देश में बने लड़ाकू ड्रोन विमान रुस्तम-2 का सफल परीक्षण, लगातार 24 घंटे उड़ सकता है

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नई दिल्ली| देश में बने लड़ाकू क्षमता वाले ड्रोन विमान रुस्तम-2 का परीक्षण रविवार को सफल रहा। रुस्तम-2 ने कर्नाटक के…
देश में बने लड़ाकू ड्रोन विमान रुस्तम-2 का सफल परीक्षण, लगातार 24 घंटे उड़ सकता है
नई दिल्ली| देश में बने लड़ाकू क्षमता वाले ड्रोन विमान रुस्तम-2 का परीक्षण रविवार को सफल रहा। रुस्तम-2 ने कर्नाटक के चित्रदुर्गा में बने एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में पहली उड़ान भरी। इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने बनाया है। डीआरडीओ अफसरों के मुताबिक, टेस्ट में रुस्तम-2 सभी मानकों पर खरा उतरा। यह अमेरिकी प्रिडेटर ड्रोन की तरह काम करेगा। अभी तक भारत को इसके लिए अमेरिकी और इजरायली ड्रोन पर निर्भर रहना होता था।
2.4
मीटर ऊंचा
रुस्तम-2 ड्रोन एक मानवरहित विमान है।
22 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ेगा।
यह कम ऊंचाई पर भी उड़ान भर सकता है।
यह लगातार 24 घंटे तक उड़ सकता है।
यह रडार की पकड़ में भी नहीं आएगा। दुश्मन के ठिकानों पे हमले कर सकता है।
डीआरडीओ ने बनाया मानवरहित ड्रोन विमान
20.6
मीटर लंबा
250 किग्रा वजनी रुस्तम-2 निगरानी और लक्ष्य की पहचान करेगा
प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने महज 1540 करोड़ रुपए मंजूर किए थे
रुस्तम-2 करीब 250 किग्रा वजनी है। इसमें 3-ब्लेडेड एनपीओ सेटरन इंजन लगा है। यह 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। इसमें एक सिंथेटिक अपर्चर रडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, कम्युनिकेशन इंटेलिजेंस, अवेयरनेस पेलोड, मीडियम और लॉन्ग रेंज इलेक्ट्रो ऑप्टिक लगे हुए हैं। रुस्तम-2 किसी मिशन पर मेन्युअल और ऑटोनाॅमस मोड पर उड़ान भर सकता है। रुस्तम-2 के प्रोजेक्ट के लिए 2011 में महज 1540 कराेड़ रुपए मंजूर किए गए थे।
9.5
मीटर चौड़ा
350किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ेगा।
इसका नाम पूर्व वैज्ञानिक रुस्तम दमानिया के नाम पर पड़ा है
रुस्तम-2 का नाम पूर्व वैज्ञानिक रुस्तम दमानिया के नाम पर रखा गया है। 80 के दशक में रुस्तम दमानिया ने एविएशन की दुनिया में जो रिसर्च की, उससे देश को बहुत फायदा हुआ था। इस स्वदेशी विमान की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कम ऊंचाई पर उड़ते हुए भी दुश्मन को निशाना बना सकता है। रुस्तम द्वितीय को सैन्य मकसद के लिए तैयार किया गया है। रुस्तम-2 से सैन्य मिशन जैसे टोह, निगरानी, लक्ष्य की पहचान, संचार रिले, नष्ट हुई क्षमता का आकलन और सिग्नल इंटेलीजेंस में प्रयोग किया जा सकेगा।
रुस्तम सीरीज का यह चौथा ड्रोन है
रुस्तम-2 से पहले रुस्तम-1, रुस्तम-एच और रुस्तम-सी भी लॉन्च हो चुके हैं। इन्हें तीन सेवाओं के लिए तैयार किया गया है। पहला भारतीय ऑर्म्ड फोर्स के लिए सेवा, दूसरा खुफिया जानकारी और तीसरा निगरानी करता है।

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