बिहार : गरीब-किसान को लोन देने में उदारता बरतें बैंक, सुधरेगी सूबे की सूरत : सुशील मोदी

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पटना : राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने और इसकी सूरत को बदलने में बैंकों की भूमिका अहम है. अगर बैंक गरीब, किसान और कमजोर वर्ग के लोगों को उदारता पूर्वक लोन देने लगे तो इन लोगों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में काफी मदद मिलेगी. डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने

बैंकों को यह सुझाव देते हुए कहा कि कृषि, पशुपालन समेत सभी प्राथमिक सेक्टर में लोन देने के लिए बैंक वाले उदार बनें. वित्त मंत्री शुक्रवार को नाबार्ड के स्टेट क्रेडिट सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान कृषि समेत सभी प्राथमिक क्षेत्र में लोन देने के लिए बैंकों को एक लाख 22 हजार 328 करोड़ रुपये का टारगेट रखा गया है.

वर्तमान में राज्य के बैंकों में ऋण देने की क्षमता (क्रेडिट पोटेंशियल) एक लाख 22 हजार करोड़ की है. फिर भी बैंकों का सीडी रेसियो (साख-जमा अनुपात) 45 फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाया है.

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बैंकों को लोन देने का लक्ष्य

कुल क्रेडिट लक्ष्य : 1.22 लाख
कृषि : 69, 494
डेयरी : 4, 188
मुर्गी पालन : 1,667
पशु पालन : 917
शिक्षा : 7,003
आवास : 8,258
मध्यम, लघु व छोटे उद्योग : 23,697
गैर-पारंपरिक ऊर्जा : 707

दिये गये ऋण में 98 फीसदी की रिकवरी

उन्होंने कहा कि बैंकों को एक लाख 10 हजार करोड़ ऋण देने का लक्ष्य दिया गया. साथ ही राज्य का बजट एक लाख 60 हजार करोड़ का है. दोनों को मिलाकर बाजार में प्रति वर्ष दो लाख 70 हजार करोड़ रुपये का फ्लो हो रहा है.

इसका लाभ आम लोगों की आमदनी में भी दिखना चाहिए. राज्य में मौजूद सभी स्वयं सहायता समूह (एसएसजी) को दिये गये ऋण में 98 फीसदी की रिकवरी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि गरीब कर्ज लौटाने में ज्यादा ईमानदार होते हैं. बड़ी संख्या में रुपये अमीरों के पास ही डूबते हैं. राज्य में पहली बार गैर-रैयत जमीन वाले किसानों के लिए भी धान बेचने की व्यवस्था की गयी है

मछलीपालन उद्योग में काफी संभावना

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में जितनी संख्या में जल कर हैं, उतने अन्य किसी राज्य में नहीं हैं. ऐसे में यहां मछलीपालन उद्योग को व्यापक स्तर पर स्थापित करने की संभावना काफी प्रबल है. इसी तरह कृषि के क्षेत्र में भी ग्रोथ की काफी संभावना है. ऐसे में किसानों को बैंक खुलकर ऋण देना शुरू कर दें.

अधिकतर यह देखा जाता है कि बैंक वाले प्राथमिक क्षेत्र में ही लोन देने में काफी कोताही बरतें हैं. समीक्षा के दौरान यह बात भी सामने आयी है कि एग्रीकल्चर से होने वाली आमदनी में कमी आयी है, लेकिन इस क्षेत्र में ऋण का भार लगभग दोगुना हो चुका है.
प्राथमिक क्षेत्र में 2.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है. उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार गैर-रैयत जमीन वाले किसानों के लिए भी धान बेचने की व्यवस्था की गयी है. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर लागत का डेढ़ गुणा कर दिया गया है.

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