मुख्य सचिव पिटाईः बुरी तरह फंसती जा रही है केजरीवाल की AAP, पुलिस को CCTV से छेड़छाड़ का शक

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यहां लगे सभी 14 सीसीटीवी कैमरे को समय से 40 मिनट 42 सेकेंड पीछे कर दिया गया था।
नई दिल्ली । दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार बड़ी मुश्किल में फंसती दिखाई दे रही है। मुख्य सचिव की पिटाई मामले में आम आदमी पार्टी को जल्द ही तगड़ा झटका लगने वाला है। दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास लगे सीसीटीवी कैमरों में टेम्परिंग (छेड़छाड़) की बात सामने आ रही है।
सोमवार तो सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के एडिशनल डीसीपी हरेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा कि AAP विधायकों और मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के बीच मीटिंग कैंप ऑफिस में नहीं, बल्कि सीएम केजरीवाल के आवास के ड्राइंग रूम में आयोजित थी।
पुलिस ने कोर्ट को यह भी बताया है कि सीसीटीवी का समय अलग-अलग है, ऐसे में आशंका है कि टैंपरिंग की गई है। साथ ही पुलिस ने कहा कि टैंपरिंग की जांच फॉरेंसिक साइंस लैबोर्टरी (FSL) करेगी। इस पर कोर्ट ने अपना फैसला कल यानी मंगलवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।
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दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की पिटाई के मामले में अब तक की जांच से पता चलता है यह पूर्व नियोजित था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में घटना वाले कमरे की जांच करने पहुंची पुलिस को वहां हैरान करने वाली जानकारी मिली है। यहां लगे सभी 14 सीसीटीवी कैमरे को समय से 40 मिनट 42 सेकेंड पीछे कर दिया गया था।
पुलिस को शक है कि पहले मुख्यमंत्री आवास में योजना बनाई गई और फिर कैमरे के साथ छेड़छाड़ करने के बाद मुख्य सचिव को आधी रात में बुलाकर उनके साथ मारपीट की गई।
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पुलिस मुख्यमंत्री आवास से कैमरे का एक डीवीआर जब्त कर जांच के लिए अपने साथ ले गई है। उस डीवीआर में पूरे एक माह की रिकॉर्डिंग है।
एडिशनल डीसीपी उत्तरी जिला हरेंद्र कुमार पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें शक है कि कैमरे के डीवीआर में छेड़छाड़ की गई है। जांच में इसकी पुष्टि होने पर केस में सुबूत मिटाने की धारा 201 भी जोड़ दी जाएगी। केजरीवाल के आवास में कुल 21 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसमें से महत्वपूर्ण जगहों पर लगे सात कैमरे बंद पाए गए। वहीं मुख्यमंत्री आवास के गेट पर लगे सबसे अहम मूविंग कैमरे के खराब पाए जाने के मामले ने पुुलिस को और हैरान कर दिया है।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि उक्त कैमरे कब से बंद पड़े हैं, क्योंकि यह भी संभव है घटना को अंजाम देने के लिए उक्त कैमरे को खराब कर दिया गया हो। घटना के पहले ही दिन से पुलिस को शक था कि साजिश रचने के बाद इसे अंजाम दिया गया। इसलिए केस में आपराधिक साजिश रचने की धारा 120बी लगा दी गई।
हरेंद्र कुमार का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए 20 फरवरी को ही पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर जांच के लिए डीवीआर देने की मांग की थी। मगर न तो केजरीवाल और न ही उनके कार्यालय से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर की। इसलिए शुक्रवार को पुलिस को डीवीआर लेने वहां आना पड़ा। जिस वक्त जांच की जा रही थी केजरीवाल अंदर मौजूद थे। कुछ देर बाद जब वे बाहर निकले तो मीडियाकर्मियों से कहा कि उन्हें खुशी है कि जांच हो रही है।
आ रही साजिश की बू
घटना के अगले दिन 20 फरवरी को मीडिया में जब यह मामला तूल पकड़ा तब मुख्यमंत्री आवास से एक फुटेज लीक कर यह दर्शाने की कोशिश की गई कि मुख्य सचिव के आरोप झूठे हैं। दरअसल वह फुटेज रात 12 बजे की ही थी। कैमरे का समय 40 मिनट 42 सेकेंड पीछे सेट होने के कारण आरोप के समय में अंतर था। मुख्यमंत्री आवास से कुछ विश्वस्त चैनलकर्मियों को ही यह फुटेज उपलब्ध कराई गई। इस फुटेज में दिख रहा है कि घटना के बाद अंशु प्रकाश पैदल ही बाहर निकल गए। पीछे से उनकी कार जब बाहर आई तब वह बैठकर वहां से भागे।
उधर सीएम आवास में मौजूद कर्मचारियों से जब पूछताछ की जा रही थी उसी दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ट्वीट कर यह आरोप लगाना शुरू कर दिया कि पुलिस प्रताड़ित करने के मकसद से जांच कर रही है। ईंट, पेंट व प्लास्टर के बारे में पूछताछ कर रही है। दोपहर 1.36 बजे पुलिस टीम जांच कर बाहर निकली। करीब दो घंटे तक मुख्यमंत्री आवास की जांच की गई। पुलिसकर्मियों ने घटनाक्रम का रिक्रिएशन किया।

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