चंदन की हत्या में वांछित सलीम जावेद अरेस्ट

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कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुए बवाल में हुई चंदन उर्फ अभिषेक गुप्ता की हत्या का मुख्य आरोपी सलीम जावेद आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। वारदात के बाद से उसकी तलाश में दर- दर की खाक छान रही पुलिस को आरोपी सलीम कासगंज में ही छिपा मिला। गौरतलब है कि इससे पूर्व पुलिस ने उसके घर से वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर चुकी है। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने बताया कि पिस्टल को बैलेस्टिक जांच के लिये भेज दिया गया है।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने बताया कि वारदात के मुख्य आरोपी सलीम जावेद को कासगंज से ही दबोचा गया है। वारदात की कडि़यों को जोड़ने के लिये सलीम को अज्ञात स्थान ले जाकर उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के बाद पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ से भेजे गए आईजी डीके ठाकुर, आईजी अलीगढ़ डॉ। संजीव गुप्ता, डीएम आरपी सिंह, एसपी पीयूष श्रीवास्तव भी सलीम से पूछताछ कर रहे हैं। आईजी संजीव गुप्ता ने बताया कि पूछताछ में सलीम ने कुबूल किया है कि उसी ने चंदन पर गोली चलाई थी। उन्होंने बताया कि बवाल और हत्या के मामले में नामजद 37 लोगों को पकड़कर पुलिस जेल भेज चुकी है।

गौरतलब है कि तिरंगा यात्रा रोकने के बाद शहर के तहसील रोड पर बवाल हुआ था। इसी दौरान जुलूस में शामिल चंदन गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक के पिता सुशील गुप्ता ने तहसील रोड राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के करीब रहने वाले सलीम जावेद, उसके भाईयों वसीम व नसीम, बरकतउल्ला समेत 20 नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी के बाद से पुलिस और एसओजी मुख्य आरोपी सलीम की तलाश में कासगंज व आसपास के जिलों में दबिश दे रही थी। पर, उसका कोई सुराग नहीं लग सका था। बुधवार को आखिरकार पुलिस को कासगंज में ही सलीम के छिपे होने की जानकारी मिली, जिसके बाद हरकत में आई पुलिस ने उसे दबोच लिया।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने बताया कि सलीम के घर से बरामद पिस्टल को बैलेस्टिक जांच के लिये फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। इससे यह पुष्टि हो सकेगी कि चंदन की हत्या में आरोपी सलीम ने इसी पिस्टल का प्रयोग किया था या नहीं।

रुष्टयहृह्रङ्ख (31 छ्वड्डठ्ठ): इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कासगंज में गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा की जांच एनआईए से कराने की मांग ठुकरा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मृतक चंदन के परिवारीजनों को पचास लाख रुपये का मुआवजा देने व शहीद का दर्जा देने के संबध में कोई आदेश देने से इंकार कर दिया। यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस अब्दुल मोईन की बेंच ने बीजेपी पार्षद दिलीप कुमार श्रीवास्तव एवं बीजेपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नीरज शंकर सक्सेना एवं सामाजिक कार्यकर्ता ममता जिंदल की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया।

याचीगणों की ओर से बहस करते हुए वकील हरिशंकर जैन का कहना था कि देश में तमाम पाकिस्तानी- बांग्लादेशी नागरिक गैरकानूनी तरीके से रह रहें है और ये लोग देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। कासगंज में हिंसा भड़काने का काम ऐसे ही देश विरोधी तत्वों ने किया है जिसकी जांच एनआईए से जरूरी है। याचीगणों की ओर से कासगंज हिंसा में मारे गए अभिषेक गुप्ता उर्फ चंदन के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई थी। तर्क दिया गया कि प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक के मरने पर राज्य सरकार ने उनके परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा एवं एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी थी तथा गौरक्षकों के हाथों जान गंवाने वाले अखलाक के परिवार को चालीस लाख रुपए मुआवजा, एक फ्लैट और सरकारी नौकरी दी गयी थी तो तिरंगा यात्रा के दौरान मरने वाले दोनों युवाओं के परिवारीजन को भी उसी के अनुरूप बिना किसी भेदभाव के मुआवजा और अन्य राहत मिलनी चाहिए। यह भी मंाग की गयी कि मृतकों को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि सरकार स्वयं मामलें में गंभीर है और आवश्यक कार्यवाही कर रही है। मुआवजा भी दिया गया है। इसलिए, केस की जांच एनआईए से कराने का कोई औचित्य नहीं है.

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