औंधे मुंह गिरे शेयर बाजार, सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे, निफ्टी 350 अंक लुढ़का

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शेयर बाजार में मंगलवार को भी भारी गिरावट का दौर सुबह सुबह दिखाई दिया. सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे खुला तो निफ्टी भी 350 से ज्यादा अंक नीचे कारोबार कर रहा था. बता दें कि सेंसेक्स 800 अंकों की गिरावट के साथ खुला था. भारतीय शेयर बाजारों में यह गिरावट की वजह माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट. जानकारों का मानना है कि निवेशकों को सोच समझकर बाजार में फिलहाल निवेश करना चाहिए. उनका कहना है कि अभी गिरावट का दौर जारी और यह दौर कुछ दिन और चल सकता है, इसलिए सभी को समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाना चाहिए. फिलहाल सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही लगभग 3.34 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा था कि बाजार में लगातार जारी गिरावट की वजह आम बजट में शेयरों में कमाई पर दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर लगाया जाना नहीं बल्कि वैश्विक कारक हैं. जेटली का बयान ऐसे समय में आया, जब शेयर बाजार में नवंबर 2016 के बाद से शुक्रवार को सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई थी. आम बजट 2018-19 में शेयरों से कमाई पर एलटीसीजी कर दोबारा लगाए जाने के ऐलान के बाद बाजार लुढ़के थे. शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स में 800 अंकों से अधिक की एकदिनी गिरावट हुई थी जबकि निफ्टी सूचकांक में 200 से अधिक गिरावट दर्ज की गई थी.

1 फरवरी को मोदी सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट पेश किया. बजट के कुछ प्रस्तावों को लेकर निवेशकों की चिंता तथा वैश्विक स्तर पर बिकवाली से शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला सोमवार को लगातार पांचवें दिन जारी रहा तथा सेंसेक्स 310 अंक टूटकर 34,757.16 अंक के तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया था. निफ्टी में भी 94 अंक की गिरावट आई थी और यह 10,667 अंक पर आ गया. पिछले सप्ताह बजट में सरकार ने शेयरों पर 10 प्रतिशत का पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन टैक्‍स) लगाने का प्रस्ताव किया है. इससे निवेशक चिंतित हैं. इसके अलावा राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने से भी बाजार धारणा प्रभावित हुई है.

एक फरवरी को बजट पेश होने के बाद से सेंसेक्स तीन सत्रों में 1,208 अंक से अधिक नीचे आ चुका है. वहीं निफ्टी 361 अंक टूटा है. ब्रोकरों ने कहा कि निवेशकों ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा से पहले सतर्कता का रुख अपनाया हुआ है. उनका मानना है कि मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंता की वजह से केंद्रीय बैंक रेपो दर बढ़ा सकता है.

वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई, जबकि शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी नीचे चल रहे हालांकि, सरकार ने सोमवार को बजटीय प्रस्तावों लेकर चिंता को नजरअंदाज करते हुए कहा कि शेयरों में गिरावट वैश्विक बाजारों के रुख की वजह से है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘बांड प्राप्ति तथा कमजोर वैश्विक बाजारों से यहां बिकवाली का सिलसिला जारी है. बाजार की निगाह अब रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक पर है. हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखेगा, लेकिन सरकार की राजकोषीय नीतियों पर किसी तरह की टिप्पणी से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.’’

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