतान किया जा रहा है. अब तक 57,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि गलत हाथों में जाने से बचाई गई है. अब देश में 113 मोबाइल कंपनियां कार्यरत हैं, जिनकी संख्या 2014 में मात्र 2 थीं. इससे देश के छोटे शहरों में भी हमारे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं.

रेलवे में क्षमता विकास और आधुनिकीकरण के लिए निवेश में निरंतर बढ़ोतरी की जा रही है. सरकार विश्वस्तरीय रेल सेवाओं के लिए वचनबद्ध है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का कार्य भी प्रारंभ हो गया है. सरकार ने मेट्रो परियोजनाओं के लिए भी एक नई नीति बनाई है. नई नीति में ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर जोर दिया गया है. देश में, अभी 11 शहरों में मेट्रो परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

सरकार ने राजमार्ग क्षेत्र के एक नए वृहद कार्यक्रम ‘भारतमाला’ को स्वीकृति दी है. इसके लिए 535,000 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है. नेशनल कॉरिडोर एफिशिएंसी में वृद्धि करने के लिए लगभग 53,000 किलोमीटर लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्ग चिन्हित किए गए हैं. देश के छोटे शहर हवाई मार्ग से जुड़ सकें और निम्न मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग और युवा कम खर्च पर, आसानी से हवाई यात्रा का लाभ उठा सकें, इसके लिए ‘उड़े देश का आम नागरिक’ यानी, ‘उड़ान’ योजना शुरू की गई है. ‘उड़ान’ योजना के मात्र 15 महीनों में 56 हवाई अड्डों और 31 हेलीपैडों को जोड़ने के लिए कार्य शुरू किया गया है. अब तक 16 ऐसे हवाई अड्डों से उड़ानें शुरू भी हो चुकी हैं.

जब देश में बिजली क्षमता के विस्तार में लक्ष्य से अधिक बढ़ोतरी हुई है। अब भारत बिजली का नेट एक्सपोर्टर बन गया है. 18,000 गांवों तक बिजली पहुंचाने का कार्य भी पूर्णता की तरफ बढ़ रहा है. सरकार ने ‘वन नेशन वन ग्रिड’ का कार्य पूरा करके राज्यों को सस्ती दरों पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की है. देश के प्रत्येक गांव तथा कस्बे में विद्युत वितरण व्यवस्था मज़बूत करने के लिए लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए की योजनाएं लागू की गई हैं. ‘उजाला योजना’ के अंतर्गत देश मे 28 करोड़ से ज्यादा LED बल्ब वितरित किए जा चुके हैं. निजी क्षेत्र द्वारा भी 50 करोड़ से ज्यादा LED बल्ब की बिक्री की गई है. इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बिजली बिल में सालाना 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत हो रही है.

राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा, सरकार द्वारा उत्तर-पूर्व में संपर्क मार्ग बढ़ाने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. पिछले वर्ष देश के सबसे लंबे नदी पुल, ढोला-सादिया, को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। इस पुल ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच की दूरी 165 किलोमीटर कम कर दी है. राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा, केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के नियमित प्रयासों के कारण, देश की आंतरिक सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. पूर्वोत्तर में, सुरक्षा स्थिति में भी बदलाव आया है. नक्सली-माओवादी हिंसा की घटनाओं में भी कमी आई है.

पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए 18,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की योजना को मंजूरी दी है. डिफेन्स मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप से संबंधित नीति को भी अंतिम रूप दे दिया गया है. इससे प्रमुख डिफेन्स प्लेटफॉर्म्स और इक्विपमेंट्स के निर्माण में निजी क्षेत्र की अधिक से अधिक भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा. सरकार ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ के अपने वचन को पूरा करते हुए 20 लाख से ज्यादा सेवानिवृत्त सैनिकों को 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की बकाया राशि का भुगतान किया है.

मानवता की सेवा, भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है. चाहे नेपाल में भूकंप हो या श्रीलंका में बाढ़ की आपदा, या मालद्वीप में पेयजल का संकट, इन्हीं मूल्यों के कारण भारत हमेशा फर्स्ट रेस्पॉन्डर के रूप में उपस्थित रहा है. आज विश्व के किसी भी कोने में बसे सभी भारतीयों को यह भरोसा है कि वे कहीं भी संकट में पड़ेंगे तो उनकी सरकार उन्हें सुरक्षित निकालकर स्वदेश वापस ले आएगी. वर्ष 2014 के बाद से विदेश में संकट में फंसे 90,000 से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया है.

चाबहार पोर्ट का प्रारम्भ होना एक ऐतिहासिक घटना है. इस पोर्ट के माध्यम से अफगानिस्तान को गेहूँ की पहली खेप भेजी गयी है. इस वर्ष भारत-अफगानिस्तान के बीच हवाई-गलियारे की शुरुआत भी हुई है, जिसमें माल-ढुलाई का कार्य आरम्भ हो गया है.

अर्थव्यवस्था में, 2016-17 की पहली तिमाही से, जीडीपी विकास में अस्थायी मंदी रही. वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में इस गिरावट में बदलाव आया. पिछले साढ़े तीन वर्षों में मुद्रास्फीति की दर, करंट अकाउंट डेफिसिट और फिस्कल डेफिसिट औसतन कम हुए हैं. वर्ष 2017 में विदेशी मुद्रा भंडार 410 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर से ऊपर चला गया. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी पिछले तीन वर्षों के दौरान 36 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 60 बिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंच गया है.

कीमतों के कम होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच सके, इसके लिए सरकार द्वारा National Anti-Profiteering Authority का गठन भी किया गया है. सरकार बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और उसमें पारदर्शिता लाने के लिए भी प्रतिबद्ध है. इसके लिए 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के पूंजी निवेश के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का री-कैपिटलाइजेशन करने का निर्णय भी किया गया है.

सरकार की इन कोशिशों के कारण ही तीन वर्षों में भारत, वर्ल्ड बैंक की Ease of Doing Business की रैंकिंग में 142 से 100वीं रैंक पर पहुंच गया है. इससे विश्व बाजार में देश की साख और बढ़ी है.

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