जर्सी का रंग बदलते ही बदल गई साउथ अफ्रीकी टीम की रंगत

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भारत के खिलाफ छह मैचों की सीरीज में साउथ अफ्रीकी टीम 0-3 से पीछे थी। मेजबान टीम सीरीज गंवाने की दहलीज पर थी लेकिन चौथे वनडे में अचानक से सबकुछ बदल गया। जर्सी का रंग बदलते ही उनकी रंगत भी बदल गई। अभी तक डिफेंसिव नजर आई मेजबान टीम ने अपनी रणनीति बदली और अटैक किया। उन्होंने अपने अटैकिंग खेल से चौथे वनडे में ‘कलाइयों के जादूगरों’ को बैकफुट पर भेज दिया।

ये संकेत भारतीय टीम के लिए अच्छे नहीं हैं। 2010-11 में भी एमएस धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने पांच वनडे मैचों सीरीज में 2-1 की शुरुआती बढ़त बना ली थी, लेकिन साउथ अफ्रीकी टीम ने वापसी कर वह सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली थी। एक बार फिर साउथ अफ्रीकी टीम ने काउंटर अटैक किया है।

‘पिंक डे’ मैच का पहली बार आयोजन 2011 में हुआ था और यह छठा पिंकडे मैच था। साउथ अफ्रीका ने इससे पहले अपने सारे ‘पिंक डे’ मैचों में जीत हासिल की थी। पिछले पांच में से एक मुकाबला भारत में भी हुआ था, जिसमें उसने 141 रन से जीत हासिल की थी। यह वह आंकड़ा था जो उनके मनोबल को उठाने के लिए काफी था। पिंक डे फैक्टर फिर काम कर गया और सीरीज के चौथे मैच में भारत को हराकर साउथ अफ्रीका ने पिंकडे वनडे में नहीं हारने के अपने रेकॉर्ड को बरकरार रखा।

डकवर्थ लुईस नियम लगने के बाद जीत हासिल करने के लिए साउथ अफ्रीका के पास बड़े शॉट्स लगाने के अलावा कोई चारा नहीं था। ऐसे में उनके आउट होने की भी संभावना थी, लेकिन भारतीय फील्डर्स ने कैच टपकाकर और गेंदबाजों ने कई नो और वाइड बॉल फेंककर उनका साथ दिया। खतरनाक डेविड मिलर का एक बार कैच टपकाया और फिर जब वह बोल्ड हुए तो चहल की वो बॉल नो-बॉल घोषित हो गई। मिलर को दो बार जीवनदान देकर भारत ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।

कुछ दिनों पहले तक जो खिलाड़ी साउथ अफ्रीका की ओर से खेलने के सपने देख रहा था, वह अपने दूसरे इंटरैशनल मैच में ही टीम की जीत का नायक बन गया। हेनरिक क्लासेन ने अपनी मैच जिताऊ पारी के दौरान कुछ ऐसे शॉट लगाए, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान था। चहल की एक बॉल को उन्होंने पहले से ही लेग साइड में उड़ाने की सोच रखी थी।

इसके लिए वह ऑफ स्टंप पर पूरी तरह से बाहर आ गए और ऑफ साइड में जा रही शर्तिया वाइड बॉल को उड़ाकर स्क्वॉयर लेग पर चौके के लिए भेज दिया। इसके बाद तो क्लासेन खुल गए और चढ़कर खेले। उन्होंने मिलर के साथ मिलकर 43 बॉल पर 72 रन की पार्टनरशिप कर डाली जो उनकी जीत की एक मुख्य वजह बनी।

अभी तक साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों के लिए हौवा बने हुए युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की स्पिन जोड़ी की इस मैच में जमकर धुलाई हुई। इस जोड़ी ने शुरुआती तीन वनडे मैचों में 10.47 के ऐवरेज 30 में से 21 विकेट चटकाए थे। लेकिन इस मैच में चहल ने 5.3 ओवर में एक विकेट के बदले 68 रन लुटाए, वहीं कुलदीप ने 6 ओवर में 2 विकेट के बदले 51 रन दिए।

इस जोड़ी ने 11.3 ओवर में 3 विकेट के बदले 119 रन लुटाए। अब सीरीज का अगला वनडे मैच पोर्ट एलिजाबेथ के उस ग्राउंड पर है, जहां पेसर्स का ही बोलबाला रहा है। उस मैदान पर टॉप 20 विकेट लेने वाले में इकलौते स्पिनर शेन वॉर्न हैं, जोकि 20वें स्थान पर हैं। ऐसे में उस पिच पर स्पिन अटैक के साथ उतरने की अपनी स्ट्रैटिजी पर भारत को दोबारा विचार कर लेना चाहिए।

चोट की वजह से शुरुआती तीन वनडे नहीं खेल सके साउथ अफ्रीका के धुरंधर बल्लेबाज एबी डिविलियर्स की चौथे वनडे में वापसी ने साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजी क्रम के लिए संजीवनी का काम किया। एबी (18 बॉल पर 26 रन) की पारी बड़ी नहीं रही, लेकिन उन्होंने भारतीय स्पिनर्स से लड़ने का मंत्र बाकी बल्लेबाजों को बता दिया।

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने एबी के मैदान पर आने पर एक छोर से युजवेंद्र चहल को अटैक पर लगाए रखा लेकिन एबी ने क्रीज पर लगातार शफल करके चहल की लाइन-लेंथ को बिगाड़ दिया। एबी की मौजूदगी का असर यह हुआ कि अभी तक सीरीज में हमेशा अटैक करते नजर आए चहल डिफेंसिव हो गए। और यहीं से साउथ अफ्रीका को पहली बार भारतीय स्पिन से लड़ने की ताकत मिली।

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