व्‍यापारियों की हुंकार से पूर्व राजनिवास से मिला भरोसा, जल्‍द होगा सीलिंग का इलाज

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सीलिंग से झुब्‍ध दिल्‍ली के व्‍यापा‍री सड़क पर उतरे कि उससे पहले उपराज्‍यपाल और दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने उनको इस मामले में जल्‍द समाधान का भरोसा दिलाया है। दिल्‍ली में सीलिंग पर मचे सियासी घमासान के बीच अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि व्‍यापारी केजरीवाल और एलजी के भरोसे पर कितना यकीन करते हैं।

सीलिंग से त्रस्त व्यापारी बुधवार को रफी मार्ग स्थित कंस्टीट्यूशनल क्लब में महापंचायत करने का ऐलान किया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के बैनर तले 600 ट्रेड एसोेसिएशन शामिल होंगी। इसमें सीलिंग रोकने के लिए आगे की रणनीति बनाई जाएगी। दिल्ली बंद करने को लेकर भी निर्णय होगा। व्‍यापारियों का कहना था कि यदि सरकार इस अ‍वधि तक समस्‍या का समाधान नहीं कर पाती तो वह सड़कों पर अपना आंदोलन शुरू करेंगे।

उधर, राजधानी में चल रही सीलिंग की कार्रवाई के मसले पर बुधवार शाम को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की। उन्होंने उपराज्यपाल को बताया कि कई जगहों पर बिना आर्डर दिखाए सीलिंग की जा रही है, मनमानी हो रही है।

इसके बाद केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि सीलिंग के मसले पर केंद्र सरकार से बात हुई है। इस मुद्दे पर जल्द सामाधान निकाला जाएगा। उपराज्यपाल ने कहा कि सीलिंग को लेकर केंद्र सरकार काफी गंभीर है, जल्द कुछ उपाय निकाला जाएगा।

इससे पहले भी उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार और आप विधायकों को यह भरोसा दिया था कि सीलिंग के मसले को सुलझाने के लिए कई उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी है। पिछले दिनों आम आदमी पार्टी (आप) विधायक सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल के नाम एक पत्र लिखा था, जिसमें सीलिंग बंद करने का जिक्र था।

29 जनवरी को उपराज्यपाल अनिल बैजल ने आप विधायक के पत्र का जवाब देते हुए कहा था कि वह सीलिंग के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें। उन्होंने यह भी कहा था कि सभी पहलुओं को समझने के लिए दुकानदारों व व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें हुई हैं। इस विषय पर सभी न्यायिक आदेशों एवं मौजूदा कानूनों को ध्यान में रखते हुए, संकट से उबरने के सभी संभावित समाधानों का पता लगाया जा रहा है।

दिल्ली की 351 सड़कों को अधिसूचित किए जाने की अड़चनों की जानकारी लेने के लिए दिल्ली विधानसभा की विशेष समिति द्वारा बुलाई गई बैठक में तीनों निगम इन 351 सड़कों के सर्वे को लेकर उलझे दिखे। समिति के सामने पेश हुए तीनों निगम आयुक्तों ने साफ कहा कि वे दस्तावेजों के बगैर जांच किए सर्वे रिपोर्ट पर अपनी मुहर नहीं लगा सकते।

हालांकि निगम आयुक्तों ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। जैसे ही वह सभी दस्तावेज जांच लेंगे वे सर्वे रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगा देंगे। समिति ने तीनों निगम आयुक्तों को सोमवार तक सर्वे रिपोर्ट को जांचने का कार्य पूरा करने के लिए समय दिया है। वैसे इस तारीख तक भी यह कार्य पूरा हो सकेगा। इसके लिए निगम आयुक्तों ने समय निर्धारित नहीं किया है।

बता दें कि 351 सड़कों के अधिसूचित नहीं हो पाने पर दिल्ली की आप सरकार और निगमों में सत्तासीन भाजपा एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इस मामले की सत्यता जानने के लिए दिल्ली विधानसभा की विशेष समिति ने बुधवार को तीनों नगर निगमों के आयुक्तों को तलब किया था।

नगर निगम उत्तरी के आयुक्त मधुप ब्यास, नगर निगम दक्षिणी के आयुक्त पुनीत गोयल व नगर निगम पूर्वी के आयुक्त डा. रणबीर सिंह पहुंचे थे। समिति की बैठक में दिल्ली सरकार की शहरी विकास सचिव रेनू शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार तीनों नगर निगमों से 351 सड़कों के 2007 में किए गए सर्वे को सत्यापित करने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि तीनों निगम आयुक्तों से कहा गया है कि वे यह सत्यापित कर दें कि जो सर्वे किया गया है। वह मास्टर प्लान 2021 के अनुसार किया गया है और इस सर्वे से वे संतुष्ट हैं। इस पर तीनों निगम आयुक्त पीछे हटते दिखे। नगर निगम पूर्वी और दक्षिणी के आयुक्तों ने साफ तौर पर कहा कि दस साल पुराने सर्वे को वह बगैर जांच किए संतुष्ट कैसे हो सकते हैं।

इन आयुक्तों ने कहा कि उस समय नगर निगम एक था। अब निगमों के जोनों की सीमाओं में बदलाव हुआ है। पुराना रिकार्ड ढूंढने में समस्या आ रही है। मगर फिर भी वे इस ढूंढ कर जांचने के प्रयास में हैं। इस पूरे मामले पर हुई बैठक के बाद समिति ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि तीनों निगम आयुक्त सर्वे रिपोर्ट को सत्यापित करने से बच रहे हैं। समिति ने कहा कि यदि अगली बैठक में भी आयुक्तों का यही रवैया रहा तो निगम आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

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