शतरंज में महिलाएं पुरुषों के खिलाफ करती हैं अच्छा प्रदर्शन

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शतरंज के खेल में महिलाएं पुरुष विपक्षी के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन करती हैं. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है.

क्या कहती है रिसर्च-
जर्नल साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित शोध से यह पता चलता है कि प्रतिस्पर्धा के दौरान महिला खिलाड़ियों को अपनी शतरंज की क्षमता के प्रति मौजूद नकारात्मक धारणाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता.

शतरंज के 1,60,000 खिलाड़ियों और 50 लाख से अधिक मैच से ली गई जानकारी यह दर्शाती है कि अपनी आधिकारिक रेटिंग के आधार पर महिलाएं अपने पुरुष समकक्षों के खिलाफ अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
शेफील्ड विश्वविद्यालय के टॉम स्टैफोर्ड ने कहा कि यह महिला शतरंज खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है. भले ही भेदभाव वास्तविक और व्यापक हो लेकिन टूर्नामेंट शतरंज खेलने वाली महिलाओं को पुरुषों के साथ जोड़े जाने पर नुकसान नहीं होता.

कैसे की गई रिसर्च-
इस तथ्य की जांच के लिए शोधकर्ताओं ने जनवरी 2008 से अगस्त 2015 के बीच होने वाले शतरंज के मानक टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के बीच खेले गए मैचों के आंकड़ों का विश्लेषण किया.

विश्लेषण के लिए 1,50,977 पुरुषों और 16,158 महिलाओं द्वारा खेले गए 55,58,110 मैचों के आंकड़े लिए गए.

रिसर्च के नतीजे-
कुल मिलाकर पुरुषों की औसत एफआईडीई रेटिंग महिलाओं की तुलना में अधिक रही, लेकिन खेल के परिणामों ने संकेत दिया कि खिलाड़ियों की रेटिंग के अनुसार महिलाएं, पुरुषों के खिलाफ अपेक्षाकृत अधिक मैच जीतती हैं.

स्टैफोर्ड ने कहा कि यह निष्कर्ष बताते हैं कि प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक तथ्य हर समय उपस्थित नहीं हो सकते. शतरंज के टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं का प्रदर्शन रूढ़िवादी विचारों की बजाए अन्य मानकों पर निर्भर करता है.

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