राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन : नीतीश के बाद सुमित्रा महाजन का संबोधन, कहा-उपभोग शून्य आदमी को मिले सत्ता

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पटना : राजधानी पटना में आज से छठा भारत प्रक्षेत्र राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन शुरू हो गया है. सम्मेलन के शुरू होते ही विवाद भी शुरू हो गया है. मंच पर बैठे हुए देश-विदेश के जनप्रतिनिधियों ने देखा कि कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. जिस वक्त हंगामा शुरू हुआ, उस वक्त मंच से सुशील मोदी का संबोधन चल रहा था. बाद में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने जनप्रतिनिधियों से यहां तक कहा कि जिन्हें यह कार्यक्रम पसंद नहीं आ रहे हैं, वह यहां से चले जाएं.

पटना के ज्ञान भवन में दीप प्रज्वलित कर इस सम्मेलन की विधिवत शुरुआत हुई है. ज्ञान भवन के आसपास सुरक्षा की सख्त व्यवस्था की गयी है. गांधी मैदान के राउंड में चप्पे-चप्पे पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी है.

कार्यक्रम की शुरुआत में जैसे ही सुशील कुमार मोदी ने अपने संंबोधन में भ्रष्टाचार और मुख्यमंत्रियों के साथ लालू के जेल में जाने की बात कही, उसके बाद राजद के विधायक भड़क उठे और हंगामा शुरू कर दिया. उन्होंने इसका विरोध किया और बताया कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है. राजद नेता शक्ति यादव ने कहा कि सुशील मोदी नीरव मोदी का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं. राजद का कहना है कि उनके नेता का नाम जानबूझकर उछाला जा रहा है. वहीं दूसरी ओर जदयू के नेता अजय आलोक ने कहा कि राजद नेताओं को ऐसा लग रहा था कि इतने बड़े कार्यक्रम का क्रेडिट नीतीश कुमार नहीं ले लें, इसलिए उन्होंने हंगामा किया और बिहार की छवि को खराब करने का काम किया है.

इधर, हंगामा के बाद राजद के सभी जनप्रतिनिधि कार्यक्रम का बहिष्कार कर चुके हैं और नारेबाजी करते हुए ज्ञान भवन से बाहर निकल चुके हैं. ज्ञान भवन के पास हंगामा जारी है और राजद नेताओं का कहना है कि नीतीश और सुशील मोदी ने इसे राजनीतिक मंच बना दिया है. राजद नेता रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि वह लोग इस कार्यक्रम का बहिष्कार करते हैं. उन्होंने मीडिया से कहा कि सृजन घोटाला करने वालों के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ है. इसे राजनीतिक मंच बनाने का काम किया गया है. इनलोगों ने राष्ट्रमंडल कार्यक्रम का अपमान किया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गरीबी, अशिक्षा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, मुख्य विंदू है. उन्होंने कहा कि बिहार में हमलोग इसको ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं. जो आजादी की लड़ाई का नेतृत्व बापू ने किया. उनके विचार को लोहिया जेपी ने आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है. बिहार में विकास की पहल की है. केंद्रित तरीके से सिर्फ कुछ इलाकों का विकास होता है. हर इलाके के लोगों को विकास का लाभ मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह पर भी सबको बुलाया जाये. गांधी जी ने बिहार की स्थिति को देखा और पाया कि स्वच्छता और सफाई और स्वास्थ्य को लेकर कोई जागृति नहीं है. शिक्षा का कोई प्रसार नहीं है. गांधी चंपारण सत्याग्रह में लगे रहे . साथ-साथ उन्होंने सफाई और स्वच्छता के लिए शिक्षा के लिए प्रेरित किया और स्वास्थ्य के प्रति जागृति लाई. उस समय उन्होंने अपने अभियान से महिलाओं को जोड़ा. महिलाओं का विकास में भागीदारी जरूरी है. हमने महिलाओं की जागृति पर काम किया. हमने यहां पचास प्रतिशत महिलाओं को पंचायत चुनाव में आरक्षण दिया. अर्बन लोकल बॉडी में भी दिया. तीन बार हो चुका है चुनाव और पचास प्रतिशत आरक्षित है. महिलाएं पचास प्रतिशत से ज्यादा जीत भी रही है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीविका के मॉडल को हूबहू स्वीकार कर लिया. हमारा आठ लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप है. इतनी जागृति आ रही है महिलाओं में. बिहार के गांव में पढ़ी लिखी कम भी महिलाएं बैंक और बाकी चीजों के बारे में जान रही हैं. उनमें समाजिक तौर पर जागृति आ रही है. परिवार की आमदनी में सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए जागरूकता आ रही है. पुलिस में भी हमने 35 प्रतिशत आरक्षण दिया. पूरे बिहार में हरेक थाने में अलग से शौचालय की व्यवस्था कर दी गयी. बिहार में जितनी भी सेवाएं हैं, उनमें महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा. लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिल को पारित किया जाये. कहीं भी महिलाएं पीछे नहीं है. नारी सशक्तिकरण की दिशा में बिहार में अनेक पहल हुई है. हमने शराबबंदी महिलाओं के कहने पर लागू की. महिलाएं पहले तंग रहती थी. हमारे बिहार में बहुत शांति का माहौल है. यह सब काम हो रहा है. इस कदम से नारी सशक्तिकरण को बल मिला है.

21 जनवरी को मानव श्रृंखला बनी. दहेज प्रथा और बाल विवाह को समाप्त करने के लिए. 14 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी मानव श्रृंखला बनी है. उन्होंने कहा कि यहां शुकराना समारोह में लाखों लोग आये. यह बुद्ध की भूमि है. यह महावीर की भूमि है. यहां लोग आ रहे हैं, यहां पर्यटकों की संख्या घटी नहीं है और बढ़ गयी है. जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर भी ध्यान देना चाहिए. स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन , पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देना होगा.

नीतीश ने कहा कि पार्लियामेंट की सबसे बड़ी भूमिका है. आप लोग आये हैं, कोई कष्ट नहीं हो, सभी तरह के इंतजाम किया गया है. बिहार के बारे में तरह-तरह की बातें होती रहती हैं. बिहार के पुराने इतिहास पर सबको नाज होता है. गौरव के उसी स्थान को फिर से प्राप्त करना है. आजकल ज्यादातर लोग काम राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम करते हैं. हमलोग वोट की चिंता नहीं करते, हम वोट देने वालों की चिंता करते हैं. प्रकाश पर्व के आयोजन से छवि सुधरी. यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं.

लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश जी से आत्मीय संबंध है. नीतीश कुमार की राजनीतिक परिपक्वता और राजनीतिक सूझबूझ की कोई सानी नहीं. एक ऐसा मुख्यमंत्री बिहार को मिला है, जो सतत बिहार को न्याय के साथ विकास देने में लगे हुए हैं. ऐसे व्यक्ति को सत्ता मिलनी चाहिए जो उपभोग शून्य आदमी हो. उन्होंने कहा कि हर किसी को स्वच्छता और सफाई पर ध्यान देना चाहिए. बिहार में शराबबंदी तो एक बात है. महिलाओं को अधिकार देना है, उनके मूल समस्या को समझना है. मुख्यमंत्री ने एक जन आंदोलन खड़ा किया, शराबबंदी और दहेज प्रथा और बाल विवाह के प्रति लोगों की एकजुटता दिखायी दी और मानव श्रृंखला बनी.

हमारी जनकनंदीनी सीता की जन्मस्थली है. आज कर्पूरी जी की पुण्यतिथि है. यहां आर्यभट्ट, बाबा नागार्जुन के साथ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी हैं, जिन्होंने संस्कृति के क्षेत्र में बहुत काम किया. आज का जो विषय है, हमलोगों को संसदीय प्रणाली को टिकाऊ बनाना है. दूसरा विषय है कि हम लोकतंत्र को कैसे ताकत प्रदान कर सकते हैं. आज बिहार में यह हो रहा है. विश्व का पहला गणतंत्र बिहार में था वैशाली. ऐसे जगह पर हम लोकतंत्र पर विचार करेंगे. लोकतंत्र के अलग-अलग खंभे, जिसमें एक न्यायपालिका भी है.

लोकतंत्र कैसे बेहतर तरीके से चले और खड़ा रहे और इसके सभी स्तंभों में संतुलन भी जरूरी है. इस पर भी चर्चा होगी. किस प्रकार सबका सहयोग लेकर इसे किया जा सकता है. कानून बनाने से नहीं होगा, योजनाओं का जमीन पर जाना जरूरी है. लोक जागरण जरूरी है. इसके लिए जनप्रतिनिधि को सोचना जरूरी है. सरकार से मिलने वाला पैसा जन-जन तक पहुंचना तो चाहिए. हमने लोकसभा में एक बात चलायी. हमने स्पीकर्स रिसर्च इनिशियेटिव शुरू किया. विशेषज्ञों को बुलाकर जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा करायेंगे और बाद में उसका प्रयोग अच्छा से कर सके. सरकार जनता की है. हमने अधिकारियों से कहा आप एनजीओ को गैर सरकारी संगठन कहने की जगह सामाजिक संस्था कहें.

तीन दिवसीय सम्मेलन में विकास एजेंडे में संसद की भूमिका और ‘विधायिका और न्यायपालिका-लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण स्तंभ विषयों पर चर्चा की जायेगी. सत्र में लोकसभा की प्राक्कलन समिति के सभापति डॉ. मुरली मनोहर जोशी, विधि एवं न्याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद दो पूर्ण सत्रों को संबोधित करेंगे. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कार्यकारिणी समिति की अध्यक्ष एमीलिया एम लिफाफा भी प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगी.

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