बिहार : CM नीतीश कुमार ने कहा, कोई गलतफहमी न पालें, 2019 में एनडीए की ही बनेगी सरकार

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2019 में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की ही सरकार बनने का दावा किया है. सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद प्रेस काॅन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि किसी को कोई गलतफहमी पालने की जरूरत नहीं है. 2019 में भाजपा के नेतृत्व में जो गठबंधन है, उसे ही सफलता मिलने वाली है. लोगों को कुछ-कुछ होने लगता है.

मन में कोई बात आ जाती है, यह उनका अधिकार है. लेकिन लोकसभा चुनाव में सफलता भाजपा नेतृत्व को ही मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर मैंने पहले ही कई बार कहा था कि वहां भाजपा की ही सरकार बनेगी. जिस राज्य के प्रधानमंत्री हैं, वहां की जनता प्रधानमंत्री के दल को छोड़ किसी दूसरी पार्टी को वोट नहीं दे सकती है.

गुजरात में वैसा ही हुआ और वहां 48-49% वोट भाजपा को मिले. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को केंद्रीय बजट (2018-19) में उम्मीद से ज्यादा मिला है. टैक्स के आधार पर केंद्र राज्यों को जो राशि आवंटित करेगी, वह सरकार ने जितना सोचा था उससे ज्यादा है. केंद्र सरकार ने 76 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. साथ ही केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं की राशि अलग से होगी, जिसे राज्यों को दिया जायेगा. बिहार में जीएसटी नयी प्रणाली है और इसे लागू किया जा रहा है. इस साल अगर नुकसान होगा तो अगले साल केंद्र सरकार इसकी भरपाई करेगी.
जीएसटी के लागू होने का मतलब टैक्स बढ़ाना-घटाना नहीं है, जो भी परिवर्तन होगा वह केंद्र-राज्य की गठित कमेटी में ही होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के समय जो वादा किया था कि किसानों को फसल लागत में 50 फीसदी मुनाफा जोड़ कर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जायेगा. केंद्र सरकार उसे अब पूरा कर रही है और इससे किसानों का लाभ मिलेगा. साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में 10 करोड़ परिवारों का हेल्थ बीमा कराया जायेगा. इसमें वे पांच लाख रुपये तक का इलाज करा सकेंगे.

सरकारी अस्पतालों में तो पहले से मुफ्त में इलाज होता है. अब वे प्राइवेट अस्पतालों में भी आसानी से इलाज हो सकेगा. नोटबंदी के फ्लॉप शो के सवाल पर उन्होंने कहा कि काले धन पर सिर्फ नोटबंदी से काम नहीं चल सकता था. मैंने बेनामी संपत्ति पर चोट की बात कही थी और इस पर काम हो रहा है.

सांसदों का वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव सही
जनप्रतिनिधियों के दर्द और आ‌वश्यकताओं को समझें

मुख्यमंत्री ने सांसदों के वेतन बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, सांसदों का वेतन बढ़ाने के लिए पॉलिसी की बात की गयी है. ऐसा होना चाहिए. जब सरकारी कर्मियों का हर 10 साल में पे-रिविजन होता है तो जनप्रतिनिधियों का भी होना चाहिए. जनप्रतिनिधि जब क्षेत्र में जाते हैं तो सब उनकी आवभगत में लग जाते हैं. चाय से लेकर नाश्ता-खाना की व्यवस्था करते हैं.

ऐसे में जब क्षेत्र के लोग सांसद के घर आते हैं तो उन्हें भी लोगों की चाय-नाश्ता की व्यवस्था करनी होती है. ऐसे में जब वेतन ही कम रहेगा तो वह बाह्य स्रोत से पैसा लाकर खर्च करेगा तो वह भटकेगा. जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र से आये लोगों का स्वागत चाय से भी नहीं कर सकेगा तो उसकी क्या स्थित होगी. इसलिए जिसे चुनते हैं उसके दर्द और आवश्यकता को भी समझें.

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