अमेरिकी बॉन्ड में इजाफा, एलटीसीजी पर अमल और आरबीआई पर होगी नजर

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शुक्रवार को अमेरिकी शेयर में भारी गिरावट और बॉन्ड कीमतें में नरमी को देखते हुए बाजार में काम करने वाले इस हफ्ते की शेयर बाजार की संभावित चाल को लेकर चिंतित हैं। 10 वर्षीय बेंचमार्क ट्रेजरी नोट का प्रतिफल 4 साल की ऊंचाई को छू गया क्योंकि महंगाई के डर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से दरों में आक्रामक बढ़ोतरी से निवेशकों को परेशानी में डाला। देश में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में इजाफे ने भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत रुख पर चिंता पैदा की है, जिसका बैंंकिंग शेयरों पर असर होगा और इन शेयरों का बाजार में खासा भारांक है। लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर की फिर से बहाली और म्युचुअल फंड निवेशकों पर उच्च कर ने निवेशकों की धारणा नकारात्मक कर दी है।

यूबीएस के शोध प्रमुख गौतम हौहडिय़ा ने कहा, ‘इस समय बाजार का मूल्यांकन काफी ज्यादा है और गिरावट के बावजूद जोखिम-प्रतिफल आकर्षक नहीं आ रहे हैं। तीन साल से कम समय के लिए निवेश करने वाले इक्विटी में अपना निवेश शायद कम करना चाहेंगे।’ हौहडिय़ा को आय के मोर्चे पर बहुत ज्यादा सुधार की उम्मीद नहीं है और उनका कहना है कि आय में सुधार वित्त वर्ष 2019 में होगा।

बीएनपी पारिबा सिक्योरिटीज के एशिया प्रमुख मनीषी रायचौधरी ने कहा, ‘बजट पूर्व तेजी के बाद निराशाजनक स्थिति, खासतौर से एलटीसीजी के लागू होने के बाद हमें निकट भविष्य में गिरावट की संभावना नजर आ रही है। इसके अतिरिक्त भारत का प्रीमियम मूल्यांकन लंबी अवधि के औसत से ऊपर है।’

निवेशकों को शुक्रवार को भारी झटका लगा क्योंकि बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स व निफ्टी 2.3 फीसदी फिसल गया। बाद में डॉ जोन्स इंडस्ट्रियल ऐवरेज ने जून 2016 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की और 650 अंक से ज्यादा टूट गया, जब ट्रेजरी प्रतिफल तीन फीसदी के आसपास आ गया। विशेषज्ञों ने कहा, ‘अल्पावधि के लिहाज से बाजार में गिरावट का दबाव बना रह सकता है क्योंकि जोखिम प्रीमियम में बदलाव से निवेशक इक्विटी से बॉन्ड की ओर जा रहे हैं।’

एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्यू हॉलैंड ने कहा, ‘यह मामला उससे जुड़ा है कि कौन सी चीज नकदी के बुलबुले को फोड़ेगी। बॉन्ड की कीमतें घटनी शुरू हो गई है और यह चिंता की बात है। आने वाले समय में काफी उतारचढ़ाव होने जा रहा है और वास्तविक दिक्कत मिडकैप व स्मॉलकैप में होगी।’ विशेषज्ञों ने कहा कि एलटीसीजी के क्रियान्वयन के तरीके के चलते सुधार की कोई कोशिश 31 जनवरी के स्तर पर सीमित हो सकती है।

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