बड़ा खुलासा: अपने बच्चों की शिक्षा पर लाखों खर्च कर रहे गरीबों के स्‍कूल उड़ाने वाले नक्सली

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बिहार में मुख्‍यत: गरीबा बच्‍चों की शिक्षा के माध्‍यम सरकारी स्‍कूलों को उउ़ाने वाले नक्‍सली अपने बच्चों की उच्च शिक्षा पर लाखों खर्च कर रहे हैं। यह रकम लेवी की वसूली से आ रही है।
पटना । गरीब बच्चों के स्कूल को विस्फोट से उड़ाने वाले नक्सली अपने बच्चों की उच्च शिक्षा पर लाखों खर्च कर रहे हैं। पूंजीवाद के खिलाफ हथियार उठाने वाले नक्सली काली कमाई के जोर पर अपने बच्चों का देश के निजी मेडिकल व इंजीनियरिंग संस्थानों में नामांकन करा रहे है। नामांकन के लिए ये लेवी के रूप में वसूली गई मोटी रकम का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में हुआ है।
नक्सलियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई करने वाली ईडी की टीम ने बीते दिन बिहार के बड़े नक्सली नेता प्रद्युम्न शर्मा के भाई प्रमोद शर्मा से जहानाबाद जेल में करीब छह घंटे तक उसकी काली कमाई के संबंध में पूछताछ की। पूछताछ के दौरान ईडी की टीम ने चेन्नई में मेडिकल की पढ़ाई कर रही प्रमोद शर्मा की बेटी के नामांकन के लिए उस संस्थान को ‘डोनेशन’ के रूप में दी गई 25 लाख रुपये की रसीद भी दिखाई। यह भी पता चला कि प्रमोद शर्मा के दो बेटे इन दिनों राजस्थान के कोटा में रहकर मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए भी प्रमोद शर्मा ने लाखों रुपये खर्च किए हैं। इतना ही नहीं पत्नी के नाम पर पिछले तीन वर्षों में 26 लाख रुपये से भी अधिक की अचल संपत्ति उसने अर्जित की है।
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ईडी की कार्रवाई से यह खुलासा हुआ कि गरीब ग्रामीणों को हर तरह की बुनियादी सुविधाओं से दूर रखने वाले नक्सली नेता खुद शानो-शौकत की जिंदगी जीते हैं। गत पांच फरवरी को ईडी ने बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के प्रस्ताव पर कुख्यात नक्सली कमांडर संदीप यादव उर्फ विजय यादव उर्फ रुपेश जी की 86 लाख रुपये की चल व अचल संपत्ति जब्त की। जब्त की गई संपत्ति में महंगी ब्रीजा कार के साथ-साथ रांची में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले उसके बेटे के पास से एक नहीं बल्कि दो स्पोर्ट्स बाइक बरामद की गई है जिनकी कीमत 2.36 लाख रुपये आंकी गई है।
कौन है प्रमोद शर्मा
प्रमोद शर्मा मूल रूप से जहानाबाद का रहने वाला है। नक्सली संगठन में उसकी पहचान तीन लाख रुपये के इनामी फरार नक्सली नेता प्रद्युम्न शर्मा के भाई के रूप में होती है। प्रमोद वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2016 तक मध्य बिहार के विभिन्न जिलों में लेवी वसूली का काम करता था। उसने विगत 19 जनवरी को जहानाबाद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। जबकि, उसका भाई प्रद्युम्न शर्मा अभी भी फरार है। विभिन्न राज्यों की पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बल उसकी तलाश में हैं।

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