बैंकों के 10 लाख करोड़ के फंसे कर्ज से निपटने के लिए RBI ने जारी किये नए नियम

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को बड़े बैंकों के एनपीए को हल करने के लिए समय सीमा तय करके बैड लोन प्रस्ताव के लिए नियमों को कड़ा कर दिया. इसके तहत बैंकों को इन खातों को दि‍वालि‍या कार्यवाही के तौर मानना अनि‍वार्य हो जाएगा. इसके अलावा आरबीआई ने आरबीआई ने SDR और S4A जैसी मौजूदा डेट रीस्‍ट्रक्‍चरिंग स्‍कीमों को भी वापस ले लि‍या है.
बड़े खाते मुख्यतः उन बैंकों के लिए हैं जहां बैंकों ने रिज़ॉल्यूशन शुरू किया है और उन्हें पुनर्गठित मानक संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. भारतीय बैंकों का लगभग 10 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज फंसा है.
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नए नियमों के अनुसार ऐसे खातों के लिए जहां बैंकिंग क्षेत्र का कुल निवेश 2,000 करोड़ रुपये से ऊपर है, कोई कंपनी दिवालिया हो चुकी है तो 180 दिन के भीतर उसे बंद करने का निर्णय भी लिया जा सकता है. इसके अलावा दूसरे जो एनपीए हैं उन पर भी 6 महीने के भीतर प्लान सौंपा जाएगा.
यह सर्कुलर ऐसे समय आया है जब जब बैंक आरबीआई के पहले डिफॉल्टर सूची में इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी के तहत 12 में से 11 खातों पर कार्रवाई को अंतिम रूप दे रहे हैं. केंद्रीय बैंक ने बैंकों को चेतावनी दी है कि उन्हें समयसीमा का पालन करने में विफल रहने के लिए दंडित किया जाएगा.

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