तेजस्वी और कांग्रेस में यात्रा के बहाने बन सकती है टकराव की स्थिति, जानें पूरी बात

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पटना : कहते हैं कि राजनीति में कई बार सत्ता का रास्ता सियासी यात्रा से तय होता है. विभिन्न राजनीतिक दल या नेता गाहे-बगाहे अपने मुद्दों के साथ पार्टी की बात जनता के सामने रखने के लिए यात्राओं का सहारा लेते हैं. कुछ ऐसी ही यात्रा की राजनीति बिहार में शुरू हो गयी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास समीक्षा यात्रा के समाप्त होने के साथ ही यात्राओं के तारीख की घोषणा होने लगी है. तेजस्वी यादव बिहार में न्याय यात्रा पर निकलने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर उनके कदम- से कदम मिलाकर चलने वाली पार्टी कांग्रेस भी आमंत्रण यात्रा के बहाने सियासत की नयी लकीर खींचने को बेताब है. राजनीति प्रेक्षकों की मानें, तो कांग्रेस अंदर ही अंदर बिहार में अपनी खुद की जमीन तलाशने में जुटी है, वरना तेजस्वी की यात्रा के आस-पास अपनी भी यात्रा शुरू करने का कोई मतलब नहीं बनता है. राजनीतिक जानकारों की मानें, तो दोनों पार्टियों की यह यात्रा कहीं संबंधों में खटास का कारण ने बन जाए.

तेजस्वी के न्याय यात्रा को लेकर शुरू से ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है. जदयू ने कहा कि तेजस्वी को प्रायश्चित यात्रा करनी चाहिए. जदयू ने यहां तक कहां कि तेजस्वी लोगों को यह बताएं कि 28 साल की उम्र में 30 संपत्ति के मालिक कैसे बन गये. विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी पूरे बिहार में घूम कर अपनी बेनामी संपत्ति की खोज खबर के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं. उधर, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार की नजर में यदि तेजस्वी अबोध और अज्ञानी है और जिसे ट्वीट का मतलब समझ में नहीं आता, तो फिर उसकी यात्रा पर इतनी हाय-तौबा क्यों मचायी जा रही है ? उधर, कांग्रेस को यह नजर आ रहा है कि तेजस्वी की यात्रा पूरी तरह राजनीतिक विवादों में फंसती दिख रही है, इसी दौरान वह अपनी आमंत्रण यात्रा को निकालकर उसे सफलता का अमली जामा पहना सकती है और खुद की खोयी जमीन को तलाशने में पूरा जोर लगा सकती हैं.

तेजस्वी की यात्रा का मकसद है कि लालू के संदेश को, लालू की बात को आम लोगों के साथ अपने समर्थकों के बीच रखना. लालू जेल में बंद हैं और वहीं से उन्होंने निर्देश के साथ जनता के नाम संदेश को जारी कर रखा है. हालांकि, तेजस्वी की यात्रा को नीतीश कुमार की समीक्षा यात्रा के जवाब में देखा जा रहा है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि तेजस्वी यादव जदयू को यह दिखाना चाहते हैं कि समीक्षा यात्रा के दौरान जहां मुख्यमंत्री को कई जगहों पर विरोध झेलना पड़ा, लेकिन उनकी यात्रा का कितना भव्य स्वागत हो रहा है, यह लोग जान लें. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि तेजस्वी यादव इस यात्रा मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमले तेज कर सकते हैं और बिहार सरकार के अब तक के कार्यों को अपने तरीके से लोगों के सामने पेश कर सकते हैं.

दूसरी ओर कांग्रेस बिल्कुल पैनी नजर के साथ तेजस्वी की यात्रा की तैयारी को देख रही है और वह नीतीश कुमार के समीक्षा यात्रा के परिणामों को भी गहनता के साथ अध्ययन कर रही है. आमंत्रण यात्रा पहले 18 जनवरी से शुरू होने वाली थी, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने ज्यादा ठंड होने का बहाना बनाते हुए इसे टाल दिया था. सूत्रों की मानें, तो अब यह यात्रा फरवरी के पहले हफ्ते में शुरू हो सकती है, जबकि उधर, तेजस्वी यादव भी अपनी यात्रा 9 फरवरी से सीमांचल के जिले पूर्णिया से शुरू करने वाले हैं. यानी कि कांग्रेस की आमंत्रण यात्रा भी तेजस्वी यादव की न्याय यात्रा के इर्द-गिर्द शुरू होती दिख रही है. ऐसे में राजनीतिक जानकार मानते हैं कि साथ होते हुए भी कांग्रेस और तेजस्वी की यात्रा आपस टकराती दिख रही हैं.

आमंत्रण यात्रा चंपारण के बेतिया के वृंदावन से शुरू होगी, इस दौरान कांग्रेस का रथ पूरे बिहार का भ्रमण करेगा. उधर, राहुल गांधी ने भी इस यात्रा की अनुमति फरवरी में ही आयोजित करने की दे दी है. आमंत्रण यात्रा के बहाने बिहार कांग्रेस फिर से पुराने साथियों से कनेक्ट करने की कोशिश करना चाहती है. जानकारों की मानें, तो वर्तमान में कई नेता, जो राजद में शामिल हैं, वह पहले कांग्रेसी थे. ऐसे नेताओं में बिहार के जिला स्तर के ज्यादातर नेता शामिल हैं, इसका साफ मतलब है कि एक तरफ तेजस्वी अपने समर्थकों और नेताओं को एकजुट करने के लिए न्याय यात्रा पर निकलेंगे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस दूसरे दलों में शामिल अपने पुराने साथियों को अपने साथ लेने के प्रयास में जुट जायेगी. वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त कहते हैं कि इन दोनों पार्टियों की यात्रा वाली कवायद को राजनीतिक चश्में से देखें, तो यह अपनी-अपनी सियासत साधने की यात्रा लग रही है.

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