भारत का नाम लिए बगैर चीन ने कहा, मालदीव में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ

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नई दिल्ली
मालदीव में चल रहे राजनीतिक संकट पर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने बुधवार को कहा कि वह मालदीव संकट को लेकर किसी भी बाहरी दखल के खिलाफ है। माना जा रहा है कि चीन ने यह बयान भारत को ध्यान में रखते हुए दिया है। क्योंकि मालदीव के विपक्ष के नेता ने अपने देश में लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए भारत से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा था।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने अपने बयान में भारत का नाम लिए बगैर कहा, ‘मालदीव की संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में कोई भी रचनात्मक कदम नहीं उठाना चाहिए। ऐसे करने से मालदीव की स्थिति और बिगड़ सकती है।’ मालदीव के चीन के साथ फ्री ट्रेड अग्रीमेंट साइन करने का वहां के विपक्ष के नेता ने विरोध किया था। हिंद महासागर में अपनी दखल बनाए रखने के लिए चीन ने मालदीव में काफी बड़ा में निवेश किया है, जिसे लेकर भारत चिंतित है।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्ष के नेता मोहम्मद नशीद ने ट्वीट कर कहा, ‘भारत को सैन्य हस्तक्षेप करते हुए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन द्वारा गिरफ्तार कराए गए जजों और विपक्ष के नेताओं को आजाद कराना चाहिए।’ बता दें कि राजनीतिक संकट के बीच यामीन ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गय्यूम और सुप्रीम कोर्ट के जजों को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद यह राजनीतिक संकट शुरू हुआ था।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश को उसकी समस्याएं बगैर बाहरी हस्तक्षेप के हल करने देनी चाहिए। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘मैंने साफ-साफ अपनी बात कही है। हमें उम्मीद है कि मालदीव में संबंधित पार्टियां चर्चा के जरिए अपनी समस्याएं दूर कर सकती हैं। हमें आशा है कि वे अपनी परेशानियों को दूर करने में सक्षम हैं।’
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मालदीव की विपक्षी पार्टियों का कहना है कि राष्ट्रपति यामीन चीन के समर्थन की वजह से ऐसा कदम उठा रहे हैं। उन्होंने चीन के साथ फ्री ट्रेड अग्रीमेंट साइन किया है और देश में चीन के कई प्रॉजेक्टों को मंजूरी दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘चीन मालदीव के साथ दोस्ताना संबंध रखता है। इसमें एफटीए भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के हित जुड़े हैं। यह तथ्य है कि एफटीए साइन होने के बाद दोनों देशों के लोगों को इसका फायदा मिल रहा है। मालदीव के वर्तमान स्थिति इसका आंतरिक मामला है। चीन दूसरों के आंतरिक मामलों में बाह्य हस्तक्षेप नहीं करने के सिद्धांत का पालन करता है।’

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